सोमवार, 29 अप्रैल 2013

मधुशाला,

 मधुशाला,

 मधुशाला बदनाम हो गयी,हर महफ़िल की शान हो गयी 
जिव्हा से हल्खो तक गुजरी,कब सुबहो से शाम हो गयी,

मधुशाला बदनाम हो गयी,,,

नुक्कड़  चौक चौराहों  में,गुल से मैं  गुलफाम  हो गयी
मद,मय,मदिरा,सोमरसों के,नामों  से बदनाम हो गयी

मधुशाला बदनाम हो गयी,,,

मंदिर  से  मदिरालय  तक, कई  कहानी  आम  हो  गयी
देव असुर मन्थन से निकली,असुरों की मै जाम हो गयी,

मधुशाला बदनाम हो गयी,,,

इंसानों शैतानो की शोहबत,अब देखो मेरे नाम हो गयी
पीकर हरकत देख मेरी गति,सरे राह बदनाम  हो गयी,
                                                          
मधुशाला बदनाम हो गयी,,,

dheerendra singh bhadauriya

55 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी है ...पर सोमरस ..मदिरा नहीं है ...

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  2. dir ji kamal hai,kuchh bhi likh dijie,supar hit ka tagama aap ke hi nam hai.

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    1. बेनामी जी,टिप्पणी देने के लिए शुक्रिया,
      भविष्य में टिप्पणी अपने नाम से दे,अन्यथा टिप्पणी प्रकाशित नही की जायगी,,,

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  3. dhir ji kamal hai,kuchh bhi likh dijie,supar hit ka tagama aap ke hi nam hai.

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  4. som ras kya hai,jara yah bhi bta dijiye?

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    1. इसका जबाब तो श्याम गुप्ता जी ही बता सकते है,

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    2. bahut sundar abhivyakti dheerendra ji madhushala par kalam naye naye rang bikherti hai badhai

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  5. अच्छा प्रयास | सोमरस शराब नहीं होती इसे ठीक कर लें | आभार

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार के "रेवडियाँ ले लो रेवडियाँ" (चर्चा मंच-1230) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  7. बदनाम ब्यूटी :-) मगर जो सुरा सेवन करे वह सुर और जो न करे वह (अ )सुर !

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  8. देव असुर मन्थन से निकली,असुरों की मै जाम हो गयी,
    sundar............

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  9. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतीकरण,आभार.

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  10. इंसानों शैतानो की शोहबत,अब देखो मेरे नाम हो गयी
    पीकर हरकत देख मेरी गति,सरे राह बदनाम हो गयी,

    मधुशाला बदनाम हो गयी,,,

    वाह आदरणीय, बहुत सुंदर रचना की है.

    बहुत-बहुत बधाई............

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  11. बहुत उम्दा प्रस्तुति मयखाना प्रिय मय परस्तो को !
    latest postजीवन संध्या
    latest post परम्परा

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  12. मधुशाला बदनाम हो गयी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, दिलचस्प ..

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  13. मंदिर से मदिरालय तक, कई कहानी आम हो गयी
    देव असुर मन्थन से निकली,असुरों की मै जाम हो गयी,...

    वाह ... क्या बात है धीरेन्द्र जी ... मज़ा आ गया इस काव्य की मधुशाला को पी के ...

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  14. अच्छी लगी रचना लेकिन 'सोमरस' को यफी मदिरा से न जोड़ा जाय तो अच्छा होगा क्योकि डॉ. रंगनाथन ने अपनी पुस्तक 'दि वैदिक कांसेप्ट ऑफ़ सोम' में वैदिक उद्धरणों को लेकर सोम के २८ अर्थ किये हैं, उनमे एक भी मदिरा अर्थ में नहीं है. यह अलग बात है की भाई लोगों ने इस 'सोम' को न जाने कब और कैसे मदिरा के अर्थ में ही प्रयोग करते चले आ रहे हैं. इसकी पृष्ठ भूमि को देखना उचित होगा. सादर....

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    1. सोमरस के सन्दर्भ में जानकारी देने के लिए आभार,,शुक्रिया,,,

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  15. सुंदर भावपूर्ण रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति

    आग्रह है इसको भी पढें
    कहाँ खड़ा है आज का मजदूर------?

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  16. इंसानों शैतानो की शोहबत,अब देखो मेरे नाम हो गयी
    पीकर हरकत देख मेरी गति,सरे राह बदनाम हो गयी,

    मेरे नाना श्री गोलन सिंह की दो लाइन आपको समर्पित
    न पीना बुरा है न पिलाना बुरा है
    पी के होश में आना बुरा है

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  17. सुंदर भावपूर्ण रचना ..आभार

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  18. अत्यंत ही प्रभावशाली रचना.

    रामराम.

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  19. रचना दिल से खूबसूरत रची गई है
    कोई भी चीज़ अपने आप में अच्छी या बुरी नहीं होती
    उसका उपयोग अच्छा या बुरा बनाता है
    खांसी की दवा में भी अलकोहल होता है
    सादर

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  20. नया रूपक तत्व लिए आई है यह बढ़िया रचना .

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  21. वाह वाह आदरणीय क्या बात है अत्यंत सुन्दर लाजवाब प्रस्तुति.

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  22. बहुत सुन्‍दर रचना ...

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  23. अति सब चीजो के मूल्यों को नष्ट कर देती है बेचारी सुरा भी अति का शिकार हुई है ,बहुत बढ़िया आदरणीय धीर जी एक अलग तरह की पोस्ट मजा आया पढ़ कर|

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  24. मैंने उनका पीना छुड़ाया अपनी कसम देकर दोस्तों ने फिर से पिला दी मेरी कसम देकर -----बताइये अब सुरा को बदनामी नहीं मिलेगी तो और क्या मिलेगा ??

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  25. मधुशाला तो जबसे बनी है तभी से बदनाम है.....तराने वाली रचना.....सुन्दत।

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  26. पीकर बहकना तो आम है
    मधुशाला व्यर्थ में बदनाम है
    ....सुन्दर प्रस्तुति

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,