मंगलवार, 8 अक्तूबर 2013

अपनी राम कहानी में.



अपनी  राम  कहानी  में 

  टूटे  फूटे  कुछ  अक्षर  है, अपनी  राम  कहानी  में,
   जलते  प्रश्नों के  उत्तर  है, अपनी राम  कहानी में i


  प्यासे पनघट,तृप्त मरुस्थल, हँसते घावों  के मेले,
   ऐसे ही  कुछ  हस्ताक्षर  है, अपनी राम  कहानी में i

   आँसू की  भी एक  अलग,अपनी  परिभाषा होती है,
   पीड़ाओं  के गूँगे  स्वर  है, अपनी  राम  कहानी  में i

   साँझ ढले धीर को अक्सर,आकर घेर  लिया करते, 
   ये जो  यादों के  लश्कर है, अपनी राम  कहानी में i
 

55 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. रतन सिंह जी , आपका ब्लॉग ज्ञान दर्पण कई दिन से खुल नहीं रहा है !

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  2. सादर प्रणाम |
    बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति |
    बहुत खूब |
    ....... प्यासे पनघट,तृप्त मरुस्थल, हँसते घावों के मेले,
    ऐसे ही कुछ हस्ताक्षर है, सबकी राम कहानी में i

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - बुधवार - 09/10/2013 को कहानी: माँ की शक्ति - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः32 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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    1. हिंदी ब्लॉग समूह में मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार...! दर्शन जी ...

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  4. अपनी राम कहानी एक जैसी ही है
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें

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  5. वाह वाह - गागर में सागर - लाजवाब

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  6. बहुत सुंदर.....
    नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें....

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  7. बेहतरीन अभिव्यक्ति। लाजवाब।

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  8. बहुत बढ़िया ग़ज़ल | नवरात्रि की शुभकामनाएं |
    latest post: कुछ एह्सासें !

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  9. गज़ब की राम कहाँई, सुंदर गज़ल के लिए बधाई.......

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  10. साँझ ढले धीर को अक्सर,आकर घेर लिया करते,
    ये जो यादों के लश्कर है, अपनी राम कहानी में i
    ,...बहुत सुन्दर प्रस्तुति ..
    नवरात्रि की शुभकामनाएं ...

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  11. अति सुन्दर-
    नवरात्रि की शुभकामनायें-

    दिल के दौर तीन पड़े पर, गति समुचित है नाड़ी की |
    लश्कर बिन हथियार दिखे अब, धार तेज पर वाणी की |
    शब्दों के व्यवहार बदलते, जब से जग में देखा है-
    रविकर पर विश्वास करें नहिं-बातें समझ अनाड़ी की |

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  12. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल गुरुवार (10-10-2013) को "ब्लॉग प्रसारण : अंक 142"शक्ति हो तुम
    पर लिंक की गयी है,कृपया पधारे.वहाँ आपका स्वागत है.

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  13. आँसू की भी एक अलग,अपनी परिभाषा होती है,
    पीड़ाओं के गूँगे स्वर है, अपनी राम कहानी में i

    गीत की गुनगुनाहट ,गजल की सुगबुगाहट दोनों एक साथ लिए है यह सांगीतिक रचना अर्थ गर्भित। स्वर सुरभित।

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  14. आँसू की भी एक अलग,अपनी परिभाषा होती है,
    पीड़ाओं के गूँगे स्वर है, अपनी राम कहानी में i ..

    वाह ... बहुत ही लच्छेदार ... गुनगुनाने वाली लाजवाब गज़ल है ... मज़ा आ गया ...

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  15. राम कहानी तो बहुत ही शानदार बन पड़ी है :-)

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  16. बहुत सुंदर भाव .....सुंदर रचना ....!!
    सुरेश राय
    कभी यहाँ भी पधारें और टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें
    http://mankamirror.blogspot.in

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  17. इस पोस्ट की चर्चा, बृहस्पतिवार, दिनांक :-10/10/2013 को "हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल {चर्चामंच}" चर्चा अंक -21 पर.
    आप भी पधारें, सादर ....
    नवरात्रि की शुभकामनाएँ.

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  18. बहुत सुन्दर भाव लिए रचना |
    आशा

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  19. विवशता को सुन्‍दर अनुभूतियों से बांधा है।

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  20. आँसू की भी एक अलग,अपनी परिभाषा होती है,
    पीड़ाओं के गूँगे स्वर है, अपनी राम कहानी में i

    बहुत खूब..अपनी नहीं यह तो सबकी राम कहानी है...

    उत्तर देंहटाएं
  21. प्यासे पनघट,तृप्त मरुस्थल, हँसते घावों के मेले,
    ऐसे ही कुछ हस्ताक्षर है, अपनी राम कहानी में i

    बेहद सुन्दर

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  22. जिंदगी का कैनवास न जाने कितने रंगों से बना है

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  23. वाह बहुत सुंदर रही.. राम कहानी..

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  24. वाह...सुन्दर राम कहानी.....
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति.....
    सादर
    अनु

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  25. नहीं बचेगा अबके रावण दिल्ली में ,

    सच रहता है अपनी राम कहानी में।

    बढ़िया प्रस्तुति भाई साहब।

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  26. बहुत सुन्दर, आपकी राम कहानी ऐसे ही सदा गतिमान रहे।

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  27. आँसू की भी एक अलग,अपनी परिभाषा होती है,
    पीड़ाओं के गूँगे स्वर है, अपनी राम कहानी में i
    सबकी राम कहानी ऐसी ही है कुछ कम कुछ ज्यादा !

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  28. आँसू की भी एक अलग,अपनी परिभाषा होती है,
    पीड़ाओं के गूँगे स्वर है, अपनी राम कहानी में i

    धीरेन्द्र भाई बहुत सुन्दर रचना बहुत कुछ उल्टा पुल्टा जीवन में ..यादें वादे घेर तो लेंगे ही ........ आभार...

    नवरात्रि की शुभकामनाएँ ...
    भ्रमर५

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  29. आँसू की भी एक अलग,अपनी परिभाषा होती हैnice

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  30. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक आज शनिवार (12-10-2013) को "उठो नव निर्माण करो" (चर्चा मंचःअंक-1396)
    पर भी होगा!
    शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. चर्चा मंच में मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए आभार,शास्त्री जी,,,,

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  31. प्यासे पनघट,तृप्त मरुस्थल, हँसते घावों के मेले,
    ऐसे ही कुछ हस्ताक्षर है, अपनी राम कहानी में-----

    जीवन की संघर्ष यात्रा में जो सच भोगा जाता है
    वह जब मन की परतों को तोड़ता निकलता है तो
    इस तरह की मार्मिक भावुक रचना का सृजन
    होता है---

    अदभुत अभिव्यक्ति

    साधुवाद भाई जी

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  32. प्यासे पनघट,तृप्त मरुस्थल, हँसते घावों के मेले,
    ऐसे ही कुछ हस्ताक्षर है, अपनी राम कहानी में i

    बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति है सर

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  33. आँसू की भी एक अलग,अपनी परिभाषा होती है,
    पीड़ाओं के गूँगे स्वर है, अपनी राम कहानी में i
    bahut sundar bhav .....sundar rachna .

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  34. बहुत सुन्दर .बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!

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  35. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....


    इंडिया दर्पण
    की ओर से आभार।

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  36. साँझ ढले धीर को अक्सर,आकर घेर लिया करते,
    ये जो यादों के लश्कर है, अपनी राम कहानी में i
    ,...बहुत सुन्दर प्रस्तुति ..

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,