बुधवार, 4 दिसंबर 2013

वोट से पहले .

वोट से पहले 

न  हिन्दू  थे  न  मुस्लिम 
थे, विस्फोट  से पहले!
 क्यूँ  हमने  बेच दी 
इंसानियत, थी वोट से पहले!!

हमारे  मुन्ने  ने  जो  'ब'  से  पढ़, बारूद  बताया!
मै गोया हो गया जख्मी, किसी भी चोट से पहले!!

 हमारे  देश  में  जीवन , धरम  से  साँस  लेता  है! 
मगर हो जाता है जख्मी,धरम की ओट से पहले!!

बहुत  नाराज है होता,ये दिल तो अब दिमागों से!
दिमागी गोट चल जाती ,दिलों की गोट से पहले!!

 कहर  है  इस   कदर , संवेदना   के  शब्द  है गूगें!  
वयां  कर देती है  आँखे, सभी कुछ होठ से  पहले!!
 
रचना कार - श्री तनु थदानी जी,

32 टिप्‍पणियां:

  1. सच बात। सुन्‍दर उद्गार।

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  2. कहर है इस कदर , संवेदना के शब्द है गूगें!
    वयां कर देती है आँखे, सभी कुछ होठ से पहले!!

    .................सुन्दर सन्देश देती रचना ..सार्थक पोस्ट

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  3. आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया. व्यस्तता अभी बनी हुई है लेकिन मात्रा कम हो गयी है...:-)

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  4. हमारे देश में जीवन , धरम से साँस लेता है!
    मगर हो जाता है जख्मी,धरम की ओट से पहले!!
    बहुत सुंदर.

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  5. बहुत उत्तम ... सभी शेर अपनी बात प्रखरता से रख रहे हैं ... लाजवाब ...

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  6. हमारे मुन्ने ने जो 'ब' से पढ़, बारूद बताया!
    मै गोया हो गया जख्मी, किसी भी चोट से पहले!!
    सटीक पंक्तियाँ, सुन्दर रचना साझा करने का आभार !

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  7. गहरी सम्वेदनायें वर्त्तमान हालात पर.. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति!!

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  8. बहुत ख़ूबसूरत प्रस्तुति....

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  9. election....in india is full with ... war..n conspiracy ....
    a good composition

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  10. धीरेन्द्र भाई खूबसूरत और आँखें खोल देने वाले भाव युक्त
    भ्रमर ५

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  11. बहुत ख़ूबसूरत और सटीक प्रस्तुति.

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  12. बढ़िया रचना पढ़वाने के लिए आभार आपका !

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  13. हमारे मुन्ने ने जो 'ब' से पढ़, बारूद बताया!
    मै गोया हो गया जख्मी, किसी भी चोट से पहले!! yahi panktiyan kafi hai hamari vartman baroodi sanskriti ke dushparinam batane ke liye

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  14. वाह... उम्दा भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@ग़ज़ल-जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

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  15. बहुत ही गहरी बात और बहुत सुंदर प्रस्तुति .....!!

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  16. आप सभी का दिल से आभारी हूं............

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