मंगलवार, 12 मार्च 2013

होरी नही सुहाय,



बीबी बैठी मायके , होरी नही सुहाय   
साजन मोरे है नही,रंग न मोको भाय, 



मित्रों....होली का त्यौहार ! जिसकी प्रतीक्षा बसंत के आगमन से ही शुरू हो जाती है,और अब तो होली का त्यौहार भी नजदीक आ गया है,होली पर जहां छेड़-छाड़,और हँसी की ठिठोली,साली-जीजा की,देवर-भाभी की होली का अपना अलग आनंद है,इस खुशगवार मौके पर यदि बीबी मायके चली जाय या पति परदेश में हो तो क्या होगा,?आपने तो शायद ऐसी कभी कल्पना ही नही की होगी,और करिएगा भी मत,ऐसी कल्पना तो सिर्फ अपने अच्छे बुरे अनुभव रस लेकर ,रचनाकार ,गीतकार ,व्यंगकार ,ही रचनाऐ सुना सकते है, 

तो मित्रो...होली के अवसर पर उपरोक्त शीर्षक के अंतर्गत किसी भी विधा जैसे दोहे ,कुण्डलियाँ ,गजल ,छंद ,कविता ,चुटकुले, लेख ,संस्मरण इत्यादि ,रचनाऐ दिनांक...25/3/13/, तक आमंत्रित  है ! दिनांक  27/3/13 को  आपकी  रचनाये  नाम  व  फोटो  के  साथ  प्रकाशित की जायेगी ! साथियो  फिर  देर  किस  बात  की  फ़ौरन  रचनाए  लिखकर, फोटो के   साथ   इस   पते - dheerusingh111@gmail.com - पर   साथ   भेज   दे,
   



Dheerendra singh bhadauriya, 
सम्पर्क सूत्र...9752685538,




62 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया आयोजन-
    शुभकामनायें-

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  2. बहुत ही सुन्दर आयोजन,कोशिस करूँगा रचना भेजने की.

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  3. बड़ा ही रंगमयी आयोजन, शुभकामनायें।

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  4. bahut khoob dheerendr ji ..aapne to fagun ke svagat ki poori taiyari kar li ... badhiya aayojan kiya hai ..

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  5. बढ़िया है। सफल हो। शुभकामनायें। ..

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  6. अच्छा आयोजन किया है बहुत सारे रंगारंग रचनाये पढने को मिलेंगे !

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  7. बहुत अच्छा प्रयास आप बधाई के पात्र है. मैं भी कोशिश करूँगा

    बहुत सुन्दर

    सादर

    नीरज 'नीर'

    मेरी नयी कविता
    KAVYA SUDHA (काव्य सुधा): अषाढ़ का कर्ज

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  8. achaa aayojan,holi par chulbulee rachnaae padhne ko milegee,,,aabhar

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  9. अच्छा है आयोजन..फागुन रंग की अच्छी रचनाएँ पढ़ने को मिलेंगी.

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  10. आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (13-03-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
    सूचनार्थ |

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  11. सब सुहाय ... जब पड़ोसवाली मुसकाय

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  12. वाह आदरणीय धीरेंद्र जी, फागुनी उल्लास में विरह के रंग को उकेरता यह दोहा जिसकी पहली पंक्ति में नायक अंतर्मन की बात कह रहा है, वहीं दूसरी पंक्ति में नायिका की वेदना मुखरित हो रही है.

    पूरब पिचकारी पड़ी, पश्चिम रोता रंग
    होली में कर दीजिए,दोनों को इक संग ||

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  13. सादर जन सधारण सुचना आपके सहयोग की जरुरत
    साहित्य के नाम की लड़ाई (क्या आप हमारे साथ हैं )साहित्य के नाम की लड़ाई (क्या आप हमारे साथ हैं )

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  14. बहुत अच्छा कदम मै कोशिश करुँगी ..बधाई आपको :-)

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  15. धीरेन्द्र जी ये rachnaayein प्रकाशित कहा होगी?

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    1. २७ /३ /१३ / को इसी ब्लॉग पर ,,,,सभी की आमंत्रित रचनाए पकाशित की जायगी,,,,आभार,,

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  16. स्वागत रहेगा!! शुभकामनाएं!!

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  17. अच्छा आगाज़ है .शुभकामनाएं इस प्रयास की सफलता को .

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  18. शुभप्रभात :))
    हाइकू भेज सकती हूँ ?
    सादर !!

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    1. शीर्षक के अन्तरगत हर बिधा में रचनाए आमंत्रित है आपका स्वागत है,,,,

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  19. सुन्दर और सामयिक प्रस्तुति!
    आपकी पोस्ट की चर्चा आज 14-03-2013 के चर्चा मंच पर भी है!
    सूचनार्थ... सादर!

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  20. शुभकामनायें...होली मुबारक !

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  21. बहुत अच्छी पहल, सभी की रंग-बिरंगी रचनाएँ एक ही जगह मिल जाएंगी।

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  22. वाह आदरणीय वाह बहुत सुन्दर हार्दिक बधाई

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  23. बैठ भंडिरा चौंक पै सजन सँदेस सुनाए ।
    गोरी घूँघट औंट कै होरी होरी गाए ॥

    भावार्थ : --
    पत्रवाहक चौराहे पर बैठ कर प्रियतम का सन्देश सुना रहा है ।
    और प्रियतमा घूँघट कर होली है! होली है! कह रही है ॥

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  24. रंगारंग प्रयास ,हार्दिक बधाई
    अवश्य भेजती हूँ

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  25. भई वाह ... आभार ओर शुभकामनायें ...

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  26. मैं भी जल्दी से जल्दी कुछ लिखने का प्रयास करूंगा..कोई ऐसी शर्त तो नहीं है की कहीं और न प्रकाशित की गयी रचना ही होनी चाहिए

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    1. नही ऐसी कोई शर्त नही है,बस होली पर उपरोक्त शीर्षक के अंतरगत चटपटी मजेदार होनी चाहिए,,,ताकि होली का आनंद आ सके,,,

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  27. रंग बिखेरकर कर रंगा रंग धमाल के आगाज के लिए शुभ कामनाएं मन आनंदित हुआ
    भ्रमर 5

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  28. बढ़िया काम है आपका , बधाई आपको !

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  29. बहुत सुन्दर आयोजन है,, आमंत्रण के लिए आभार

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  30. bahut sundar aayojan , amantran ke liye abhaar , holi ka dhamal shabdo se .bahut khas hi hoga .

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  31. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,