शनिवार, 29 अक्टूबर 2011

नाम करेगी ......


नाम करेगी

बेटी किसी के लिए बोझ नही
इस उद्देश्य को पूरा करने -?
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
लक्ष्मी लाडली योजना और कन्यादान
योजनाओ के बाद लेकर आये है
बेटी बचाओ अभियान
इसके तहत बेटी वाले परिवारों को
सामाजिक,आर्थिक,भौतिक,
सुरक्षा मुहैया कराई जायेगी
इसमे आबास से लेकर पेंसन तक
बेटी वाले परिवारों को मिलेगी
माँ-बाप को चिंता नही
चेहरे पर मुस्कान खिलेगी
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बेटी बोझ नही बरदान बनेगी
बेटी बेटा बनकर अहसान करेगी
बेटियाँ,बेटो,से किसी तरह कमतर नहीं,
कल्पना चावला बनकर भारत का नाम करेगी

०००००
dheerendra






सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

दीपों का यह पर्व ......


orkut scraps
diwali scraps@diwaliscraps.in

दीपों का यह पर्व....

दीपक करने गए,धरती पर उजियार
आलोकित संसार है, भाग रहा अंधियार.

उजलापन यह कह रहा,मन में भर आलोक
खुशियाँ बिखरेगी सतत,जगमग होगा लोक.

दीपक नगमे गा रहे,मस्ती रहे बिखेर
सबके हिस्से है खुशी,हो सकती है देर.

छत पर उजियारा पला,रौशंन हुई मुडेर
या खुद लक्ष्मी आयेगी,या उसको ले टेर,

जगमग सारा जग हुआ,नगरऔर हर गाँव
संस्कार की जय हुई,मिली नेह को ठांव.

अंतर्मन उजला हुआ,दीपों का यह पर्व
हर इंसा अब कर रहा,आज स्वमं पर गर्व,

सत्य आज फिर पल रहा,धर्म करे जयघोष
अहंकार मत पालना,वरना खुद का दोष,

उजियारा इक भाव है,उजियारा गुणधर्म
उजियारे से प्रगति है ,समझो प्रियवर मर्म.

आलोकित संसार में,हरदम पलता प्यार
उजलेपन से ही सदा,जीवन पाता सार,

दीपों की यह है कथा,जीवन में उजियार
संघर्षो के पथ रहो, कभी मानो हार,

00000

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाए
२६/१० /२०११ /बुधवार,
dheerendra.


रविवार, 23 अक्टूबर 2011

एक दीप तुम जलाओ........

एक दीप तुम जलाओ

जीवन में है अँधेरा तो एक दीप तुम जलाओ
विपदाओं
का है
डेरा तो एक दीप तुम जलाओ
मिल जुल कर रहो ऐसे, जैसे है नभ में तारे
रोशन जरूर होगें सब, इक दिन बुझे सितारे
चाहो न हो बखेडा तो एक दीप तुम जलाओ

चारो तरफ खड़े है रक्षक हमारे तन के
जो न हुए कभी भी सेवक मेरे वतन के
हो दूर इनका घेरा तो एक दीप तुम जलाओ
इंसान
हो तो थोड़ी, इंसानियत दिखाओ
जो रह गए है पीछे, आगे उन्हें बढाओ

सच्चे ह्रदय से साथी, इक कदम तो बदाओ
जीवन में है अँधेरा तो एक दीप तुम जलाओ
शिकवे सभी मिटाकर, दिवाली तुम मनाओ
सबको गले लगाकर,
घर- घर दिये जलाओ
जीवन में है अँधेरा तो एक दीप तुम जलाओ

dheerendra

सोमवार, 17 अक्टूबर 2011

नई शुरुआत करे ......




नई शुरुआत करे..



आओ मिल कर कुछ काम करे
जग में भारत का नाम करे
मंदिर मस्जिद की बातें छोडो
आओं कुछ नई शुरूआत करे,

वृक्षों की हो रही कटाई घमासान
पृथ्वी का बढता जा रहा तापमान
प्रदुषण मुक्त वातावरण के लिए
पर्यावरण सुधार का अभियान रे

बढती जनसख्या और बेरोजगारी
नौकरी के लिए बढ़ती मारामारी
युवा भटक रहे -शिक्षित होकर
नये रोजगार सृजन का विचार करे

भ्रष्टाचार,आतंक की फैलती जाली
अफसर नेता मिटा रहे देश की लाली
इन सबको सबक सिखाने के लिए
जनलोकपाल कानून का ईजाद करे

गर्भ में मरती कितनी कन्याए
माँ,मजबूरी में सहती यातनाये
उस भूर्ण को दुनिया में लाने का
बेटी बचाओ, आवाज को बुलंद करे

हिंदू मुस्लिम और सिख ईसाई
हम सब आपस में है भाई-भाई
आओ हम सब मिलजुल करके
सुख दुःख आपस में आत्मसात रे

सबसे अच्छा सबसे न्यारा
सबसे प्यारा देश हमारा
काश्मीर से कन्याकुमारी तक
खुशियों की बरसात करे

आओ पहले हम शुरूआत करे
चलो जनता से दरख्वास्त करे
दुनिया में भारत को आगे लाना है
आइये,मिलकर कुछ नई शुरुआत करे
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dheerendra







मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

तुम अमर हो गए.....















तुम अमर हो गये.......

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गजलों रूह से
परिचय तो आपने कराया
सुरों की बरसात में भीगना
आपने सिखाया
लफ्जों का मीठापन
आवाज की गहराई से
वास्ता आपके कारण ही पड़ा
और तुम ये कैसे जुदा हो गए
हर तरफ थे हर जगह हो गए.....

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तुम कल थे आज कहाँ खो गये
अकेला छोड़ तुम फ़ना हो गये
तन्हा तन्हा दू:ख झेलेगे सदा,
जीत, से तुम जगजीत हो गये

अचानक
तुम ये कैसे जुदा हो गए

तुम हर तरफ थे हर जगह हो गए
जिक्र,जब भी होगा गजलों का-,
होठों
से,गा कर तुम अमर हो गए,,,,




१० /१० /२०११ /गजल सम्राट-गजल गायक -श्री जगजीत सिंह जी निधन पर
श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ,ईश्वर उनकी आत्मा को शांती प्रदान करे

रविवार, 9 अक्टूबर 2011

चले मनाने आज दिवाली......



















चले मनाने आज दिवाली......

नेता बन, कर रहे घोटाला
कोई नही है सुनने वाला
फिर भी लोग समझ नहीं पाते
हाँथ मिला, पहनाते माला

जमा कर रहे है,कमाई काली
चमन लूट, कर रहे है खाली
आश्वशन के भाषण सुनकर
जिंदाबाद कर,बजा रहे है ताली

भ्रष्टाचार और आतंक की जाली
महगाई भूख की बढती डाली
याद करो तुम उन लोगों को
जो डुबा रहे भारत की लाली

देश में ऐश कर रहे है माली
हम सब बाद में देते है गाली
आओ मिलकर सबक सिखाते
जो खीच रहे गरीबों की थाली

गया दशहरा आयी दिवाली
जनता कितनी भोली भाली
भूल गयी सारी बातों को
चले मनाने आज दिवाली.....



dheerendra.....

बुधवार, 5 अक्टूबर 2011

विजयादशमी......





















विजयादशमी......


विजयादशमी,
एक मात्र पर्व नहीं
यह एक प्रतीक है -?
कई सारी बातों का
साहस और सच्चाई का
बुराई और अच्छाई का
नि:स्वार्थ सहायता
मित्रता और वीरता
प्रतिभाशाली और दंभ का
रावण जैसे स्थभं का
अलग-अलग
भले-बुरे तत्वों का प्रतीक है
अच्छाई, राम की-
बुराई, रावण की-
सीख लेने की बनाई गई रीत
अच्छाई की बुराई पर जीत
विजय की खुशी मनाने का प्रतीक
,

विजयादशमी......

dheerendra.....