बहकी बहकी हर कली है होली में
महकी महकी हवा चली है होली में,
उन्मादों कि घटा घनेरी घिर आई
मलय पवन में चंवर झली है होली में,
अमरैय्या में कुहूँ कुहूँ करती कोयल
लगती मन को बड़ी भली है होली में,
रतन चुनरिया पिरियाई है सरसों की
चना चोली, गेंहू बाली है होली में,
रंग भरी पिचकारी स्नेह सौगात लिए
किसने क्या क्या चाल चली है होली में,
जीजाजी साली के गालो को छुकर
ढूढ़ रहे मिस्री कि डली है होली में,
नजर मिलाने तक से जो कतराती थी
वही पड़ोसन गले मिली है होली में,
भाभी देवर की मर्यादा को लेकर
घूंघट घूंघट बात चली है होली में,
पत्तों का नही पता अधर पर अंगारे
या कलमुंही टेसू जली है होली में,
कम्पित है क्यों लौ "धीर" की देहरी पर
फागुन इठलाती चली है होली में,
------------------------------------
--- DHEERENDRA,"dheer"






