शनिवार, 9 नवंबर 2013

कामयाबी.


कामयाबी...

रोने     से     तकदीर     बदलती      नही
वक्त     से     पहले   रात   ढलती    नही
दूसरों की कामयाबी लगती आसान मगर
कामयाबी   रास्ते  में   पडी  मिलती  नही

मिल  जाए  कामयाबी अगर इत्तेफाक से
यह   भी  सच   है  कि   वह   पचती  नही
कामयाबी  पाना है,पानी में  आग लगाना
पानी  में  आग ,आसानी  से  लगती  नहीं


ऐसा   भी   लगता   है  जिंदगी  में  अक्सर
 दुनिया   अपने   जज्बात  समझती नही है 
हर शिकस्त के बाद जो टूटकर संभल गया
फिर   कौन  सी   बिगड़ी  बात   बनती नही

हाथ  बाँधकर  बैठने  से पहले सोच धीरेन्द्र
 अपने  आप   कोई  जिन्दगी  संवरती  नही,

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45 टिप्‍पणियां:

  1. रोने से तकदीर बदलती नही
    वक्त से पहले रात ढलती नही
    दूसरों की कामयाबी लगती आसान मगर
    कामयाबी रास्ते में पडी मिलती नही
    lajavab sunder bhav ekdam theek kaha hai aapne
    badhai
    rachana

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  2. खूबसूरत सीख देने में कामयाब रचना
    सादर

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (10-11-2013) को सत्यमेव जयते’" (चर्चामंच : चर्चा अंक : 1425) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. ’हाथ बांध----जिंदगी संवरती नहीं’
      ’कर्मयोगी’होना ही पूर्ण मानव की पहचान है.
      प्रेरक रचना.

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  4. बहुत ही बेहतरीन रचना...
    सुन्दर प्रस्तुति...
    :-)

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  5. सुन्दर प्रस्तुति--
    आभार आदरणीय-

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  6. बहुत सुन्दर सन्देश देती रचना !
    नई पोस्ट काम अधुरा है

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  7. सन्देश देती सुन्दर रचना बहुत अच्छी लगी हार्दिक बधाई

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  8. बहुत खूबसूरत रचना , आ0 धीरेंद्र सिंह जी बधाई आपको ।

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  9. बहुत सुंदर और प्रेरक कविता।

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  10. इतना सुंदर नीला गुलाब, क्या सच्ची का है या फोटोशॉप का कमाल ?

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  11. सार्थक सन्देश देती रचना।

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  12. ये तो सही बात है बिलकुल। छन्‍दबद्ध कविता में ढालना ऐसी बातों को शायद इन पर चलने को ज्‍यादा प्रोत्‍साहित करेगा किसी को भी।

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  13. ऐसा भी लगता है जिंदगी में अक्सर
    दुनिया अपने जज्बात समझती नही है


    वाह बहुत खूब ..और सटीक भी

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  14. भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने.....

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  15. ऐसा भी लगता है जिंदगी में अक्सर
    दुनिया अपने जज्बात समझती नही है
    हर शिकस्त के बाद जो टूटकर संभल गया
    फिर कौन सी बिगड़ी बात बनती नही
    बहुत सुन्दर .
    नई पोस्ट : फिर वो दिन

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  16. बहुत सुंदर सटीक रचना ..

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  17. बहुत खुबसूरत सन्देश देते आपके भाव ...
    मुबारक हो !

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  18. दुनिया समझे न समझे जज्बात ... पर हार के बाद उठना जरूरी है ...
    भावमय रचना ...

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  19. दूसरों की कामयाबी लगती आसान मगर
    कामयाबी रास्ते में पडी मिलती नही

    वाह ! बेहतरीन लफ्ज़ |

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  20. बेहद प्रेरक पंक्तिया..... बहुत खूबसूरत !!

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  21. हर शिकस्त के बाद जो टूटकर संभल गया
    फिर कौन सी बिगड़ी बात बनती नही
    बहुत सुन्दर
    खूबसूरत रचना धीरेंद्र जी !!!!

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  22. एक कविता में कितने सारे संदेश। बिना मेहनत कुछ भी हासिल नहीं होता।

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  23. हाथ बाँधकर बैठने से पहले सोच धीरेन्द्र
    अपने आप कोई जिन्दगी संवरती नही...

    लाजवाब !

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  24. कामयाबी पाना है,पानी में आग लगाना
    पानी में आग ,आसानी से लगती नहीं
    ...नये अंदाज में कहा आपने। बहुत खूब...

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,