शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

0--नए साल की खुशी मनाएं--0 dheerendra.....


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नए साल की खुशी मनाये...

मिली देश को आजादी, जन जन का मन हर्षाया
पर भारत माता के ह्रदयघाव, कोई देख न पाया,

वीर सपूतों ने दी थी कुर्बानी,अपनी जान गंवाकर
मिटा दिया अपनी तरुणाई, माँ की लाज बचाकर,

लाखों अपमान सहे माँ ने,पर कभी नही घबराई
जब खून बहा बेटों का, तो उसकी आत्मा थर्राई,

माँ तो सबकी होती है,विदेशी होया हिन्दुस्तानी
लहू सभी का एक रंग है, क्यूँ बन जाता है पानी,

एक देश में शीश चढाये,दूजा लूट रहा है जान
बेटा बनकर ही करते है,भारत माँ का अपमान,

माँ बहनों ने भी साथ दिया अपना सर्वस्य गवांकर
फिर भी सब खुश थे, हिन्दुस्तान आजाद कराकर,

कहाँ गई वो आजादी, जिन लोगो के घर बार लूटे
बच्चे अनाथ होकर घुमरहे,बहनों के सिन्दूर मिटे,

नही सुरक्षित है अस्मत, घरके अंदर हो या बाहर
अब फ़रियाद करे किससे,अपनों को भक्षक पाकर,

भाई-भाईका खून बहा,होरहा ये कैसा अत्याचार
आज उसी आजादी से, हो रहा ये देखो भ्रष्टाचार,

आजादी का मतलब क्या, सही समझ में आ जाए
बदलके मानसिकता अपनी हम,अपना देश बचाएं,

आइये हम सब मिलकर के एक ,नया हिन्दुस्तान बनाए
फिर दे मुबारकबाद सभी को, नए साल की खुशी मनाये,
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---dheerendra---

रविवार, 25 दिसंबर 2011

बेटी और पेड़....


बेटी और पेड़

बेटी बोली पेड़ से, कैसे हो तुम भाई,

हम दोनों ने एक सी किस्मत है पाई,

किस्मत है पाई, दोनों को मारा जाता,

मुझे गर्भ में,तुमको बाहर काटा जाता,


बेटीकी बात सुन, पेड़ ने किया आत्मसात,

दोनों ने किया फैसला,समझाई जाऐ बात,

समझाई जाऐ बात,दिया इंसानों को मश्वरा,

हम दोनों है पृथ्वी की,"नूतनता"और"उर्वरा

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dheerendra

सोमवार, 19 दिसंबर 2011

महत्व .....

महत्व...

आफिस में क्लर्क का, व्यापार में संपर्क का.
जीवन में वर्क का, रेखाओं में कर्क का,
कवि में बिहारी का, कथा में तिवारी का,
सभा में दरवारी का,भोजन में तरकारी का.
महत्व है,...
ससुराल में साली का,बगीचे में माली का,
बर्तन में थाली का, कान में बाली का,
घड़ी में कमानी का, उम्र में जवानी का,
ननिहाल में नानी का अरब में पानी का,
महत्व है,...
जिले में कलेक्टर का,नेता में मिनिस्टर का,
बस में कंडेक्टर का, इंसान में करेक्टर का,
गाँव में नाई का, कोठे में बाई का,
देवर और भौजाई का,ठण्ड में रजाई का,
महत्व है,...
घर में आँगन का, दही में माखन का,
जाति में ब्राहमन का, त्योहारों में सावन,
माँ की लोरी का, गाँव की गोरी का,
राखी की डोरी का, फागुन की होरी का,
महत्व है,...
कुर्ते में जाकेट का, पैंट में पाकेट का,
खेल में क्रिकेट का, क्रिकेट में विकेट का,
फूलों में गुलाब का, KBC में जबाब का,
एकाउंट में हिसाब का, नशे में शराब का,
महत्व है,...
कंद में आलू का, सीमेंट में बालू का,
मूर्खों में चालू का, नेताओं में लालू का,
आम के आचार का, फलों में अनार का,
औरतों के सिंगार का, राज्यों में बिहार का,
महत्व है,...
जीवन में बचपन का, बचपन में लड़कपन का,
चूडियों के खनखन का, दिल में धडकन का,
अफसरों से सेटिंग का, सचिन के बैटिग का,
ट्रेन में वेटिंग का, मोबाईल से चैटिंग का,
महत्व है,...
पूजा में मंत्र का, साधुओं में संत का,
आज के जनतंत्र का, कहानी में अन्त का,
शिक्षा में संस्थान का, कलयुग में विज्ञानं का
बनावटी शान का, मेड इन जापान का,
महत्व है,...
दरगाह में मन्नत का, मरने पर जन्नत का,
खाने में पंगत का, अच्छे लोगों के संगत का,
सलमान के बाडी का,अमिताभ के दाढी का,
अहिंसा के लिए गांधी का,अन्ना के आंधी का,
महत्व है,...
ज्ञान में लाला का, माकान में ताला का
पढ़ने में शाला का, स्वागत में माला का,
गेंहूँ के आटे का, आलू में भाटे का,
जुताई में नाटे का, गाल में चांटे का
महत्व है,...
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dheerendra.

मंगलवार, 13 दिसंबर 2011

जनता सबक सिखायेगी...

जनता सबक सिखायेगी...

राजनीति की मंडी में, प्रजातंत्र नीलाम हो गया
गुंडागर्दी चोर चकार ,शहर ग्राम में आम हो गया,
गया भाड में देश, इन नेताओं की मक्कारी से
इनसे नफरत हो गई देश को, इनके भ्रष्टाचारी से,

जहर इन्हीं का बोया है, प्रेम-भाव परिपाटी में
घोल दिया बारूद इन्होने, हँसते गाते माटी में,
मस्ती में बौराये नेता, चमचे लगे दलाली में
रख छूरी जनता के,अफसर मस्त है लाली में,

नेता,चोर,और तनखैया, सियासती भगवांन हो गए
अमरशहीद मातृभूमि के, गुमनामी में आज खो गए,
भूल हुई शासन दे डाला, सरे आम दु:शाशन को
हर चौराहा चीर हरन है, व्याकुल जनता राशन को,

सपने में कभी न सोचा था,जन नेता ऐसा होता है
चुन कर भेजो संसद में, कुर्सी में बैठ कर सोता है,
जनता की बदहाली का, इनको कोई ज्ञान नहीं
ये चलते फिरते मुर्दे है, इन्हें राष्ट्र का मान नहीं,

नेताओं की पूजा क्यों, क्या ये पूजा लायक है
देश बेच रहे सरे आम, ये ऐसे खल नायक है,
इनके करनी की भरनी, जनता को सहना होगा
इनके खोदे हर गड्ढे को,जनता को भरना होगा,

झूठी कसमें खा संसद में, मंत्री पद पा जाते है
सारे तन्त्र कुतर डाले,जनता को कच्चा खाते है,
ये कलयुग के कालनेम है ,सब कुछ इनकी माया है
राष्ट्र प्रगति का सारा धन, इनके पेट समाया है,

सब कुछ जनता जान गई ,इनके कर्म उजागर है
चुल्लू भर जनता के हिस्से,इनके हिस्से सागर है,
छल का सूरज डूबेगा , नई रौशनी आयेगी
अंधियारे बाटें है तुमने, जनता सबक सिखायेगी
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dheerendra..
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मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

आज चली कुछ ऐसी बातें....



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आज चली कुछ ऐसी बातें...

आज चली कुछ ऎसी बातें, बातों पर हैं जाएँ बातें

हँसती हुयी सुनी हैं बातें, बहकी हुयी सुनी हैं बातें
बच्चो की क्या प्यारी बातें, इनकी बातें ,उनकी बातें
होती हैं कुछ अपनी बातें, दिल को छू जाती हैं बातें
आसूँ में कुछ डूबी बातें, क्यूँ करते हो ज्यादा बातें


आज चली कुछ ऐसी बातें, बातों पर हो जाएँ बातें

होती बड़ी मृदुल कुछ बातें, कर्कश भी होतीं है बातें
प्रेम कराती हैं ,ये बातें, बातें बंद कराती बातें
सहनी पड़ती हैं कुछ बातें, सही नहीं जातीं कुछ बातें
उचे स्वर में होतीं बातें, चुपके -चुपके होतीं बातें

आज चली कुछ ऐसी बातें,बातों पर हो जाएँ बातें

नयनों में जब होतीं बातें, क्या समझोगे ऎसी बातें
हर भाषा में होतीं बातें, कुछ सच्ची कुछ झूठी बातें
हार की बातें जीत की बातें, गीत और संगीत की बातें
ज्ञान और विज्ञान की बातें, हर मौसम पर करते बातें

आज चली कुछ ऐसी बातें, बातों पर हो जाएँ बातें

कभी वीरता की हों बातें, क्रोध भरी भी होतीं बातें
डींग हाकती हैं कुछ बातें, डरी और सहमी सी बातें
ध्रणा दर्द पर भी हों बातें, जन्म म्रत्यु पर होती बातें
बंद करो भी ऐसी बातें, अब न सुनी जाती ये बातें

आज चली कुछ ऐसी बाते,बातों पर हो जाएँ बाते

स्वार्थ और परमार्थ की बातें, धनी और निर्धन की बातें
ताकतवर निर्बल की बातें, भूखे प्यासों की भी बातें
सुनने जाते हैं कुछ बातें, सुनकर न सुनते कुछ बातें
कुछ होतीं है ऐसी बातें, कह न कही सकते वे बातें

आज चली कुछ ऐसी बातें, बातों पर हो जाएँ बातें

ममता मयी हैं माँ की बातें, शिक्षा देती गुरु की बातें
अच्छी और बुरी कुछ बातें, है गंभीर बहुत सी बातें
कभी कभी भरमाती बातें, है इतिहास बनाती बातें
युगों युगों तक चलती बातें, कुछ होतीं हैं ऎसी बातें

आज चली कुछ ऐसी बातें, बातों पर हो जाएँ

किसके दम पर इतनी बातें, इस पर भी हो जायें बातें
दिल की धड़कन से हैं बातें, सासों पर निर्भर हैं बातें
जब तक करती हैं ये बातें, तब तक है अपनी भी बातें
अभी बहुत अनकही हैं बातें, सोच समझ कर करना बातें

आज चली कुछ ऐसी बातें, बातों पर हो जाएँ बातें
vikram
http://vikram7.blogspot.com

रविवार, 4 दिसंबर 2011

जूठन.....

जूठन

विवाह-समारोहों के समय नित्य प्रति कहीं न कहीं प्रीत भोज में शामिल होना पड़ता है,ऐसेही एक रिश्तेदार के यहाँ विवाह में शामिल होने के लिए मुझे ग्वालियर जाना पड़ा, मेहमान अधिक होने के कारण सारी व्यवस्था नगर के सुंदर से बड़े एक विवाह सदन में किया गया था, शादी की सारी व्यवस्था में आधुनिकता खुमार छाया था, मै भी बुफे पर खाने का आनंद लेरहा था,अचानक बाहर गेट पर किसी की जोरजोर से रोने की आवाज सुनाई पड़ी, कौतुहल बस मै गेट गया वहाँ मैंने देखाकि १०-१२वर्षीय बच्ची को तीन चार सूटधारी मिलकर मार रहेथे बच्ची के मुहसे खून निकल रहा था और वह डरके मारे थरथर काँप रही थी,उसके बहती आँखों में दया की भीख के भाव थे, मैंने पूछा,भाई ऐसी क्या बात हो गई है जिसके कारण इस बच्ची के साथ इतनी मार पीट कर रहे हो?उन सूटधारी सज्जनों में से कोई जबाब देता, उसके पूर्व ही बच्ची रोते-रोते जोर से बोली,'बाबूजी, ये मेरी बात ही नही सुनते है,बाबूजी,माँ की कसम,मैंने ये हलुए वाली कटोरी स्टाल से नही उठाई थी इन्ही साहबोंमें से किसीने बाहर मेरे सामने कचरे की बाल्टी में ये हलुए वाली कटोरी फेकदी थी,बस बाबूजी, मैंने वही उठा ली,
मुझे नहीं मालूम था बाबूजी,कि "जूठन" फेकने के लिए है, खाने के के लिए नहीं,
यह सुनते ही सूटधारियो की नजरें शर्म के मारे नीचे झुक गई,और मै सोच रहा था, कि जूठन फेकने के वाले सभ्य समाज के ठेकेदारों को सजा कौन देगा......
--------dheerendra....इस लेख पर आपके विचार आमंत्रित है.........