सोमवार, 4 मार्च 2013

रंग,


रंग
धीरे-धीरे
शांत रहकर
अपना प्रभाव छोड़ते है, 
वे नही,
चीखते / चिल्लाते
ज़रा भी
रंगों को बिखरा हुआ
देखकर हमे,
लगता जरूर है ऐसा!
कि इनके बीच
मचा हुआ है हाहाकार!
इनमे से, कोई
चीख रहा है
कोई खीझ रहा है
किन्तु ऐसा होता नही है 

रंग
शांत रहकर
धीरे-धीरे
अपना प्रभाव छोड़ते है,
हम पर,
वे उतरते ही चले जाते है
ह्रदय की गहराइयों में
दबे पाँव,
चुपचाप...


dheerendra singh bhadauriya...

 

53 टिप्‍पणियां:

  1. बिना शोर शराबे के अपना रंग दिखाती रचना ...बढ़िया ....धीर साहब ..

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  2. नीले हाथी पर चढ़ा, देखो माया मित्र ।

    चली तिरंगे पर लटक, दल बल सहित विचित्र ।

    दल बल सहित विचित्र, हरा से भगवा हारे ।

    मिटता लाल निशान, करे तृण-मूल किनारे ।

    रंग रूप हैं भिन्न, खिन्न है सभी कबीले ।

    धानी पीला-श्वेत, बैगनी काले नीले ॥

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  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  4. उत्कृष्ट प्रस्तुति ,.बढ़िया रचना

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  5. अपने रंग में, अपने मन की कहते रहते।

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  6. वाह आदरणीय रंगों की सुन्दरता से रंग दिया आपने बेहतरीन प्रस्तुति

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  7. सच में सुंदर रंगो से सरोबार करती रचना

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  8. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतीकरण,आभार.

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  9. मुझे होली के रंगों की ,
    नए रंग में प्रस्तुति भली लगी .... :))
    सादर !!

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  10. bahut sundar prastuti ...

    मेरा लिखा एवं गाया हुआ पहला भजन ..आपकी प्रतिक्रिया चाहती हूँ ब्लॉग पर आपका स्वागत है

    Os ki boond: गिरधर से पयोधर...

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  11. रंग शांत रहकर धीरे-धीरे अपना प्रभाव छोड़ते है, ठीक उसी तरह आप भी हिंदी ब्लॉग जगत में अपना प्रभाव छोड़ रहें है। बेहतरीन रचना। :)

    नये लेख :- एक नया ब्लॉग एग्रीगेटर (संकलक) ; ब्लॉगवार्ता।
    राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर विशेष : रमन प्रभाव।

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  12. ह्रदय की गहराइयों में .........बहुत ही सुन्दर ,आभार.

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  13. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 5/3/13 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका स्वागत है|

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  14. रंग

    धीरे-धीरे


    शांत रहकर

    अपना प्रभाव छोड़ते है, हैं


    वे नही,

    चीखते / चिल्लाते

    ज़रा भी

    रंगों को बिखरा हुआ

    देखकर हमे,

    लगता जरूर है ऐसा!

    कि इनके बीच

    मचा हुआ है हाहाकार!

    इनमे से, कोई।।।इनमें ....

    चीख रहा है

    कोई खीझ रहा है

    किन्तु ऐसा होता नही है

    रंग

    शांत रहकर

    धीरे-धीरे

    अपना प्रभाव छोड़ते है,हैं .......

    हम पर,

    वे उतरते ही चले जाते है हैं .....

    ह्रदय की गहराइयों में

    दबे पाँव,

    चुपचाप...

    धीरेन्द्र भाई बहुत सुन्दर रचना है .बधाई

    उत्तर देंहटाएं
  15. रंगां-रंग परिचय रंगों का .....

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  16. बहुत ही भावपूर्ण रचना है |
    आशा

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  17. हर रंग का अलग प्रभाव है -सुन्दर प्रस्तुति
    latest post होली

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  18. रंग के बिना जीवन नीरस ...बेजान .....सुन सको तो सुनो ...रंगों की जुबान ...
    बहुत बढिया

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  19. मंगलवार 26/03/2013 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं .... !!
    आपके सुझावों का स्वागत है .... !!
    धन्यवाद .... !!

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  20. वाकई, बहुत सुन्दर वर्णन किया है रंगों का आपने ....

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  21. रंग दिखाती बहुत ही सुन्दर रचना

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  22. रंगों के माध्यम से अच्छी सीख देती कविता !

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  23. रंग बिरंगे रंगों में रंगी सुन्दर पोस्ट।

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  24. ओर कुछ रंग तो गहरा प्रभाव भी छोड़ते हैं .. उतरते नहीं उतरता ...
    प्रेम भी तो ऐसा ही एक रंग है ..

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  25. बहुत बेहतर sir
    http://www.saadarblogaste.in/2013/03/15.html

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  26. रंगों को प्रतीक बनाकर आपसी प्रेम सद्भाव की प्रभावकारी शिक्षा देता हुआ एक अनमोल रचना, व्यंजन शक्ति का रोचक प्रयोग..... आभार

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  27. रंगों की कलात्मक एवं कल्पना से भरी प्रस्तुति.

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  28. बहुत सुन्दर रंग चुपचाप रहकर प्रभाव छोड़ते हैं, जो लोग शोर मचाते हैं, कम ही प्रभाव छोड़ पाते हैं.
    KAVYA SUDHA (काव्य सुधा)

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  29. क्या रंग बिखेरे हैं सौम्यता से शालीनता से ।

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  30. बहुत शालीनता से सुन्दर वर्णन ....... रंगों का ....क्या रंग बिखेरे हैं ....

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  31. बहुत खूब आपके भावो का एक दम सटीक आकलन करती रचना
    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    तुम मुझ पर ऐतबार करो ।
    पृथिवी (कौन सुनेगा मेरा दर्द ) ?

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  32. बहुत सुंदर रंग बिखेरे हैं आपकी इस रचना ने .....

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  33. रंगों की नई परिभाषा...सुंदर प्रस्तुति !

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  34. अनुपम भाव संयोजित किये हैं आपने ...

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  35. वाह ...रंगों को भी जुबां दे दी है आपने

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  36. हम पर,

    वे उतरते ही चले जाते है हैं .....

    ह्रदय की गहराइयों में

    दबे पाँव,

    चुपचाप...

    आपने होली के पहले ही जीवन को रंगों से सराबोर कर दिया .

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  37. रंगों को जीवंत करती बहुत सुन्दर रचना...

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  38. रंगों की कलात्मक एवं कल्पना से भरी प्रस्तुति. ,,,,,,

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  39. रंग नहीं इंसान हो गए ,
    सुंदर रंग और भाव ....
    साभार..........

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  40. आदरणीय बहुत सुन्दर और सच बात लिखी आपने! रंगों की तरह यह भी धीरे धीरे मन में गहरे उतरते चली गयी और आपकी रचना ने कब्जा कर लिया मन पर किसी गहरे रंग की तरह। अब वही छायी है। मेरी बधाई स्वीकारें!
    होली की शुभकामनायें!
    http://voice-brijesh.blogspot.com

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,