शनिवार, 28 अप्रैल 2012

आगे कोई मोड नही ....



आगे कोई मोड नही

मुझे जिन्दगी के
रथ पर बैठा दो,
और उसके अश्वो को
पवन वेग से दौडा दो,
उस काल खंड तक
जहाँ प्यार में खोये
सब पलों का दर्द
बेमानी हो जाता है!
इक नई शुरुआत के
आश्वाशन पर
या
इस रथ को
ले चलो अतीत की ओर,
उस बिंदु तक
जहां कुछ गलत मोड मुड आये थे,
एक ऐसी राह पर
जिसके आगे
फिर कोई मोड नही है!
या फिर
घुमते इस काल चक्र से
कहो तो चुरा लूँ वह पल
जब हम एक साथ जिए थे,
सहेज रखूं उसे ही मन मस्तिष्क में,
संबल बन जाए वही
मेरे एकाकीपन का.....

DHEERENDRA,"dheer''

68 टिप्‍पणियां:

  1. उस बिंदु तक
    जहां कुछ गलत मोड मुड आये थे,

    बढ़िया प्रस्तुति ।
    आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. धीरेन्द्र जी
    घुमते इस काल चक्र से
    कहो तो चुरा लूँ वह पल
    जब हम एक साथ जिए थे,
    बहुत ही मार्मिक रचना. शब्दों को जुबां के साथ नया एहसास भी दे दिया आपने इस कविता में.

    उत्तर देंहटाएं
  3. ....आशा करता हूँ कि आपको सही मोड़ और आपका पल जल्द मिले !

    उत्तर देंहटाएं
  4. मन को गहराई तक छूते भाव... लाजवाब रचना के लिए आपका आभार

    उत्तर देंहटाएं
  5. काश के जीवन रथ ले जाता अतीत में......गलतियां सुधारने को..

    बहुत सुंदर भाव सर.

    सादर.

    उत्तर देंहटाएं
  6. घुमते इस काल चक्र से
    कहो तो चुरा लूँ वह पल
    जब हम एक साथ जिए थे,
    मन को छूते भाव, सुंदर रचना. नया एहसास ... आभार ।

    उत्तर देंहटाएं
  7. गहन भाव लिए बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

    उत्तर देंहटाएं
  8. जीवन का पल दो पल का नखलिस्तान ही जीवन का सच है ,ओएसिस है .संजोये रखो उसे बढ़िया प्रस्तुति उर वीणा के तारों सी .कृपया यहाँ भी पधारें रक्त तांत्रिक गांधिक आकर्षण है यह ,मामूली नशा नहीं
    शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/04/blog-post_2612.html
    मार -कुटौवल से होती है बच्चों के खानदानी अणुओं में भी टूट फूट
    Posted 26th April by veerubhai
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/04/blog-post_27.html

    उत्तर देंहटाएं
  9. काफी गहराई में उतरकर लिखा है .
    बढ़िया .

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत गहन और सुंदर प्रस्तुति...

    उत्तर देंहटाएं
  11. सबकी इच्छा लगभग ऐसी ही है...... काश पहुँच सकते उस कालखंड में या सुदूर अतीत में.
    वाह, क्या सुन्दर भाव है. साधुवाद.

    उत्तर देंहटाएं
  12. वाह...बहुत सुन्दर, सार्थक और सटीक!
    आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

    उत्तर देंहटाएं
  13. "कहो तो चुरा लूँ वह पल
    जब हम एक साथ जिए थे,
    सहेज रखूं उसे ही मन मस्तिष्क में,
    संबल बन जाए वही
    मेरे एकाकीपन का....."
    बहुत सुंदर भावाभिव्यक्‍ति !

    उत्तर देंहटाएं
  14. कल 29/04/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    हलचल - एक निवेदन +आज के लिंक्स

    उत्तर देंहटाएं
  15. जब विकल्प के सारे बन्ध टूट जाते हैं, जीवन मोड़ विहीन हो जाता है।

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत सुन्दर रचना --------सुन्दर भाव --------मन को छु गया

    उत्तर देंहटाएं
  17. गहन गंभीर रचना |गहरे भाव |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  18. इस रथ को
    ले चलो अतीत की ओर,

    काश .....

    उत्तर देंहटाएं
  19. बहुत सुन्दर गहन अभिव्यक्ति धीर जी बस ख़्वाबों में ही हम अपने रथ को मोड़ सकते हैं हकीकत में तो उस और ही दौड़ रहा है जहां से फिर कोई मोड़ नहीं जबाब नहीं आपकी इस रचना का

    उत्तर देंहटाएं
  20. मोड़ तो हमेशा रहेंगे जिंदगी में। रहना भी चाहिए।

    उत्तर देंहटाएं
  21. बेहतरीन रचना...
    सुन्दर अभिव्यक्ति....

    उत्तर देंहटाएं
  22. जहां कुछ गलत मोड मुड आये थे,
    एक ऐसी राह पर
    जिसके आगे
    फिर कोई मोड नही है!
    खूबसूरत प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  23. घुमते इस काल चक्र से
    कहो तो चुरा लूँ वह पल
    जब हम एक साथ जिए थे,
    सहेज रखूं उसे ही मन मस्तिष्क में,
    संबल बन जाए वही
    मेरे एकाकीपन का.....

    एक गंभीर प्रस्तुति. बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  24. अपनी कविताओं में बहुत ही सुंदर भाव को स्थान दे रहे हो धीर भाई । धन्यवाद ।

    उत्तर देंहटाएं
  25. इस रथ को
    ले चलो अतीत की ओर,
    उस बिंदु तक
    जहां कुछ गलत मोड मुड आये थे,
    एक ऐसी राह पर
    जिसके आगे
    फिर कोई मोड नही है!

    Bahut khoob

    उत्तर देंहटाएं
  26. कहो तो चुरा लूँ वह पल
    जब हम एक साथ जिए थे,
    सच में एकाकीपन के यही तो संबल है
    सुंदर भाव भरी रचना !

    उत्तर देंहटाएं
  27. कहो तो चुरा लूँ वह पल
    जब हम एक साथ जिए थे,
    सहेज रखूं उसे ही मन मस्तिष्क में,
    संबल बन जाए वही
    मेरे एकाकीपन का.....
    सुंदर भाव ...सुंदर अभिव्यक्ति ....!!

    उत्तर देंहटाएं
  28. प्रेम का सुन्दर चित्रण ... बहुत खूब...

    उत्तर देंहटाएं
  29. वाह बहुत सुंदर गहन भवाव्यक्ति ...

    उत्तर देंहटाएं
  30. इस रथ को
    ले चलो अतीत की ओर,
    उस बिंदु तक
    जहां कुछ गलत मोड मुड आये थे,................... उपरोक्त सुंदर प्रस्तुति हेतु आपका आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  31. अच्छी रचना,अच्छा विषय । समय की धारा मेँ सबकुछ बीतता है नहीँ बीतती तो समय की समता व तटस्थता ।

    उत्तर देंहटाएं
  32. सही कहा,गलतियों को सुधरने की तमन्ना सभी रखते है.
    खूबसूरत प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  33. संबल बन जाए वही
    मेरे एकाकीपन का....prerna deti hui.....

    उत्तर देंहटाएं
  34. गहरे भाव लिए हुए सुन्दर अभिव्यक्ति....
    बेहतरीन रचना...

    उत्तर देंहटाएं
  35. समय के बीते हुए मोड कब वापस आते हैं...कभी नहीं...

    हम चलें आज प्रिय एक एसी जगह
    हो जहां का जहां पर किनारा कोई।

    उत्तर देंहटाएं
  36. वाह! बहुत भावपूर्ण रचना। बधाई धीरेन्द्र जी।

    उत्तर देंहटाएं
  37. सुन्दर रचना ,लेकिन बिना मोड़ों के जीवन एकदम सीधा-सपाट -सा रह जायेगा !

    उत्तर देंहटाएं
  38. इस रथ को
    ले चलो अतीत की ओर,
    उस बिंदु तक
    जहां कुछ गलत मोड मुड आये थे,
    एक ऐसी राह पर
    जिसके आगे
    फिर कोई मोड नही है!


    बहुत सुन्दर एवं मर्मस्पर्शी रचना !
    हार्दिक शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  39. sweet poetry.........
    Sri Ram अल्प्संख्यक बने बहुसंख्यक**
    बहुसंख्यक हैं अल्प/
    जाने फिर से कब होगा?
    देश का कायाकल्प//
    www.sriramroy.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  40. कमाल की प्रस्तुति ....जितनी तारीफ़ करो मुझे तो कम ही लगेगी

    उत्तर देंहटाएं
  41. कहो तो चुरा लूँ वह पल
    जब हम एक साथ जिए थे,
    सच में एकाकीपन के यही तो संबल है !
    इन पलों को संभाल कर आगे ही बढ़ा जाए और क्या !!
    अच्छी रचना !

    उत्तर देंहटाएं
  42. Jindagi ke kashmas ko badi khubsurti se byan kiya hai...
    saadr...!

    उत्तर देंहटाएं
  43. घुमते इस काल चक्र से
    कहो तो चुरा लूँ वह पल
    जब हम एक साथ जिए थे,
    सहेज रखूं उसे ही मन मस्तिष्क में,
    संबल बन जाए वही
    मेरे एकाकीपन का....

    सुंदर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  44. एकाकीपन गीत सृजन का तत्व हुआ
    इसीलिये एकाकी से अपनत्व हुआ.

    सुंदर भाव.

    उत्तर देंहटाएं
  45. बहुत सुन्दर भावमय प्रस्तुति.
    कालचक्र का अहसास कराती.

    उत्तर देंहटाएं
  46. बीते काल में लौटना आसान होता तो फिर बात ही क्या थी ...
    मन के भावों कों शब्द दिये हैं आपने ...

    उत्तर देंहटाएं
  47. घुमते इस काल चक्र से
    कहो तो चुरा लूँ वह पल
    जब हम एक साथ जिए थे,
    सहेज रखूं उसे ही मन मस्तिष्क में,
    संबल बन जाए वही
    मेरे एकाकीपन का..... jiwant lines. shubhkamna

    उत्तर देंहटाएं
  48. बहुत खूबसूरत रचना.....

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,