मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

भूल जाते है लोग,




भूल जाते है लोग, 

अपना घर बना के क्यों सजाते है लोग
 यादों के सहारे क्यों जि
ये जाते है लोग,


कभी फुरसत मिले  हमे याद कर लेना  
 मुह फेरकर अपने भी चले जाते है लोग,   


  क्या खता हुई जिसका  ये सिला मिला 
 हँसती हुई आँखों को रुला देते है लोग,

 
जीने के पल होते है, कुछ पल के लिए
 इस दुनियाँ में सब बदल जाते है लोग,




 तन में सांस है सब यार दोस्त हैं,"धीर"
 मौत हुई  दफना कर,भूल जाते है लोग, 


dheerendra,"dheer"





56 टिप्‍पणियां:

  1. जैसे जैसे ज़िन्दगी आगे बढती है
    परेशानियों के मकड़जाले में फंस जाते हैं लोग

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  2. बहुत सुन्दर प्रश्नवाचक गजल!
    मगर इस क्यों का कोई उत्तर नहीं मिलता!

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  3. जीने के पल होते है, कुछ पल के लिए
    इस दुनियाँ में सब बदल जाते है लोग,

    ....बहुत सुन्दर...

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  4. तन में सांस है सब यार दोस्त हैं,"धीर"
    मौत हुई दफना कर,भूल जाते है लोग, .... लाजवाब ..बेहद खूबसूरत गज़ल!

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  5. यही दस्तूर है दुनिया का....
    बेहतरीन ग़ज़ल...

    सादर
    अनु

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  6. यही मानव का दस्तूर है जिसका कोई माकूल जवाब नहीं

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  7. कुछ लोह मन की नात लिखते हैं कुछ मष्तिष्क की बात लिखते हैं. आप मष्तिस्क की बात भी मन के रस में डुबोकर उसे मधुमय बना देता है. रुसवाई को भी कितने प्यार से एहसास कराया हैं.

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  8. यही तो दुनिया का दस्तूर बन गया है

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  9. यही कड़वा सच है सर जो बयाँ किया आपने ,
    बहुत ही लाजवाब तरीके बात कही आपने ।

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  10. आगे बढ़ने की फितरत में सब भूल जाते हैं लोग ....
    सादर !!

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  11. सुन्दर एवं भावनात्मक गज़ल। धन्यवाद।

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  12. बहुत बढ़िया ग़ज़ल ,सर ......
    हर शेर अपने आप में ज़िन्दगी का फलसफा छिपाए हुए है....

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  13. यह दुनिया ही ऐसी है , बहुत जल्द बदल जाती है .....बहुत सुंदर लिखा आपने

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  14. जमाने का दस्तूर है ये पुराना
    बनाकर मिटाना, मिटा कर बनाना......


    सुंदर जज्बाती गज़ल

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  15. कभी फुरसत मिले हमे याद कर लेना
    अपने भी मुह फेरकर चले जाते है लोग,----
    waah bahut sunder bhaw
    badhai ek achhi gajal ke liyey

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  16. जब तक सांस है सब मित्रता रखते हैं पर आँख बंद होते ही सब कुछ बदल् जाता है अपना घर भी पराया हो जाता है |भावपूर्ण रचना बहुत सुन्दर शब्द चयन |
    आशा

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    1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
      आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
      आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज बुधवार (10-04-2013) के "साहित्य खजाना" (चर्चा मंच-1210) पर भी होगी! आपके अनमोल विचार दीजिये , मंच पर आपकी प्रतीक्षा है .
      सूचनार्थ...सादर!

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    2. रस्मेअदायगी है जिंदगी

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  17. उत्कृष्ट प्रस्तुति-
    शुभकामनायें स्वीकारें-

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  18. तन में सांस है सब यार दोस्त हैं,"धीर"
    --------------------------------
    बेहतरीन रचना धीर साहब ....हार्दिक बधाई

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  19. बहुत ही बेहतरीन सुन्दर प्रस्तुती,भूलना जमाने का दस्तूर बन गया है.

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  20. जीने के पल होते है, कुछ पल के लिए
    इस दुनियाँ में सब बदल जाते है लोग,
    sahi hai sundar rachna...

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  21. आज तो ''जो चला गया उसे भूल जा '' के तर्ज़ पर कुछ देर सोचकर सब कुछ भुला दिया जाता है।

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  22. जिन्दगी की सच्चाई
    बहुत बढ़िया, सार्थक रचना
    सादर !

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  23. ऐसा ही तो जीवन है..सुंदर भाव!

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  24. achchhi gazal hai, aakhiri panktiyan bahut jivan ka aakhiri sach bayan karti hain......!

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  25. जीने के पल होते है, कुछ पल के लिए
    इस दुनियाँ में सब बदल जाते है लोग,
    इसी लिए तो कहते हाँ की ये दुनिया है ... नहीं तो स्वर्ग न बन जाए ...
    लाजवाब गज़ल ..

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  26. तन में सांस है सब यार दोस्त हैं,"धीर"
    मौत हुई दफना कर,भूल जाते है लोग,
    प्रगाढ़ अनुभूतियों की सुन्दर रचना .बहुत खूब धीर साहब .

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  27. जीने के पल होते है, कुछ पल के लिए
    इस दुनियाँ में सब बदल जाते है लोग

    बेहतरीन रचना है धीरेन्द्र अंकल। बहुत सटीक।
    सादर
    मधुरेश

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  28. मौत हुई दफना के भूल जाते हैं लोग !

    वाह ...

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  29. भूलना भी इंसान की फितरत है .... खूबसूरत गज़ल

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  30. खुशियों का ठिकाना पता नहीं ऐसे भी होते हैं लोग
    कभी खुशियों मैं भी अपनों को ग़मों से जलाते हैं लोग
    बहुत सुन्दर और हर्दय गंभीर वाच बहुत खूब
    आपको भी नवसंवत्सर की हार्दिक शुभकामनायेँ !

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  31. जीवन की हकीकत को दिखाती एक शानदार ग़ज़ल ..सादर बधायी के साथ

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  32. बहुत सुंदर

    कभी फुरसत मिले हमे याद कर लेना
    अपने भी मुह फेरकर चले जाते है लोग,

    क्या बात

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  33. बहुत सुन्दर रचना हुज़ूर | नव संवत्सर की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ और बधाई |

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  34. इंसानी फि‍तरत को बहुत अच्‍छे से उकेरा है आपने...

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  35. नवसंवत्सर की शुभकामनायें
    आपको आपके परिवार को हिन्दू नववर्ष
    की मंगल कामनायें

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  36. क्या करें यही सच्चाई है..
    यथार्थं कहती रचना....
    बेहतरीन..
    सर जी अभी मेरी परीक्षाएं चालू है इसलिए ब्लॉग पर नहीं आ पा रही हूँ..
    आपने मुझे याद किया,, धन्यवाद...
    :-)

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  37. सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार नवसंवत्सर की बहुत बहुत शुभकामनायें हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

    BHARTIY NARI
    PLEASE VISIT .

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  38. कभी फुरसत मिले हमे याद कर लेना
    अपने भी मुह फेरकर चले जाते है लोग,
    बेहद खूबसूरत गज़ल
    नववर्ष और नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाए....!!!

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  39. कभी फुरसत मिले हमे याद कर लेना
    अपने भी मुह फेरकर चले जाते है लोग....
    बहुत सुन्दर नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाए

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  40. जाने क्यूँ , जाने क्यूँ.......बहुत खुबसूरत ।

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