
आगे कोई मोड नही
मुझे जिन्दगी के
रथ पर बैठा दो,
और उसके अश्वो को
पवन वेग से दौडा दो,
उस काल खंड तक
जहाँ प्यार में खोये
सब पलों का दर्द
बेमानी हो जाता है!
इक नई शुरुआत के
आश्वाशन पर
या
इस रथ को
ले चलो अतीत की ओर,
उस बिंदु तक
जहां कुछ गलत मोड मुड आये थे,
एक ऐसी राह पर
जिसके आगे
फिर कोई मोड नही है!
या फिर
घुमते इस काल चक्र से
कहो तो चुरा लूँ वह पल
जब हम एक साथ जिए थे,
सहेज रखूं उसे ही मन मस्तिष्क में,
संबल बन जाए वही
मेरे एकाकीपन का.....
DHEERENDRA,"dheer''




