सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

कुछ तरस खाइये,



कुछ तरस खाइये ,

देश की हालत पर ,कुछ तरस खाइये
  ओहदों की आड़ से मत देश भुनाइये, 

तहजीब सलीके का असली अर्थ क्या
 नई सदी में क्या किया हमको बताइये,

ठहरा हुआ अन्धेरा खुद कापने लगे
ऐसी ही नई चाह की शमा जलाइये,

मुंसिफ,खौफ खाये मुजरिम के नाम से
  क़ानून को न इतना निकम्मा बनाइये, 

इन्साफ का तराजू कभी डोल न सके
  क़ानून और इन्साफ का भरोसा दिलाइये, 

खुद को देखता जो फ़रिश्ते की शक्ल में
जाकर के उसे आईने में चेहरा दिखाइये,

जिसने दी आदमी को हर वक्त ठोकरें
धीरे से"धीर"उसको भी वाकिफ कराइये,


धीरेन्द्र सिंह"धीर"

54 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ तरस खाइये , गद्दार नेताओं मेरे देश को तो छोड़ जाइए। अच्छी कविता :)

    नया लेख :- पुण्यतिथि : पं . अमृतलाल नागर

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  2. मुंसिफ,खौफ खाये मुजरिम के नाम से
    क़ानून को न इतना निकम्मा बनाइये,

    बहुत सही कहा धीर जी ।

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  3. इन्साफ का तराजू कभी डोल न सके
    behatareen ,talkh sacchayee aaj ki क़ानून और इन्साफ का भरोसा दिलाइये,

    खुद को देखता जो फ़रिश्ते की शक्ल में
    जाकर के उसे आईने में चेहरा दिखाइये,

    जिसने दी आदमी को हर वक्त ठोकरें
    धीरे से"धीर"उसको भी वाकिफ कराइये,new posts- 1,batate bharat ho,2.bada khudgarz zamana hoga

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  4. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार26/2/13 को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका हार्दिक स्वागत है

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  5. इन्साफ का तराजू कभी डोल न सके
    क़ानून और इन्साफ का भरोसा दिलाइये,

    उम्दा प्रस्तुति

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  6. बहुत बढ़िया कटाक्ष हैं .....बहुत आनंद आया पढने में ......

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  7. सूचना...
    आप की ये रचना शुकरवार यानी 01-03-2013 को http://www.nayi-purani-halchal.blogspot.com पर लिंक की जा रही है।

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  8. ठहरा हुआ अन्धेरा खुद कापने लगे
    ऐसी ही नई चाह की शमा जलाइये,

    बेहतरीन प्रस्तुति

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  9. तरस तो उनकी मानसिकता पर आता जो देश से गद्दारी कर रहे है क्या उनको मालूम नहीं कि उनका अंजाम क्या है .......बहुत सुन्दर प्रस्तुतिकरण

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  10. सुन्दर प्रस्तुति |
    आभार आदरणीय ||

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  11. आब देश को जागना होगा,बहुत बढियाँ कटाक्ष भरा उद्वेगना.

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  12. मुंसिफ,खौफ खाये मुजरिम के नाम से
    क़ानून को न इतना निकम्मा बनाइये,
    सुपर शेर है। पर गहरी नींद में सोने वालों को जगाने की कोशिश है।

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  13. सचाई से रूबरू कराती प्रस्तुती सार्थक प्रस्तुती बहुत अच्छी रचना
    मेरी नई रचना

    ये कैसी मोहब्बत है

    खुशबू

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  14. राम नाम जपना पराया माल अपना .... दो पैसे के लिए जान लेना
    कौन तरस खायेगा - फुर्सत कहाँ है !!!

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  15. मुंसिफ,खौफ खाये मुजरिम के नाम से
    क़ानून को न इतना निकम्मा बनाइये,

    वाह लाजवाब गज़ल ... नायाब शेर ...

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  16. मुंसिफ,खौफ खाये मुजरिम के नाम से
    क़ानून को न इतना निकम्मा बनाइये,

    ...बहुत खूब! बेहतरीन प्रस्तुति...

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  17. भैंस के आगे बीन बजाना ही होगा .सब बहरे है .उम्दा प्रस्तुति
    new postक्षणिकाएँ

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  18. मुंसिफ,खौफ खाये मुजरिम के नाम से
    क़ानून को न इतना निकम्मा बनाइये,
    बहुत सही कहा ....

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  19. बेपेंदी के लोटे को और कितना लुढ़काइये
    इस देव से उस देव तक, पाँव कही जमाइए

    My recent post.......if you like
    http://shikhagupta83.blogspot.in/2013/02/blog-post_26.html

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  20. आज के ज़माने के हालातों का आइना है यह गज़ल.

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  21. क्या बात है ,बेहतरीन पंक्तियाँ संवेदनशील सृजन ,हालात से सरोकार रखती हुयी .....

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  22. मुंसिफ,खौफ खाये मुजरिम के नाम से
    क़ानून को न इतना निकम्मा बनाइये,
    बहुत सुन्दर, बेहतरीन !

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  23. "खुद को देखता जो फ़रिश्ते की शक्ल में
    जाकर के उसे आईने में चेहरा दिखाइये."................
    बहुत मुश्किल है बिल्ली के गले में घंटी बांधना .....
    उपरोक्त सुंदर प्रस्तुति हेतु आभार,

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  24. लाजवाब आदरणीय सुन्दर व्यंग कसा है. बधाई स्वीकारें

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  25. खुद को देखता जो फ़रिश्ते की शक्ल में
    जाकर के उसे आईने में चेहरा दिखाइये,

    वाह ...

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  26. कसम लेने की और निभाने की हम सबको जरुरत है !
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति !
    आभार !

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  27. बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
    बधाई

    जयपुर न्यूज
    पर भी पधारेँ।

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  28. मुंसिफ,खौफ खाये मुजरिम के नाम से
    क़ानून को न इतना निकम्मा बनाइये,

    लाजवाब गज़ल ...

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  29. मुंसिफ,खौफ खाये मुजरिम के नाम से
    क़ानून को न इतना निकम्मा बनाइये,
    impressive lines.

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  30. हकीकत का आयना दिखाती और भविष्य की आशाएं लिए सुन्दर रचना !!

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  31. सराहनीय प्रस्तुति....
    बधाई.

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