सोमवार, 17 जून 2013

तड़प,

तड़प

 बिखरते   ख़्वाबों   को  देखा
 सिसकते  जज्बातों को देखा
   रूठती   हुई   खुशियाँ   देखी, 

    बंद   पलकों   से , टूटते   अरमानो   को   देखा...

अपनों  का  बेगानापन देखा
परायों  का अपनापन  देखा
 रिश्तों   की   उलझने   देखी,

    रुकती  साँसों ने, जिन्दगी को  मुस्कराते  देखा...

 तड़प   को    भी    तडपते    देखा
 नफरत को प्यार में बदलते देखा
     आंसुओं      में     खुशियाँ    देखी,    

 रिश्तों  में , कितनो  को  मिलते  बिछड़ते  देखा...

 नाकामियों    का     मंजर   देखा 
डूबती उम्मीदों का समन्दर देखा
  वजूद    की    जद्दोजहद     देखी,  

जिन्दगी ने, हजारों  ख्वाहिशों को  मरते  देखा
...


53 टिप्‍पणियां:

  1. नाकामियों का मंजर देखा
    डूबती उम्मीदों का समन्दर देखा
    वजूद की जद्दोजहद देखी,

    यही तो जिंदगी है ... सब कुछ देख के ही जाना होता है इस मिट्टी से ... बहुत उम्दा ...

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    1. बेहद सुन्दर प्रस्तुति ....!
      आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (19 -06-2013) के तड़प जिंदगी की .....! चर्चा मंच अंक-1280 पर भी होगी!
      सादर...!
      शशि पुरवार

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  2. जिन्दगी ने, हजारों ख्वाहिशों को मरते देखा.

    शायद यही जिंदगी की परिभाषा है, बहुत सुंदर.

    रामराम.

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  3. प्रभावशाली अभिव्यक्ति!!

    नाकामियों का मंजर देखा
    डूबती उम्मीदों का समन्दर देखा
    वजूद की जद्दोजहद देखी,

    जिन्दगी ने, हजारों ख्वाहिशों को मरते देखा...

    लेकिन हमने……… :) :)

    कसक को तड़प में बदलते देखा,
    शीर्षक हो सार्थक बनते देखा,
    यूं ख्वाहिश को सफल होते देखा…। :)

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  4. इतना सब कुछ एक इंसान ही देख सकता है
    हिम्मत की दाद देती हूँ
    खूबसूरत प्रस्तुति

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  5. प्रभावशाली अभिव्यक्ति,आभार

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  6. ये जीवन है, इस जीवन का यही है रंग रूप ! उम्दा !

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  7. बहुत सटीक अभिव्यक्ति....

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  8. .बेहतरीन अभिव्यक्ति आभार . जनता की पहली पसंद -कौंग्रेस आप भी जानें संपत्ति का अधिकार -४.नारी ब्लोगर्स के लिए एक नयी शुरुआत आप भी जुड़ें WOMAN ABOUT MAN

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  9. नमस्कार
    आपकी यह रचना कल बुधवार (19-06-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधार कर अपनी प्रतिक्रिया अवश्य रखें |
    सादर
    सरिता भाटिया

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  10. सुन्दर रचना.....तड़प की शानदार अभिव्यक्ति

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  11. बात तो सही है एक ही ज़िन्दगी सब कुछ दिखा देती है

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  12. बेहतरीन प्रस्तुती.......जीवन के हर मोड़ की व्याख्या की है आपने ......शुभकामनायें

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  13. ख्वाहिशें तो ना खत्म होने वाला समंदर है. कुछ टूटती हैं कुछ पूरी होती हैं. जिंदगी है तो ख्वाहिशें हैं. जीवन यही है.

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  14. नाकामियों का मंजर देखा
    डूबती उम्मीदों का समन्दर देखा
    वजूद की जद्दोजहद देखी,

    जिन्दगी ने, हजारों ख्वाहिशों को मरते देखा...
    बहुत सुन्दर रचना...

    सादर
    अनु

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  15. बहुत कुछ दिखा देती है जिन्दगी ,.....कदम दर कदम .......मार्मिक .....

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  16. नाकामियों का मंजर देखा
    डूबती उम्मीदों का समन्दर देखा
    वजूद की जद्दोजहद देखी,
    सटीक अभिव्यक्ति...बहुत सुन्दर

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  17. बहुत उम्दा ....मार्मिक .....बेहतरीन प्रस्तुती.......जीवन के हर मोड़ की व्याख्या की है आपने ......शुभकामनायें

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  18. मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
    आप की ये रचना 21-06-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।


    जय हिंद जय भारत...

    कुलदीप ठाकुर...

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  19. शानदार व उम्दा प्रस्तुती

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  20. बहुत बढ़िया प्रस्तुति -
    नाकामियों का मंजर देखा
    डूबती उम्मीदों का समन्दर देखा
    वजूद की जद्दोजहद देखी,

    जिन्दगी ने, हजारों ख्वाहिशों को मरते देखा...

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  21. ख्वाहिशें.....कोई अंत नहीं,कोई सीमा नहीं..टूटना मरना स्वाभाविक

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  22. बहुत खूब देखे सब रंग जीवन के .

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  23. नाकामियों का मंजर देखा
    डूबती उम्मीदों का समन्दर देखा
    वजूद की जद्दोजहद देखी,

    KHUBSURAT ZAZABAAT

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  24. हजार ख्‍वाहि‍शें जो हो नहीं पाती है पूरी...सुंदर रचना

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  25. जब अवतारी लोग जीवन भर संघर्ष-रत रहे, तो हम लोग तो कर्मों का भोग करने ही आये हैं - जो सामने आए करिये मुकाबला !

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  26. तड़प को भी तड़पते देखा
    नफरत को प्यार में बदलते देखा
    आंसुओं में खुशियाँ देखी!
    सुन्दर अति सुन्दर, आपको बधाई !
    chitranshsoul

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  27. बेहद खूबसूरत भाव....ख्वाहिशें.....कोई अंत नहीं

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  28. "अपनों का बेगानापन देखा
    परायों का अपनापन देखा
    रिश्तों की उलझने देखी,
    रुकती साँसों ने, जिन्दगी को मुस्कराते देखा..."
    वाह...सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

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  29. बहुत खूबसूरत रचना , लाजवाब भावों का सुंदर तालमेल

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  30. सच में यह जिन्दगी क्या क्या देखती है ....
    सुन्दर

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  31. जिन्दगी ने, हजारों ख्वाहिशों को मरते देखा...
    bilkul sahi kaha hai !

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  32. जिन्दगी का बहुत सुंदर सार्थक वर्णन , आभार

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