शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

सम्बोधन...


सम्बोधन

उस रोज जब तुमने
मुझे
"बेटा" पुकारा था,
कितना वात्सल्य कितना
अपनत्व था, तुम्हारे
इस स्नेहिल सम्बोधन में,
क्षण भर को लगा,
मानो मेरा बचपन
पुनःलौट आया हो,
जो खो चुका था
अपनों की भीड़ में
तुम्हारा स्नेह,नयनो में
उत्साह व् अधरों पर
हल्की मुस्कान रेखा ने
मुझे मेरे कर्तव्य का
बोध कराया
और तुम्हारा स्नेहशीष पा
मै गदगद हो गया
तुम्हारे चरणों को स्पर्श कर
अपने को पुर्णरूपेण
सफलता हेतु
परिवार को समर्पित कर दिया
और मै आज जो भी हूँ
सिर्फ तेरे कारण,
भले ही आज आप
हमारे बीच नहीं है
परन्तु हमेशा तेरी
कही बातों का याद आना
हाँ
माँ मुझे याद है,
तुम्हारा ममता भरा वो
बेटा
"सम्बोधन" कहकर बुलाना
-----------------------------------
DHEERENDRA,

65 टिप्‍पणियां:

  1. sirji, sachmuch bhavuk kar diya aapne aaj...

    हाँ माँ मुझे याद है,
    तुम्हारा ममता भरा वो
    बेटा "सम्बोधन" कहकर बुलाना
    Sach mein bahut yaad aata hai........

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  2. इसी एक शब्द मे तो उसकी सारी ममता समाहित होती है।

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

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  4. कितनी गहराई और ममता छिपी हुई है....इस संबोधन में!..सुन्दर अनुभूति!

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  5. इन यादों को संभल कर रखियेगा और हमेशा बताइयेगा औरों को
    एक संबोधन में कितनी ताकत होती है

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  6. बेहतरीन प्रस्तुति.....
    हाँ माँ मुझे याद है,
    तुम्हारा ममता भरा वो
    बेटा "सम्बोधन" कहकर बुलाना

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  7. isi ek sambodhan me sara jagat nihit hai ,bahut bhaav pravan prastiti.

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  8. इसमें मां का वात्सल्य तो झलकता ही है।

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  9. माँ को समर्पित बहुत संवेदनशील रचना

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  10. माँ तो माँ ही होती है उसे भूलना स्वयं को भूलना है।
    बहुत खूब !

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  11. माँ को समर्पित यह रचना भावुक कर देने वाली है...

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  12. भले ही आज आप
    हमारे बीच नहीं है
    परन्तु हमेशा तेरी
    कही बातों का याद आना
    हाँ माँ मुझे याद है,
    तुम्हारा ममता भरा वो
    बेटा "सम्बोधन" कहकर बुलाना
    -----------------------------------हिमोग्लोबिन में मौजूद माँ की याद ताज़ा कर गई यह रचना .

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  13. रिश्तों की सार्थकता तलाशती सुंदर कविता.

    बधाई.

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  14. बहुत सुन्दर..
    ये एक संबोधन जाने कितने बंधन बाँध लेता है...

    सादर.

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  15. अनुपम भाव संयोजन के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  16. bahut bhav bhini abhivyakti ...............yeh ek ma ke liye gaurav ki baat hai .risto ko bayan karti sunder prastuti . badhai .

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  17. आपकी रचना बहुत ही भावुक कर गयी । मेरे पोस्ट पर आने के लिए धन्यवाद ।

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  18. बहुत भवपूर्ण रचना..माँ की याद तो कभी भुलाई नहीं जा सकती..

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    1. वात्सल्य रस की बेजोड़ कविता

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  19. कितनी सुन्दर संवेदनशील रचना....
    आदरणीय धीरेन्द्र भाई सादर बधाई.

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  20. वात्सल्य, भावुकता पूर्ण कविता - सुन्दर.

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  21. माँ दुनिया का सबसे कोमल लफ्ज़ और सबसे पाक रिश्ता... आपने इस रिश्ते को ह्रदय में संजोया है और इस कविता में व्यक्त किया है!!

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  22. बहुत भावपूर्ण रचना...ममतामयी सम्बोधन की सार्थकता बताती प्रस्तुति|

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  23. जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी ...

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  24. माँ का संबोधन अनमोल होता है.
    सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए आभार जी.

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  25. maan to maan hotee hai
    जो भी मन चाहता था
    बूढा शरीर अस्वस्थ
    पीड़ा से त्रस्त
    दर्द के मारे
    बैठा नहीं जा रहा था
    पर आँखों में चमक
    मन खुश
    ह्रदय गदगद था
    दर्द का
    अहसास ही नहीं था
    कई दिनों के बाद
    पुत्र का पत्र आया
    कानों ने
    कर्णप्रिय संगीत सुना
    महक से भरपूर
    फूल बगीचे में खिला
    रंग बिरंगी सुन्दर
    चिड़िया को देखा
    जो भी मन चाहता था
    उसे मिल गया था
    19-02-2012
    194-105-02-12

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  26. माँ के प्रेम को हम किसी भी तरह अक्षरों या रचनाओं में बाँध कर जाहिर नहीं कर सकते .वह इतना महान होता है ..फिर भी आपका प्रयास - अति उत्तम

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  27. मां का आशीर्वाद प्रकृति की सबसे शीतल छाया है।
    शांत रस का सुंदर उदाहरण।

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  28. माँ के वात्सल्य के आगे कोई भी कुछ भी नहीं .... उस निश्छल प्रेम की मिसाल कहीं नहीं मिलती ... अनुप रचना है आपकी ..

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  29. संवेदनशील रचना..बहुत सुन्दर..

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  30. बहुत सुन्दर.
    महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाये.

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  31. बहुत खूब लिखा है.. बहुत सुन्दर..

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  32. इस संबंधन के लिए तो जीवन तरसा है. बहुत खूब लिखा है.

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  33. sambodhan ke shabd jivan mein samvedna bhar dete hain. sundar abhivyakti, badhai.

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  34. maa to hamesha baccho ke dil mein rehti hai .........sunder rachna

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  35. माँ के आँचल के स्नेह में सिमटी दुनिया बहुत खूबसूरत दिखाई देती है.आपने लाजबाब लिखा है.
    सादर...!

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  36. माँ के आँचल के स्नेह में सिमटी दुनिया बहुत खूबसूरत दिखाई देती है.आपने लाजबाब लिखा है.
    सादर...!

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  37. वाह ! बहुत खुबसूरत एहसास ... बधाई .

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  38. sach kaha hai sabne bahut hi achchhi rachna hai ,mamta ka ahsaas maa se hi milta hai ya maa hi karati hai .ati sundar .

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  39. बहुत ही सार्थक सटीक एवं सुंदर प्रस्‍तुति

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  40. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  41. दुनिया का सबसे सुन्दर संबोधन और सबसे स्नेहिल रिश्ता यही है, माँ बेटे का रिश्ता... बहुत सुन्दर अनुभूति...

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  42. क्षमा कीजियेगा समय पर यह रचना नहीं पढ़ पाई ...!!
    बहुत सुंदर रचना है ...!!
    अनमोल भाव आपके ...बधाई

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  43. sundar bhavmayee prastuti..beta sambodhan kisi bhi umra me bachpan me vapas le jata hai.

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  44. माँ तो माँ हैं ...वो प्यार में निराकार हैं उस ईश्वर की तरह

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