बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

होली में ....


holi animated scraps, graphics
होली में

बहकी बहकी हर कली है होली में
महकी महकी हवा चली है होली में,

उन्मादों कि घटा घनेरी घिर आई
मलय पवन में चंवर झली है होली में,

अमरैय्या में कुहूँ कुहूँ करती कोयल
लगती मन को बड़ी भली है होली में,

रतन चुनरिया पिरियाई है सरसों की
चना चोली, गेंहू बाली है होली में,

रंग भरी पिचकारी स्नेह सौगात लिए
किसने क्या क्या चाल चली है होली में,

जीजाजी साली के गालो को छुकर
ढूढ़ रहे मिस्री कि डली है होली में,

नजर मिलाने तक से जो कतराती थी
वही पड़ोसन गले मिली है होली में,

भाभी देवर की मर्यादा को लेकर
घूंघट घूंघट बात चली है होली में,

पत्तों का नही पता अधर पर अंगारे
या कलमुंही टेसू जली है होली में,

कम्पित है क्यों लौ "धीर" की देहरी पर
फागुन इठलाती चली है होली में,
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--- DHEERENDRA,"dheer"

रविवार, 26 फ़रवरी 2012

चिंगारी...



चिंगारी

अपने घर में अपने हाथों आग लगाते देखे लोग
आग लगाकर खुदही उसमे जलभून जाते देखे लोग
जो भी करेगा बच पायेगा इसकी क्या गारंटी है,
फिर भी घात लगाकर हमने बम बरसाते देखे लोग

सफेद लबादा पहनके तनमें दलाली करते देखे लोग
अब तो रोज झूठ के हक़में शोर मचाते देखे लोग
सच को सच कह देने वाले पता नही वो कहाँ गए
कुछ सिक्कों के बदले पूरा देश बेचते देखे लोग

अपनी बात मनवाने को अनसन करते देखे लोग
देशभक्ति के गीत गली में खुलकर गाते देखे लोग.
अपने आँगन में बँदूके बोकर उन्हें सींचते रहते जो
बैठ शान्ति सभाओं में ऐसे ही आतेजाते देखे लोग
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DHEERENDRA
,

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

आज के नेता...


आज के नेता...

आज के नेता
एक अरब लोगों को पागल बना रहे है
अलग अलग पार्टी बनाकर
हमे आपस में लडवाकर
अपना मतलब निकाल रहे है,
कर रहे है बड़े बड़े घोटाले
रिश्तेदार और अपनों को टिकट,
दिलाकर हो जाते है मतवाले
भ्रष्टाचार कर भर रहे है बैंक के खाते सारे
आयी जांच की बात तो
हक दे दिया पत्नी को डर के मारे
एक नौजवान बेचारा पढ़-लिखकर
बड़ी मशक्कत एक छोटी सी नौकरी पाता है
पहुचते ही साठ साल उमर में,
उसे सेवा निवृत्त कर दिया जाता है
एक नेता जी उमर हो गई ९८ की
टाँगे डगमगाने लगी सांसे थमने लगी
हमने पूछा नेताजी से क्या अब भी मंत्री बनोगे
मेरी ओर देखे और् बोले,
अरे भाई हाई कमान की कृपा से
मेरा नम्बर आ गया है,
उनकी बात भी तो रखनी है
अभी ९८ का हुआ हूँ सेंचुरी भी तो पूरी करनी है
नेताओं की साठ के बाद आती है जवानी
मरने के बाद ही सेवा निवृत्त होती है
और खतम होती है कहानी,
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DHEERENDRA,

शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

सम्बोधन...


सम्बोधन

उस रोज जब तुमने
मुझे
"बेटा" पुकारा था,
कितना वात्सल्य कितना
अपनत्व था, तुम्हारे
इस स्नेहिल सम्बोधन में,
क्षण भर को लगा,
मानो मेरा बचपन
पुनःलौट आया हो,
जो खो चुका था
अपनों की भीड़ में
तुम्हारा स्नेह,नयनो में
उत्साह व् अधरों पर
हल्की मुस्कान रेखा ने
मुझे मेरे कर्तव्य का
बोध कराया
और तुम्हारा स्नेहशीष पा
मै गदगद हो गया
तुम्हारे चरणों को स्पर्श कर
अपने को पुर्णरूपेण
सफलता हेतु
परिवार को समर्पित कर दिया
और मै आज जो भी हूँ
सिर्फ तेरे कारण,
भले ही आज आप
हमारे बीच नहीं है
परन्तु हमेशा तेरी
कही बातों का याद आना
हाँ
माँ मुझे याद है,
तुम्हारा ममता भरा वो
बेटा
"सम्बोधन" कहकर बुलाना
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DHEERENDRA,

बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

कामयाबी..


कामयाबी...

रोने से तकदीर बदलती नही
वक्त से पहले रात ढलती नही
दूसरों की कामयाबी लगती आसान मगर
कामयाबी रास्ते में पडी मिलती नही

मिल जाए कामयाबी अगर इत्तेफाक से
यह भी सच है कि वह पचती नही
कामयाबी पाना है,पानी में आग लगाना
पानी में आग ,आसानी से लगती नहीं

ऐसा भी लगता है जिंदगी में अक्सर
दुनिया अपने जज्बात समझती नही है
हर शिकस्त के बाद जो टूटकर संभल गया
फिर कौन सी बिगड़ी बात बनती नही

हाथ बाँधकर बैठने से पहले सोच धीरेन्द्र
अपने आप कोई जिन्दगी संवरती नही,

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dheerendra

गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

मेरे छोटे से आँगन में ...


मेरे छोटे से आँगन में,..

मेरे छोटे से आँगन में रोज धूप आती है,

मगर दर्द के दरख्तों में,
जाने कहाँ छिप जाती है
ढूँढता है मन ज़रा सी जिंदगी को,
मगर रोज अँधेरे की ठंडक ही
इस मन को जलाती है.,

मेरे छोटे से आँगन में रोज धूप आती है

पेड़ है घने जो कट नहीं सकते
पत्ते है उलझे जो छंट नही सकते
इन्तजार उस आँधी का है
जो इन्हें गिरा दे.
आँधी नही आती
बरसात हो के चली जाती है

मेरे छोटे से आँगन में रोज धूप आती है

कभी तो गरमाऐगा मन
नया उजाला लाएगा जीवन
ये सपना खुली आँखों से
देखता हूँ मगर,
जल्दी ही नीद जाती है

मेरे छोटे से आँगन में रोज धूप आती है

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DHEERENDRA

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

बोतल का दूध...


बोतल का दूध

एक मैडम थी,
एक था उनका बच्चा
बच्चा था उम्र में बहुत कच्चा,
बच्चा जब भूख से रोने लगा
आसुओं से आखोँ को धोने लगा
मैडम ने थमा दी बच्चे को एक बोतल
उसमें डब्बे का दूध था टोटल,
बोतल में दूध था कुछ पानी
मैडम की अगड़ाई ले रही थी जवानी,
उस बनावटी दूध पीकर बच्चा सोने लगा
ये देख कर मेरा मन रोने लगा,....

समय यूँ ही ढलता गया,
वर्ष पर वर्ष बढ़ता गया
कुछ वर्षों बाद मैडम मुझसे मिली
थोड़ी शरमाई थोड़ी सकुचाई
फिर मुझसे बोली
धीरे से अपनी जवान खोली
भाई साहब एक सवाल पूंछू
अगर प्रश्न लगे खराब,
तो आप मत देना जबाब
ये आज कल के बच्चे बड़े होकर
माँ-बाप के प्रति
अपना कर्तव्य क्यों भूल जाते है
मैंने कहा-?
दोष तो आप जैसी माताओं का है
जो अपना कर्तव्य भूलकर,
अपने बच्चे को "बोतल का दूध" पिलाते है...
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DHEERENDRA

गुरुवार, 2 फ़रवरी 2012

40,वीं वैवाहिक वर्षगाँठ... पर

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40,वीं वैवाहिक वर्षगाँठ पर...
02/02/1972

मै और मेरी पत्नी मधु लता सिंहमेरा परिवार

कैसे बीते ये पल पता ही न चला
मुझे जीवन से नही है कोई गिला
40,वीं वैवाहिक वर्षगाँठ पर आपसे
मोहब्बत,खुशियाँ,और दुआ चाहिए,
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dheerendra