रविवार, 27 अक्तूबर 2013

तुलसी बिन सून लगे अंगना

तुलसी  बिन  सून  लगे  अंगना
( सवैया छंद )

किस लायक जीवन प्यार बिना,किस लायक प्रीत बिना सजना ,
ममता किस लायक  पूत बिना, तुलसी  बिन  सून  लगे अंगना !
किस लायक जीवन धेय बिना, किस लायक साजन के  सजना ,
सरिता किस  लायक नीर  बिना, बिन भाव लिये कविता पढना !

 
अलगाव  रहा अपनेपन  से, निज  जीवन  में  बिखराव रहा !
  पग है अति बोझिल मंजिल के, मन मे इतना उलझाव रहा !   
शुचि धीरज भाव भरा फिर भी, भ्रम-भाव भरा भटकाव रहा !
दुख से  न दुराव  रहा अब तो,सुख से  न विशेष  लगाव रहा !


44 टिप्‍पणियां:

  1. फकीराना अंदाज़ लिए हैं ये लाजवाब छंद ...
    आनंद आ गया ...

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  2. बहुत बढ़िया छंद....
    बधाई!!

    सादर
    अनु

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  3. बहुत बेहतरीन छंद ...
    सुन्दर...
    :-)

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  4. धीरेन्द्र भाई ... हर विधा पर आपकी कलम चल रही hai साधुवाद

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  5. नमस्कार !
    आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा कल सोमवार [28.10.2013]
    चर्चामंच 1412 पर
    कृपया पधार कर अनुग्रहित करें |
    सादर
    सरिता भाटिया

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  6. सुन्दर प्रस्तुति।
    साझा करने के लिए धन्यवाद।

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  7. दुख से न दुराव रहा अब तो,सुख से न विशेष लगाव रहा !.......................यह सब परिस्थितियों की विडम्‍बना से उपजा दर्शन है, जो कई-कई मायनों में विचारणीय है।

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  8. बढ़िया प्रस्तुति-
    आभार आदरणीय-

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  9. बेहतरीन छंद ...बहुत सुंदर........

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  10. सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

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  11. वाह ...दोनों प्रस्तुति मनमोहक
    छंदमय रचना की मिठास के क्या कहने

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  12. सुन्दर भावप्रणय प्रद्तुती

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  13. आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन शहीद जतिन नाथ दास और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  14. सुन्दर प्रस्तुति
    सार्थक अभिव्यक्ति
    सादर

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  15. अलगाव रहा अपनेपन से, निज जीवन में बिखराव रहा !
    पग है अति बोझिल मंजिल के, मन मे इतना उलझाव रहा !
    शुचि धीरज भाव भरा फिर भी, भ्रम-भाव भरा भटकाव रहा !
    दुख से न दुराव रहा अब तो,सुख से न विशेष लगाव रहा !
    बहुत खूब भदौरिया साहब।

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  16. दोनों सुन्दर लाजवाब छंद ...

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  17. बहुत सुंदर उत्कृष्ट प्रस्तुति

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  18. दुख से न दुराव रहा अब तो,सुख से न विशेष लगाव रहा !

    ...वाह! बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  19. बहुत ही सुंदर, जीवन का दर्शन लियं छंन्द। न मुक्तिर्नबंध वाला भाव।

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  20. किस लायक जीवन प्यार बिना,किस लायक प्रीत बिना सजना ,
    ममता किस लायक पूत बिना, तुलसी बिन सून लगे अंगना !
    बहुत सुन्दर ...

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  21. छंद कम ही पढने को मिलते हैं आजकल.
    अर्थपूर्ण छंद लिखे हैं आप ने...
    सच बिना भाव कविता पढना नीर बिन नदिया के जैसा ही है.

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  22. तुलसी बिन सून लगे अंगना ......................nice

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  23. .दीपावली की शुभकामनाएं...

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  24. बहुत ही खूबसूरत छंद हैं दोनों ! दीपावली के पर्व की आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनायें !

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  25. दीपावली के पावन पर्व की बधाई ओर शुभकामनायें ...

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,