रविवार, 25 दिसंबर 2011

बेटी और पेड़....


बेटी और पेड़

बेटी बोली पेड़ से, कैसे हो तुम भाई,

हम दोनों ने एक सी किस्मत है पाई,

किस्मत है पाई, दोनों को मारा जाता,

मुझे गर्भ में,तुमको बाहर काटा जाता,


बेटीकी बात सुन, पेड़ ने किया आत्मसात,

दोनों ने किया फैसला,समझाई जाऐ बात,

समझाई जाऐ बात,दिया इंसानों को मश्वरा,

हम दोनों है पृथ्वी की,"नूतनता"और"उर्वरा

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dheerendra

68 टिप्‍पणियां:

  1. सही बात.... लड़की और लकड़ी में अंतर ही क्या है।

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  2. कविता तो अच्छी है ही, चित्र आपने अद्भुत लगाया है।

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  3. मर्मस्‍पर्शी रचना।
    बेहतरीन संदेश छिपा है आपकी इस पोस्‍ट में।
    शुभकामनाएं.......

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  4. समझाई जाऐ बात,दिया इंसानों को मश्वरा,
    हम दोनों है पृथ्वी की,"नूतनता"और"उर्वरा”

    आपका सन्देश , सभी उन इंसानों तक ,
    पहुचँ जाये , जो ऐसा करते हैं ,
    दोनों की रक्षा हो सके.... !!
    अति उत्तम रचना..... :):)

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  5. बेटीकी बात सुन, पेड़ ने किया आत्मसात,

    दोनों ने किया फैसला,समझाई जाऐ बात,

    समझाई जाऐ बात,दिया इंसानों को मश्वरा,

    हम दोनों है पृथ्वी की,"नूतनता"और"उर्वरा”

    आपका मेरे पोस्ट पर आना अच्छा लगा ।आपकी प्रस्तुति भी अच्छी लगी । धन्यवाद ।

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  6. सुंदर चित्र के साथ सुंदर कविता ।

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  7. सुन्दर शब्दचित्र, सुन्दर चित्र..

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  8. कविता अच्छी है.
    चित्र लाजवाब है.अभी भी चित्र देख रहा हूँ.

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  9. अच्छा संदेश, बढि़या कविता।

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  10. जबकि बेटियाँ ही संतति का आधार बनतीं हैं खानदान की वन्श्वेल को पल्लवित करतीं हैं जहां जाती हैं और पेड़ तो खुद ही अपनी खाद भी बन जातें हैं .ऑक्सीजन लुतातें हैं ता -उम्र .फल फूल और छाया देतें हैं .सुन्दर प्रतीक विधान लिए पर्यावरण सचेत रचना .

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  11. बेटीकी बात सुन, पेड़ ने किया आत्मसात,

    दोनों ने किया फैसला,समझाई जाऐ बात,

    समझाई जाऐ बात,दिया इंसानों को मश्वरा,

    हम दोनों है पृथ्वी की,"नूतनता"और"उर्वरा”- BEJOD

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  12. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल सोमवारीय चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर भी होगी। सूचनार्थ

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  13. हम दोनों है पृथ्वी की,"नूतनता"और"उर्वरा”
    bahut sundar sandesh

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  14. हम दोनों है पृथ्वी की,"नूतनता"और"उर्वरा”
    bahut sundar sandesh

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  15. badhai dheerendr ji rachna achhi lagi mere Naye post pr amantran sweekaren.

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  16. मर्म स्पर्शीय ... और सच एमिन ये चित्र लाजवाब लगाया है आपने ... रचना के साथ भाव अनुसार ...

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  17. अच्छी कविता,
    सच में समाज मे दोनों के साथ इंसाफ नहीं हो रहा..

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  18. सुन्दर भाव, बढ़िया कविता आदरनीय धीरेन्द्र भाई जी...
    सादर बधाई....

    मेरी क्रिसमस.

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  19. सुन्दर रचना, बेहतरीन संदेश

    धन्यवाद ।

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  20. 13 दिसंबर की अन्ना-भक्ति कविता पर भी आपने आमंत्रित किया और मेरे टिप्पणी को डिलीट भी कर दिया। आज फिर मेरे ब्लाग पर आपने इस कविता हेतु आमंत्रित किया है -यह कविता तो ठीक भावों की है परंतु 35 वर्षों की राजनीति के बाद भी आप अन्ना भक्ति मे तल्लीन हैं यह बेहद ताज्जुब की बात है। अन्ना और उसकी टीम शोषको एवं भ्रष्टाचारियों की ढाल है। राष्ट्रध्वज का अपमान करने वाली अन्ना टीम के विरुद्ध कारवाई की पहल कीजिये।

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  21. आपके पोस्ट पर आना सार्थक हुआ । बहुत ही अच्छी प्रस्तुति । मेर नए पोस्ट "उपेंद्र नाथ अश्क" पर आपकी सादर उपस्थिति प्रार्थनीय है । धन्यवाद ।

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  22. वाह ! बहुत खूसूरत रचना ।
    और सार्थक सन्देश ।

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  23. sahi hai....aaj ped kaato..kal khaane ko tarasnaa...
    aaj ladkii ko maaro kal bahuon ko tarasna

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  24. हम दोनों है पृथ्वी की,"नूतनता"और"उर्वरा”
    ..वाह!

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  25. कल 27/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  26. बहुत सुंदर संदेश देती कविता...

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  27. निशब्द किया आप की रचना ने,क्या कहा जाये तारीफ में समझ नहीं आता....बहुत बढिया....बहुत उम्दा लिखा आप ने...

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  28. बहुत ही भावमय करते शब्‍दों का संगम ..आभार इस बेहतरीन अभिव्‍यक्ति के‍ लिए ।

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  29. झकझोर दिया है आपकी पोस्ट ने|जाने कब समझ आएगा कि,नूतनता और उर्वरता ही एकमात्र जीवन के आधार हें |बधाई आपको |

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  30. सुन्दर रचना, सुन्दर चित्र, सार्थक सन्देश!

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  31. बेटी की समानता पेड़ से . बहुत खूब. वास्तव में बेटियों की स्थिति इस भोगवादी युग में दयनीय होती जा रही है. विशेषतः नगरों व महानगरों में. गाँव में अभी भी बेटियों के प्रति सम्मान है. इज्ज़त है. ....... इस सुन्दर पोस्ट के लिए आभार !

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  32. बहुत ही सुंदर समानता, वाह !!!! मुझे लगता है कि रचना को और आगे बढ़ाया जा सकता है, क्या खयाल है ?

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  33. बढ़िया प्रस्तुति | अरुण कुमार निगम जी सहमत हूँ | इस रचना को थोड़ा और विस्तार दें |

    टिप्स हिंदी में

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  34. अच्छी प्रस्तुति है आपकी.
    पेड़ और बेटी का साम्य,क्या बात है.

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  35. जनता सबक सिखायेगी...बहुत अच्छी लगी

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  36. प्रभावी ढंग से कही गई सत्य हकीकत!

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  37. निशब्द कर दिया आपकी इस कविता ने ....कितनी सरलता से आज की दो विकट समस्या को सरल शब्दों में समझा दिया ...आभार

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  38. वाह..
    बहुत बढ़िया तुलनात्मक भावुक अभिव्यक्ति.

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  39. सार्थक सन्देश देती सुंदर रचना..

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  40. बहुत अच्छी कविता और अद्भुत चित्र. बहुत खूब धीरेंद्र जी.

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  41. आदरणीय धीरेन्द्र जी ,बहुत -2 आभारी हैं मेरे ब्लॉग पर आने का ,वस्तुपरक टिपण्णी करने का ,वैसे एक अदना सा कवि जैसा व्यक्तित्व, कोशिश करता हूँ अभिव्यक्तियों को शब्द / स्वर देने का ....... शुक्रिया जी /
    very possessive and meaningful,
    poem thanks again.

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  42. सामयिक, सार्थक प्रस्तुति.

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  43. रस्तुति अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । नव वर्ष -2012 के लिए हार्दिक शुभकामनाएं । धन्यवाद ।

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  44. आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को नये साल की ढेर सारी शुभकामनायें !
    चित्र बहुत सुन्दर लगा! उम्दा रचना!

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,