शनिवार, 29 मार्च 2014

माँ, ( 200 वीं पोस्ट, )

  स्व. पं ओम व्यास 'ओम' जी की एक सुन्दर रचना.
माँ 
माँ,माँ-माँ संवेदना है,भावना है अहसास है 
    माँ,माँ जीवन के फूलों में खुशबू का वास है, 
 


माँ, माँ रोते हुए बच्चे का  खुशनुमा पलना है,
माँ, माँ मरूथल में नदी या मीठा सा झरना है,

माँ, माँ लोरी है, गीत है, प्यारी सी थाप है,
माँ, माँ पूजा की थाली है, मंत्रों का जाप है,

माँ, माँ आँखों का सिसकता हुआ किनारा है,
माँ,माँ गालों पर पप्पी है,ममता की धारा है,

माँ, माँ झुलसते दिलों में कोयल की बोली है,
माँ,माँ मेहँदी है,कुमकुम है, सिंदूर है,रोली है,

माँ,  माँ  कलम  है , दवात  है, स्याही  है,
माँ,माँ परमात्मा की स्वयं एक गवाही है,

माँ,  माँ  त्याग  है , तपस्या  है , सेवा  है,
माँ, माँ फूँक से ठँडा किया हुआ कलेवा है,

माँ,माँ अनुष्ठान है,साधना है ,जीवन का हवन है,
माँ, माँ जिंदगी के मोहल्ले में आत्मा का भवन है,

माँ, माँ चूडी वाले हाथों के मजबूत कंधों का नाम है,
 माँ,  माँ  काशी   है, काबा  है   और  चारों  धाम  है, 

माँ, माँ  चिंता  है, याद है, हिचकी है,
माँ, माँ बच्चे की चोट पर सिसकी है,

माँ, माँ  चुल्हा-धुँआ-रोटी  और हाथों  का छाला  है,
माँ,माँ ज़िंदगी की कड़वाहट में अमृत का प्याला है,

माँ,  माँ   पृथ्वी  है,  जगत   है,  धूरी   है,
माँ बिना इस सृष्टि की कल्पना अधूरी है,

तो माँ की ये कथा अनादि है,ये अध्याय नही है
 ....…और माँ का जीवन में कोई पर्याय नहीं है,

तो माँ का महत्व दुनिया में कम हो नहीं सकता,
और  माँ जैसा  दुनिया  में कुछ  हो नहीं  सकता,

 और  माँ  जैसा  दुनिया  में  कुछ  हो  नहीं  सकता,
 तो मैं  कला की ये पंक्तियाँ माँ  के नाम  करता हूँ,
 और दुनिया की सभी माताओं को प्रणाम करता हूँ,

 
एक उत्कृष्ट रचना पढ़वाने के लिए आभार...



40 टिप्‍पणियां:

  1. एक उत्कृष्ट रचना पढ़वाने के लिए आभार...

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    1. 10000,वाँ कमेंट्स देने के लिए आभार कैलाश जी...

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  2. और माँ जैसा दुनिया में कुछ हो नहीं सकता,
    तो मैं कला की ये पंक्तियाँ माँ के नाम करता हूँ,
    और दुनिया की सभी माताओं को प्रणाम करता हूँ,
    bahut sundar bhavnatmak abhivaykti .

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  3. ... एक अच्छी प्रस्तुति ....सुन्दर रचना ../माँ पर कुछ भी लिखो कम ही लगता है ..फिर भी आपने बहुत सुन्दर लिखा है ...बस इसे पढ़ कर इतना ही कहूँगा की दुनिया की हर माँ को शत-शत नमन ....'माँ ' शब्द अपने आप में महान है

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  4. बहुत अच्छी प्रस्तुति ...२००वी पोस्ट के लिए बधाई.

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  5. सुन्दर रचना पढ़वाने के लिए आभार.......२००वी पोस्ट के लिए बधाई

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  6. 200 वीं पोस्ट के लिए ये सार्थक रचना
    बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनायें
    सादर

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  7. माँ, माँ कलम है , दवात है, स्याही है,
    माँ,माँ परमात्मा की स्वयं एक गवाही है,

    सशक्त शब्द चित्र भावगंगा माँ,माँ। …

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  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (30-03-2014) को "कितने एहसास, कितने ख़याल": चर्चा मंच: चर्चा अंक 1567 पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. चर्चामंच में मेरी पोस्ट शामिल करने के लिए आभार शास्त्री जी...

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  9. माँ को समर्पित 200 वीं पोस्ट ..ऑंखें नम कर गयी ..
    यूँ ही आपका ब्लॉग सफ़र अनवरत चलता रहे ...
    बहुत बधाई ..
    सादर

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  10. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, २०० वीं पोस्ट के लिए हार्दिक मंगलकामनाये।

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  11. माँ के लिए जो भी कहेंगे वो कम होगी क्योंकि मैं भी माँ हूँ .

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  12. बहुत बधाई, सुंदर रचना !

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  13. सुन्दर प्रस्तुति, २०० वीं पोस्ट के लिए हार्दिक मंगलकामनाये।

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  14. सुन्दर प्रस्तुति ..बहुत बधाई

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  15. ऐसे सुखद अहसास आज के युग में कम ही देखने को मिलते हैं ...
    बहुत सुन्दर

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  16. आपकी इस प्रस्तुति को ब्लॉग बुलेटिन की आज कि बुलेटिन पोलियो मुक्त भारत, नवसंवत्सर, चैत्र नवरात्र - ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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    1. सुंदर सूत्र ....
      मेरे पोस्ट को ब्लॉग बुलेटिन में शामिल करने के लिए आभार...हर्ष वर्धन जी...

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  17. यह प्रभावशाली कविता टीवी पर सुनी थी एक बार...आभार इसे पढ़वाने के लिए..

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  18. अनन्त विस्तार लिये माँ का वैसा ही विस्तार समेटे हुए सुन्दर कविता । 200 वीं पोस्ट के लिये बहुत बहुत बधाई । नवसंवत्सर का सादर अभिनन्दन ।

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  19. बहुत ही सुन्दर रचना...
    २०० वी पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई...
    :-)

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  20. बहुत सार्थक .. २०० पोस्ट कि बधाई ...
    माँ हर कहीं ही ... हर किसी में है ... और माँ सा कोई भी नहीं है ...

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  21. तस्सवुरात को एक दम से नए पैरहन में प्रस्तुत किया है शब्द चातुरी एवं चयन लाज़वाब।

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  22. माँ ... अपने आप में सम्पूर्ण रचना है

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  23. आपको ये बताते हुए हार्दिक प्रसन्नता हो रही है कि आपका ब्लॉग ब्लॉग - चिठ्ठा - "सर्वश्रेष्ठ हिन्दी ब्लॉग्स और चिट्ठे" ( एलेक्सा रैंक के अनुसार / 31 मार्च, 2014 तक ) में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएँ,,, सादर .... आभार।।

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  24. 200 वीं पोस्ट के लिए
    बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनायें

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  25. बहुत ही सुन्दर और सार्थक रचना ॐ ji और आप को बधाई सच में माँ से बढ़ प्यारा कोई रिश्ता नहीं ...
    भ्रमर 5

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  26. 200वीं पोस्ट और माँ को समर्पित!! सिर झुकाने से बेहतर कोई कमेण्ट नहीं हो सकता!!

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  27. बहुत सुन्दर प्रस्तुति ...माँ को नमन...२०० वीं पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई...

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  28. वाह....बेहद अच्छी और शानदार प्रस्तुति...
    नयी पोस्ट@भजन-जय जय जय हे दुर्गे देवी

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  29. माँ पर लिखी अत्यंत सुन्दर रचना | २०० पोस्ट की बधाई

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  30. माँ, माँ चुल्हा-धुँआ-रोटी और हाथों का छाला है,
    माँ,माँ ज़िंदगी की कड़वाहट में अमृत का प्याला है,

    wah bahut sundar aur sangrhneey rachana .....badhai sir

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  31. बहुत ही सुन्दर और सार्थक रचना ...!

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  32. माँ, माँ चुल्हा-धुँआ-रोटी और हाथों का छाला है,
    माँ,माँ ज़िंदगी की कड़वाहट में अमृत का प्याला है, ... बहुत सुन्दर, हृदय स्पर्शी रचना !

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,