गुरुवार, 20 मार्च 2014

प्यार में दर्द है.


प्यार में दर्द है,
 
प्यार में दर्द है ,दर्द से प्यार है,न कहीं जीत है न कहीं हार है 

 
 वो सनम  जब यहाँ  बेवफा हो गया 
 टुकड़े-टुकड़े जिगर के मेरे कर गया,
 हँस  के मैंने  उसे बस  यही था कहा 
   तू  मेरा  प्यार  है, वो  तेरा  प्यार है ! 

 
प्यार में दर्द है ,दर्द से प्यार है,न कहीं जीत है न कहीं हार है!

 
 सबके लब तर यहाँ जाम खाली नही
 नजरें साकी की मुझपे इनायत नहीं,

फांसले  जब  बढे  मैंने  इतना  कहा
  क्या  यही जीत  है क्या यही हार है !

 
प्यार में दर्द है ,दर्द से प्यार है,न कहीं जीत है न कहीं हार है!

 
प्यार  को रूप  रंगत से मतलब नही
 प्यार को सोने चाँदी की दरकत नही,
 उनके  सौदाईपन  पे  किसी  ने कहा 

     इस्क की जीत  है, हुश्न की  हार  है !   
 
प्यार में दर्द है ,दर्द से प्यार है,न कहीं जीत है न कहीं हार है!

 
 प्यार के नाम पर,तुम ये क्या कर गये 
  नाम  लेके   वफा  का  जफा  कर  गये, 
 उनके  दिल से मेरे दिल ने इतना कहा 
  न  तेरी   जीत   है , न   मेरी   हार  है ! 

 
प्यार में दर्द है ,दर्द से प्यार है,न कहीं जीत है न कहीं हार है!


 dheerendra singh bhadauriya

34 टिप्‍पणियां:

  1. प्यार में दर्द है ,दर्द से प्यार है,न कहीं जीत है न कहीं हार है! बहुत सुन्दर !

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  2. प्यार की अजब दास्तां है, जानता ही नहीं है कि वह दुखी है या खुश।

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शुक्रवार (21-03-2014) को "उपवन लगे रिझाने" (चर्चा मंच-1558) में "अद्यतन लिंक" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. मेरी रचना को चर्चामंच में स्थान देने के लिए आभार ! शास्त्री जी ...

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  4. प्यार में दर्द है , पर यह दर्द भी न जाने क्यों सगा सा लगता है,
    बढ़िया रचना !

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  5. उनके दिल से मेरे दिल ने इतना कहा
    न तेरी जीत है , न मेरी हार है !

    ................. बहुत ही सुंदर भावभरी रचना !!!

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  6. सुंदर शब्द व सुंदर भाव ....!!

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  7. प्यार में दर्द है पर मीठा सा...बहुत सुन्दर रचना...

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  8. पीड़ा में भी कहीं सुख है तो 'प्यार' प्रदत्त पीड़ा में ही है.

    भावुक हृदय की कराह सुन रहा हूँ आपकी ग़ज़ल में .

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  9. कुछ दर्द दुखते हैं मगर अपने लगते हैं अलग होते भी बहुत दर्द देते हैं
    ...बहुत सुन्दर रचना.

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  10. बहुत सुंदर भाव और सुंदर रचना ....

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  11. सबके लब तर यहाँ जाम खाली नही
    नजरें साकी की मुझपे इनायत नहीं,
    फांसले जब बढे मैंने इतना कहा
    क्या यही जीत है क्या यही हार है !

    बेहतरीन भावों कि लड़ियाँ लाज़वाब

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  12. दिल को छूते शब्द
    तो
    आँख नम करती रचना
    सादर

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  13. सच है कि प्रेम में कोई जीत हार नहीं होती ...

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  14. वाह ! बहुत खूब सुंदर रचना ...!

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  15. उनके दिल से मेरे दिल ने इतना कहा
    न तेरी जीत है , न मेरी हार है ! .... वाह सर, क्या बात कही है , बहुत खूब!

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