रविवार, 2 जून 2013

ऐसी गजल गाता नही,


 ऐसी  गजल  गाता  नही

नजर के सामने अब  कोई आता  नही 
  अब   तो  ये   माहौल   भी  भाता  नही,   


जाने  वाले   की  थी  कुछ  मजबूरियाँ 
 घर  छोड़  यों   तो   कोई   जाता   नही, 


गम   को   बर्दास्त  करना  सीख   लो  
अपना   साया  भी  नजर  आता  नही, 


ये  आँसू  भी  एक  दिन  रुक  जायेगें   
मेह,  हर   बादल   कभी   लाता   नही, 


 माफ़  कर  सको  तो मुझको  कर देना  
  देवता , इंसान  कभी  बन  पाता  नही,   


  दर्द  मेरा  भी   तो  समझ  लो  दोस्तों   
  यूँ   ही  धीर  ऐसी  गजल  गाता  नहीं ,  

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57 टिप्‍पणियां:

  1. वाह...
    ये आँसू भी एक दिन रुक जायेगें
    मेह, हर बादल कभी लाता नही,
    बहुत सुन्दर ग़ज़ल...

    सादर
    अनु

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  2. puri ki puri gazal umda hai,bahut khoob sr ji , नजर के सामने अब कोई आता नही
    अब तो मन को ये माहौल भाता नही,

    जाने वाले की थी कुछ मजबूरियाँ
    घर छोड़ यों तो कोई जाता नही,

    गम को बर्दास्त करना सीख लो
    अपना साया भी नजर आता नही,

    ये आँसू भी एक दिन रुक जायेगें
    मेह, हर बादल कभी लाता नही,

    माफ़ कर सको तो मुझको कर देना
    देवता , इंसान कभी बन पाता नही,

    दर्द मेरा भी तो समझ लो दोस्तों
    यूँ ही कोई ऐसी गजल गाता नहीं ,

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  3. नजर के सामने कोई आता नहीं
    अब तो ये माहौल भाता नहीं.... बहुत सुंदर ग़ज़ल !!

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  4. माफ़ कर सको तो मुझको कर देना
    देवता , इंसान कभी बन पाता नही, wahh.....

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  5. जाने वाले की थी कुछ मजबूरियाँ
    घर छोड़ यों तो कोई जाता नही,
    सही कहा धीरेन्द्रजी ...

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  6. वाह वाह क्या कहने आदरणीय बहुत खूब हार्दिक बधाई स्वीकारें.

    माफ़ कर सको तो मुझको कर देना
    देवता , इंसान कभी बन पाता नही, वाह क्या कहने खास कर इस शे'र के विशेष दाद कुबूल फरमाएं.

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  7. बहुत उम्दा.......बहुत सुन्दर ग़ज़ल...

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  8. ये आँसू भी एक दिन रुक जायेगें
    मेह, हर बादल कभी लाता नही,

    माफ़ कर सको तो मुझको कर देना
    देवता , इंसान कभी बन पाता नही,--बहुत सुंदर ग़ज़ल !!
    latest post बादल तु जल्दी आना रे (भाग २)
    अनुभूति : विविधा -2

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  9. जाने वाले की थी कुछ मजबूरियाँ
    घर छोड़ यों तो कोई जाता नही,

    बहुत लाजवाब शेर है इस गज़ल का ... प्रभावी है गज़ल ..

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  10. माफ़ कर सको तो मुझको कर देना
    देवता, इंसान कभी बन पाता नही
    बेहतरीन....

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  11. गम को बर्दास्त करना सीख लो
    अपना साया भी नजर आता नही,
    एक-एक शब्द सही .... सच्ची अभिव्यक्ति
    सादर

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  12. क्या कहने| बहुत ही बेहतरीन गजल...
    सुन्दर...
    :-)

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  13. वाह वाह sir
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (03-06-2013) के :चर्चा मंच 1264 पर ,अपनी प्रतिक्रिया के लिए पधारें
    सूचनार्थ |

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  14. हरेक शेर जबरदस्त है. बहुत उम्दा बनी है यह गज़ल. बधाई धीरेन्द्र जी.

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  15. दर्द में खुद को डुबोना व्यर्थ है
    है किसी का कुछ यहाँ जाता नहीं ||

    सब मगन हैं अपने-अपने स्वार्थ में
    अब बुलाने से कोई आता नहीं ||

    ढो रहा है दर्द क्यों उस शख्स का
    जो निभा पाया यहाँ नाता नहीं ||

    सुंदर हृदय-स्पर्शी गज़ल के लिए बधाई..............

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  16. कमाल की गज़ल है धीरेन्द्र जी.. दिल का सारा दर्द हर शेर पर बिखेर दिया है आपने.. बहुत खूब!!

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  17. आज की ब्लॉग बुलेटिन शो-मैन तू अमर रहे... ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  18. बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति आभार . ''शादी करके फंस गया यार ,...अच्छा खासा था कुंवारा .'' साथ ही जानिए संपत्ति के अधिकार का इतिहास संपत्ति का अधिकार -3महिलाओं के लिए अनोखी शुरुआत आज ही जुड़ेंWOMAN ABOUT MAN

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  19. माफ़ कर सको तो मुझको कर देना
    देवता , इंसान कभी बन पाता नही,

    बहुत सुंदर !

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  20. बहुत बढ़िया आदरणीय धीर जी -
    शुभकामनायें -

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  21. अच्छी रचना.बहुत बेहतरीन ग़ज़ल

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  22. गम को बर्दास्त करना सीख लो
    अपना साया भी नजर आता नही,

    ...बहुत भावपूर्ण और मर्मस्पर्शी ग़ज़ल...

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  23. वाह ! प्रशंसनीय प्रस्तुती..

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  24. जाने वाले की थी कुछ मजबूरियाँ
    घर छोड़ यों तो कोई जाता नही,

    क्या खूब शेर कहा धीर जी ! वाह ! उम्दा गज़ल के लिए बधाई !

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  25. जाने वाले की थी कुछ मजबूरियाँ
    घर छोड़ यों तो कोई जाता नही,

    बहुत खूबसूरत गजल ...

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  26. माफ़ कर सको तो मुझको कर देना
    देवता , इंसान कभी बन पाता नही,

    ADBHUT HEART TOUCHING LINES

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  27. मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
    आप की ये रचना 07-06-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।


    जय हिंद जय भारत...

    कुलदीप ठाकुर...

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  28. यों तो कोई जाता नही,....बहुत खूब गजल है आपकी..

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  29. जाने वाले की थी कुछ मजबूरियाँ
    घर छोड़ यों तो कोई जाता नही, ------

    सच की सच्ची अनुभूति
    वाह बहुत खूब
    सादर


    आग्रह है
    गुलमोहर------

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  30. ये आँसू भी एक दिन रुक जायेगें
    मेह, हर बादल कभी लाता नही,

    वाह, बहुत खूब
    साभार !

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  31. माफ़ कर सको तो मुझको कर देना
    देवता , इंसान कभी बन पाता नही,
    ....बहुत सुंदर सर

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  32. ऎसी ग़ज़ल गाता नहीं ..

    भई वाह ...गुनगुनाने लायक प्यारी ग़ज़ल !
    बधाई भाई !

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  33. खुबसूरत गज़ल लिखी है भाई जी ....
    मुबारक कबूलें!

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  34. बहुत सुंदर ........टूटे दिल की आह है मगर ...दुसरे की मजबूरी का एहसास भी है
    वाह

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  35. जाने वाले की थी कुछ मजबूरियाँ
    घर छोड़ यों तो कोई जाता नही, ..........
    .... माफ़ कर सको तो मुझको कर देना
    देवता , इंसान कभी बन पाता नही,
    बहुत ही उम्दा प्रस्तुति हर घटना के पीछे कोई वजह होती ही है.


    .

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  36. वाह धीरेन्द्र जी , सर दिल में उतर गई आपकी यह रचना .. विशेष तौर पर यह शेर बहुत प्रभाव शाली लगा ..
    जाने वाले की थी कुछ मजबूरियाँ
    घर छोड़ यों तो कोई जाता नही,
    क्या कहने .. दाद कुबूल करें !

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,