रविवार, 20 अक्तूबर 2013

हमने कितना प्यार किया था.

हमने कितना प्यार किया था.
 

   अर्ध्द- रात्रि  में  तुम  थीं  मैं  था, मदमाता  तेरा  यौवन  था ,  
  चिर - भूखे  भुजपाशो  में  बंध, अधरों का रसपान किया था ! 

हमने कितना प्यार किया था !!

 ध्येय  प्रणय-संसर्ग  मेरा था, हृदय तुम्हारा कुछ सकुचा था ,
 फिर भी कर स्वीकार इसे तुम,तन मन मुझपे वार दिया था !

हमने कितना प्यार किया था !!

थकित  बदन  चुपचाप पड़े थे ,मरू-थल  में  बरसे  सावन थे ,
 हम  दोनो  ने  एक  दूजे  को , प्यारा  सा  उपहार  दिया  था ! 
 
हमने कितना प्यार किया था  !! 

रचनाकार - विक्रम सिंह, केशवाही,शहडोल,
  

53 टिप्‍पणियां:

  1. पुरानी एल्बम में लगी हुई फोटो को देख रहा था
    यादें अपनी कुछ पुरानी कागज पे यूं लिख रहा था !

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  2. बहुत प्‍यारा है यह प्‍यार।

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  3. प्यार भरी रचना बहुत ही अच्छी लगी मुझे ..........शुभकामनायें ।

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  4. खूबशूरत अंदाज़ में लिखी गई प्यार और समर्पण की चिरपरिर्चित अनुभूतिओं के ताने बाने से बनी बेहतरीन प्रस्तुति ,

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  5. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन बच्चा किस पे गया है - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. ब्लॉग बुलेटिन में मेरी पोस्ट शामिल करने के लिए आभार ...शिवम् जी,

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  6. .सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति .बधाई .

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (21-10-2013)
    पिया से गुज़ारिश :चर्चामंच 1405 में "मयंक का कोना"
    पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  8. बहुत सुन्दर भावनात्मक प्रस्तुति...!सादर आभार !

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  9. बहुत सुन्दर रचना.....
    सादर
    अनु

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  10. प्रणय को खूबसूरती से अभिव्यक्त किया है ।

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  11. दीपावली की सुभकामनाए सुंदर और मनोहारी प्रस्तुति

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  12. विक्रम जी की रचनाएं मधुर रस लिए होती हैं ...
    आभार इस रचना का ...

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  13. साझा करने का आभार, बधाई विक्रम जी को इस गीत के लिए !

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  14. प्रेम रस से भरपूर अतिसुन्दर अभिव्यक्ति !
    नई पोस्ट महिषासुर बध (भाग तीन)

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  15. सुन्दर अभिव्यक्ति ….साझा करने के लिए आपका आभार

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  16. सुंदर प्रेम रस से परिपूर्ण भावभिव्यक्ति ...

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  17. उत्कृष्ट कृति। आभार।
    कृपया देखें ..
    http://kadaachit.blogspot.in/2013/10/blog-post_2536.html

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  18. अतिसुंदर भावनात्मक और रमणीय प्रस्तुति.
    मेरे ब्लॉग पर भी आप सभी का स्वागत है.
    http://iwillrocknow.blogspot.in/

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  19. dheerendra ji abhi bahut vyast hoon isi karan yahan waqt nahi de pati ,shukriyaan aane ke liye

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  20. थकित बदन चुपचाप पड़े थे ,मरू-थल में बरसे सावन थे ,
    हम दोनो ने एक दूजे को , प्यारा सा उपहार दिया था !

    हमने कितना प्यार किया था !!

    कायिक स्थूल प्रेम का सूक्ष्म रूपक तत्व लिए है यह रचना।

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  21. अति सुंदर ..विक्रम जी की श्रंगार में भीगी मधुर अभिव्यक्ति ..आपको सादर बधाई

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  22. हमने कितना प्यार किया था !

    सुंदर अभिव्यक्ति !

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  23. ध्येय प्रणय-संसर्ग मेरा था, हृदय तुम्हारा कुछ सकुचा था ,
    फिर भी कर स्वीकार इसे तुम,तन मन मुझपे वार दिया था !----

    बहुत सुंदर रचना
    सादर

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  24. प्यार का खूबसूरत रेखांकन

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  25. श्रंगारोत्कर्ष लिये सुन्दर रचना।

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  26. प्यार भरी बहुत सुन्दर रचना।

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  27. प्यार भरी बहुत सुन्दर रचना।

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  28. बढ़िया प्रस्तुति है भाई धीर जी-
    आभार आपका-

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