बुधवार, 12 जून 2013

जिन्दगी,

जिन्दगी,

 कब   तक  मुझे   ऐसे   सतायेगी  जिन्दगी
 और  कितना   मुझको  रुलायेगी  जिन्दगी,
 
  अपनी  यादों की तस्वीर  को  टंगा देखता हूँ 
   क्या  रोज  यही  मंजर दिखायेगी  जिन्दगी, 
 
  इन्तजार  कर  रहा  हूँ उसके  पास जाने का
   जाने कब  तलक उससे मिलायेगी जिन्दगी,
 
  खीचकर  एक  तार, साज मेरा  तोड़ दिया है
    कैसे  बिन  साज  के गीत  गायेगी जिन्दगी, 
 
   बाँहों  में अब तो  आ जा  कब से  बुला रहा हूँ
      मौत के  बाद धीर को मिल  पायेगी जिन्दगी,  

 
    dheerendra singh bhadouriya, 

41 टिप्‍पणियां:

  1. कब तक मुझे ऐसे सतायेगी जिन्दगी ...............
    सुन्दर रचना !!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बेहद उम्दा..... वाह वाह वाह

    उत्तर देंहटाएं
  3. खीचकर एक तार, साज मेरा तोड़ दिया है
    कैसे बिन साज के गीत गायेगी जिन्दगी, ..

    जिंदगी हर हाल में अपना गीत गा ही लेती है ... लाजवाब शेर है इस गज़ल का ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह, बेहतरीन गजल. शुभकामनाएं.

    रामराम.

    उत्तर देंहटाएं
  5. खीचकर एक तार, साज मेरा तोड़ दिया है
    कैसे बिन साज के गीत गायेगी जिन्दगी,

    ...वाह! बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़ल...

    उत्तर देंहटाएं
  6. खीचकर एक तार, साज मेरा तोड़ दिया है
    कैसे बिन साज के गीत गायेगी जिन्दगी ....
    दर्द मेरे दिल का लगा ....
    आह पर वाह नहीं लिख पाती
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत सुन्दर रचना... शुभकामनायें

    उत्तर देंहटाएं
  8. जिंदगी की खूबसूरत तस्वीर ...वाह बहुत खूब

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत खूब, खूबशूरत अहसाह ,बेहतरीन

    उत्तर देंहटाएं
  10. अपनी यादों की तस्वीर को टंगा देखता हूँ
    क्या रोज यही मंजर दिखायेगी जिन्दगी,

    खूबसूरत गज़ल

    उत्तर देंहटाएं
  11. ज़िन्दगी कभी वफ़ा तो कभी बेवफा का खेल खेलती ही रहती है ....बहुत खूब !
    आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत खूब ग़ज़ल ......बहुत खूबसूरत ......
    साभार......

    उत्तर देंहटाएं
  13. सुन्दर रचना और खूबसूरत भाव ।

    उत्तर देंहटाएं
  14. साथ सदा रह जाती है जिन्दगी...बहुत सुन्दर..

    उत्तर देंहटाएं
  15. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल शुक्रवार (14-06-2013) के "मौसम आयेंगें.... मौसम जायेंगें...." (चर्चा मंचःअंक-1275) पर भी होगी!
    सादर...!
    रविकर जी अभी व्यस्त हैं, इसलिए मंगलवार की चर्चा मैंने ही लगाई है।
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत सुंदर प्रस्तुति !

    उत्तर देंहटाएं
  17. जिन्दगी सुख दुःख दोनों में गीत गाती है
    बहुत ही सुन्दर गजल
    साभार !

    उत्तर देंहटाएं
  18. खीचकर एक तार, साज मेरा तोड़ दिया है
    कैसे बिन साज के गीत गायेगी जिन्दगी,
    बहुत सुन्दर गजल !
    latest post: प्रेम- पहेली
    LATEST POST जन्म ,मृत्यु और मोक्ष !

    उत्तर देंहटाएं
  19. मार्मिक है भाई ...
    मंगलकामनाएं आपको !

    उत्तर देंहटाएं
  20. अपनी यादों की तस्वीर को टंगा देखता हूँ
    क्या रोज यही मंजर दिखायेगी जिन्दगी......बहुत सुंदर

    उत्तर देंहटाएं

  21. बाँहों में अब तो आ जा कब से बुला रहा हूँ
    मौत के बाद धीर को मिल पायेगी जिन्दगी,

    बढ़िया लिखा है यहाँ क्या खोना और पाना है ,बस जीते जी मरजाना है .....ये जीवन एक फ़साना है ....

    उत्तर देंहटाएं
  22. जिंदगी के गीतों को साज मिल ही जाते हैं. सुंदर गज़ल.

    उत्तर देंहटाएं
  23. वाह बहुत सुन्दर एवं भावपूर्ण.

    उत्तर देंहटाएं
  24. गहन गंभीर अभिव्यक्ति ...

    उत्तर देंहटाएं
  25. बेहतरीन गजल !शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

    उत्तर देंहटाएं
  26. अपनी यादों की तस्वीर को टंगा देखता हूँ
    क्या रोज यही मंजर दिखायेगी जिन्दगी,-----

    waah bahut khub

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,