शुक्रवार, 1 जुलाई 2016

जिन्दगी

जिन्दगी
कल खो दिया आज के लिए
आज खो दिया कल के लिए
कभी जी ना सके हम आज के लिए
बीत रही है जिन्दगी
कल आज और कल के लिए.

      दोस्तों आज मेरा जन्म दिन भी  है, मैंने आज  65  वर्ष पूरे कर लिए ...

गुरुवार, 5 मार्च 2015

होली से पहले

holi animated scraps, graphics फिर से होली आई रस बरसाते रंगों के संग, फिर से आई होली , फागुन का त्यौहार निराला भर लो अपनी झोली ! मौज मनाए मिल-जुल कर आओ खेल रचाए , लें गुलाल लें रंग फाग का सबसे प्रेम बढाए ! चारों ओर लगा है मेला मौसम बना रंसीला , स्नेह रंग की ऋतू आई कर लो तनमन गीला ! पिचकारी का रंग उड़ाएं हँसकर करे ठिठोली , ऊँची नीच का भेद भुलाऐ बन जाऐ हमजोली ! हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, हम सब भाई- भाई , आपस के मतभेद भुला दो फिर से होली आई ! धीरेन्द्र सिंह भदौरिया

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होली से पहले

ज़रा सा  मुस्करा  देना होली  मनाने  से पहले 
हर गम को जला  देना होली  जलाने से पहले 
 मत  सोचना  किसने दिल दुखाया है अब तक, 
   सबको  माफ़  कर  देना  रंग  लगाने  से पहले !  

क्या  पता  फिर  ये  मौक़ा  मिले  या  न  मिले 
इसलिए दिल को साफ़ कर लेना होली से पहले 
 कहीं ये सन्देश  पहले कोई  आपको  न  भेज दे, 
  होली की शुभकामनाए ले लीजिये  हमसे पहले !  
 

रविवार, 1 मार्च 2015

खुशखबरी

खुशखबरी
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जनपद सदस्य  के पद हेतु 
  11 प्रत्यासियों के बीच कड़े मुकाबले में  3997  वैध मतों   
में अपने  मित्रों के सहयोग से 850 मत  पाकर 36 मतों 
से चुनाव जीतने में कामयाब रहा | अपने सभी दोस्तों से 
अनुरोध है कि ईश्वर से विनय करे की मै अपने कर्तव्यों 
का निर्वहन निष्ठापूर्वक ईमानदारी से  कर सकूँ |


मंगलवार, 25 नवंबर 2014

जाड़े की धूप

 

 जाड़े की धूप

जाड़े की धुप
टमाटर का सूप,
मूंगफली के दाने
छुट्टी के बहाने,
तबीयत नरम 
पकौड़े गरम,
ठंडी हवा 
मुह में धुंआ,
फाटे हुए गाल
सर्दी से बेहाल,
तन पर पड़े  
ऊनी कपडे,
दुबले भी लगते 
मोटे तगड़े,
किटकिटाते दांत 
ठिठुरते ये हाथ,
जलता अलाव 
हांथों का सिकाव,
गुदगुदा बिछौना
रजाई में सोना,
सुबह का होना 
सपनो में खोना,
 
 


गुरुवार, 23 अक्तूबर 2014

दीप जलाये .

 दीप जलायें
खेतों में  दीप जलाये  कृषकों  ने  नई फसल के !
  दरिद्रता का घना अन्धेरा मिटा इसी के बल से !! 

चारो ओर धरा है जगमग ,आज सुहानी लगती !
 खुशहाली  के गीत गूँजते, नई आशाऐ  जगती !! 

हरवाहे  किसान महिलाएं, श्रम की माल पिरोती !
 दीपपर्व पर  कर न्योछावर,आज खुशी  के मोती !!

लक्ष्मी-सुत, लक्ष्मी का  वंदन  दीपावली  में  करता !
  जला  जला  माटी  के  दीपक, आज अन्धेरा  हरता !!

 
घर आनाज तो सदा दिवाली,संभव किसान है करता !
 लक्ष्मी-सुत  इसलिए  वही  है,खेतों में  स्वर्ण बरसता !!
 
धान,ज्वार,बाजरा,उड़द, मक्का की जब फासले आती !
 करे  किसान  फसल का  स्वागत, वे उसके गुण गाती !!

जितना उजला प्रकाश पूनम का उतनी काल निशा  है !
अंतर मिटा आज  ही  केवल ,यद्दपि विपरीत  दिशा है !!

श्रम  के दीप जलाकर लेकिन किसान प्रकाश है लाता !
 उसकी मेहनत प्रबल साधना से ही सारा जग है खाता !! 
dheerendra singh bhadauriya