मिली देश को आजादी, जन जन का मन हर्षाया
पर भारत माता के ह्रदयघाव, कोई देख न पाया,
वीर सपूतों ने दी थी कुर्बानी,अपनी जान गंवाकर
मिटा दिया अपनी तरुणाई, माँ की लाज बचाकर,
लाखों अपमान सहे माँ ने,पर कभी नही घबराई
जब खून बहा बेटों का, तो उसकी आत्मा थर्राई,
माँ तो सबकी होती है,विदेशी होया हिन्दुस्तानी
लहू सभी का एक रंग है, क्यूँ बन जाता है पानी,
एक देश में शीश चढाये,दूजा लूट रहा है जान
बेटा बनकर ही करते है,भारत माँ का अपमान,
माँ बहनों ने भी साथ दिया अपना सर्वस्य गवांकर
फिर भी सब खुश थे, हिन्दुस्तान आजाद कराकर,
कहाँ गई वो आजादी, जिन लोगो के घर बार लूटे
बच्चे अनाथ होकर घुमरहे,बहनों के सिन्दूर मिटे,
नही सुरक्षित है अस्मत, घरके अंदर हो या बाहर
अब फ़रियाद करे किससे,अपनों को भक्षक पाकर,
भाई-भाईका खून बहा,होरहा ये कैसा अत्याचार
आज उसी आजादी से, हो रहा ये देखो भ्रष्टाचार,
आज उसी आजादी से, हो रहा ये देखो भ्रष्टाचार,
आजादी का मतलब क्या, सही समझ में आ जाए
बदलके मानसिकता अपनी हम,अपना देश बचाएं,
बदलके मानसिकता अपनी हम,अपना देश बचाएं,
आइये हम सब मिलकर के एक ,नया हिन्दुस्तान बनाए
फिर दे मुबारकबाद सभी को, नए साल की खुशी मनाये,
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---dheerendra---
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