गुरुवार, 6 मार्च 2014

पुरानी होली.

 पुरानी होली

 कम  पैसा   पर  रुतवा  था 
 कम ज्यादा कुछ रकबा था 

मेहनत  की  हम  खाते  थे
इज्जत   से   सो   जाते  थे
 
पूनम    की   वो   रातें   थी
सच्ची  झूंठी  कुछ बातें थी
 
जब होली की रुत आती थी
तब भंग  पिलाई  जाती थी
 
हम  रंग   खेलने   जाते  थे
रंग  में   लथपथ   आते  थे

होरियारो  की  टोली  आती
   भगदड़  सी तब मच  जाती   
     
होली  में  फागें  जमती  थी
होंठों पर  चिलमें रमती थी
 
नुक्कड़  और  चौपालों  पर
कक्का  जी   के  गालों  पर
 
कैसा मंजर  वो  लगता था
रंग   बराबर    जमता   था
 
अब  सब  कुछ  बीराना  है
होली अब बस अफ़साना है

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया

43 टिप्‍पणियां:

  1. होली अब बस अफ़साना है....................true

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  2. सच...अब पहले से रंग कहाँ..
    सटीक अभिव्यक्ति.
    सादर..
    अनु

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  3. सच कहा अब तो सब कुछ वीराना ही है

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  4. हम रंग खेलने जाते थे.अब घर से नहीं निकलते हैं.सच कहा आपने अब होली तो हो ली ,वाकई अफसाना रह गयी है होली

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  5. हम रंग खेलने जाते थे.अब घर से नहीं निकलते हैं.सच कहा आपने अब होली तो हो ली ,वाकई अफसाना रह गयी है होली

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  6. आपकी लिखी रचना शनिवार 08 मार्च 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  7. वाकई खूबसूरत होली होती थी वो !!!

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  8. वर्तमान युग में तो सभी त्योहारों के रंग फीके पद गए हैं |आए दिन बीता कल ही नजर आता है |
    सत्य बयां करती रचना |
    आशा

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  9. होली तो होली है..अब या तब नहीं शाश्वत है इसकी मस्ती..

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  10. अब सब कुछ बीराना है
    होली अब बस अफ़साना है

    सटीक - प्रशंसनीय

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  11. खूबसूरत रंगों की बहार होती थी होली ....सच अब वो रंग कहाँ ...

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  12. बहुत सुंदर
    सटीक अभिव्यक्ति.
    सादर..

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  13. बहुत सुंदर और सटीक रचना ......समय के साथ सब कुछ बदलने लगता है.......

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  14. होली का आनन्द अद्भुत था तब, अब सच में वीराना है।

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  15. समय के साथ सब कुछ बदलने लगता है...अब वो रंग कहाँ

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  16. अब सब कुछ बीराना है
    होली अब बस अफ़साना है....सच में !

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  17. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। । होली की हार्दिक बधाई।

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  18. उफ्फ! क्या क्या याद दिला दिया!! जाने कहाँ गये वो दिन!!

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  19. व्यतीत को समेटती सुन्दर पोस्ट

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  20. अब सब कुछ बीराना है
    होली अब बस अफ़साना है
    सही कहा है अब सब कुछ पहले जैसा कहाँ ?
    सुन्दर रचना !

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  21. बहुत ही सुन्दर और सटीक रचना की प्रस्तुति, धन्यबाद।

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  22. सचमुच न अब वो पहले से रंग रहे न उमंग .... सटीक अभिव्यक्ति

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  23. सच कहते हैं होली एक अफसाना ही बन कर रह गयी है !
    अच्छी कविता लिखी है.

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  24. बहुत खूब .. इस अफ़साने को दोहराना होगा .. होली को मनाना होगा ...

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  25. सच कहा है...वह होली तो अब बस यादों में बची है...बहुत सुन्दर रचना....

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  26. वो भी क्या मस्ती भरे दिन थे
    सुंदर रचना
    सादर होली की अग्रिम बधाई

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  27. अब सब कुछ बीराना है
    होली अब बस अफ़साना है...................बहुत खूब .

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  28. kaafi dino baad ek sunder rachana holi par padhane ko mili

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  29. अब सब कुछ बीराना है
    होली अब बस अफ़साना है...................बहुत खूब .

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,