शुक्रवार, 20 दिसंबर 2013

हम पंछी थे एक डाल के.

हम पंछी थे एक डाल के.
हवा चली और छूट गए 

मेरे सपने टूट गए ........

अपना मुझे बताने वाले ,
हँस-हंसकर अपनाने वाले !
यादों की खुशबू-सा बनकर,
प्राणों में बस जाने वाले !
जीवन के किस पथ पर जाने-
मुझसे,मुझको लूट गए  ! 

मेरे सपने टूट गए .....

रोज समय की सही समीक्षा ,
मगर प्राण में पली प्रतीक्षा !
संघर्षों  के सूल संजोये ,
बार - बार दी अग्नि परिक्षा !
हारा सच्चा प्यार हमारा ,
जीत हजारों झूंट गए !

मेरे सपने टूट गए .....

आज अकेलापन खलता है ,
पल-पल मन-आँगन जलता है !
आशाओं का सूरज उगता ,
उगता नही ,सिर्फ ढलता है !
शेष रह गये  गीत अभागे ,
जो अधरों से फूट गए !

मेरे सपने टूट गए .....

45 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. bahut bahut badhai dherendra ji bhavpurn sunndra rachna waah

      अपना मुझे बताने वाले ,
      हँस-हंसकर अपनाने वाले !
      यादों की खुशबू-सा बनकर,
      प्राणों में बस जाने वाले !
      जीवन के किस पथ पर जाने-
      मुझसे,मुझको लूट गए !
      मेरे सपने टूट गए ..... badhai

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  2. अपना मुझे बताने वाले ,
    हँस-हंसकर अपनाने वाले !
    यादों की खुशबू-सा बनकर,
    प्राणों में बस जाने वाले !
    जीवन के किस पथ पर जाने-
    मुझसे,मुझको लूट गए !
    मेरे सपने टूट गए .....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज शनिवार (21-12-13) को "हर टुकड़े में चांद" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1468 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. हम पंछी थे एक डाल के.
    हवा चली और छूट गए
    मेरे सपने टूट गए ...

    बेहतरीन सच और अनुभूति आनंद से भरी

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  5. सपने होते ही हैं टूटने के लिए..सुंदर कविता !

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  6. प्राणों में बस जाने वाले !
    जीवन के किस पथ पर जाने-
    मुझसे,मुझको लूट गए !
    मेरे सपने टूट गए .....बहुत सुन्दर

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  7. कोमल,भावपूर्ण........बहुत सुन्दर रचना .......

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  8. टूटे भाव भी आहलादित कर गए।

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  9. अद्भुत शब्दाभिव्यक्ति, भाव के अन्दर तक।

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  10. आपकी इस प्रस्तुति को आज की बुलेटिन भारत का सबसे गरीब मुख्यमंत्री और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  11. दिल को छूते हुए शब्द .. भावपूर्ण ...

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  12. व्यथित ह्रदय से निकली करुण पुकार ... मर्म स्पर्शी!

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  13. जीवन के किस पथ पर जाने-
    मुझसे,मुझको लूट गए !
    मेरे सपने टूट गए ....वाह! बहुत खूबसूरत

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  14. आज अकेलापन खलता है ,
    पल-पल मन-आँगन जलता है !
    आशाओं का सूरज उगता ,
    उगता नही ,सिर्फ ढलता है !
    शेष रह गये गीत अभागे ,
    जो अधरों से फूट गए !
    मेरे सपने टूट गए .....
    भावपूर्ण.....


    उत्तर देंहटाएं
  15. वाह्ह्ह बहुत भावपूर्ण दिल को छू लेने वाली प्रस्तुति ,बहुत बहुत बधाई आपको

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  16. aapka zawaab nahi bhai ... whatever you write. you write the feeling of heart

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  17. भावप्रबल ...हृदयस्पर्शी बहुत सुंदर रचना ....उत्कृष्ट !!

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  18. मगर प्राण में पली प्रतीक्षा !
    संघर्षों के सूल संजोये ,
    बार - बार दी अग्नि परिक्षा !
    हारा सच्चा प्यार हमारा ,
    जीत हजारों झूंट गए !
    मेरे सपने टूट गए .....antarman ko chhuti rachna

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  19. अकेलेपन और सपने टूटने का का दर्द लिए भावपूर्ण कविता.

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  20. मन की टीस को उकेरा है आपने .....
    शुभकामनायें!

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  21. दर्द को बयां करना बहुत मुश्किल होता है
    लेकिन आप खूबसूरत अभिव्यक्ति करते है
    सादर

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  22. रोज समय की सही समीक्षा ,
    मगर प्राण में पली प्रतीक्षा !---------
    waah bahut khub

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  23. जीवन के किस पथ पर जाने-
    मुझसे,मुझको लूट गए !
    मेरे सपने टूट गए
    ..... सपने टूटने का का दर्द लिए भावपूर्ण कविता....बहुत सुन्दर

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  24. बहुत सुन्दर रचना .. बहत खूब ..

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  25. अपना मुझे बताने वाले ,
    हँस-हंसकर अपनाने वाले !
    यादों की खुशबू-सा बनकर,
    प्राणों में बस जाने वाले !
    जीवन के किस पथ पर जाने-
    मुझसे,मुझको लूट गए !
    मेरे सपने टूट गए .....

    बहुत सुन्दर रचना .. बहत खूब .....

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,