रविवार, 9 दिसंबर 2012

रूप संवारा नहीं,,,


रूप संवारा नहीं,

कुहासों  ने घूंघट उतारा नही है,
अभी मेरे प्रियतम का इशारा नहीं है!

किरणों  का  रथ लगता थम गया,
सूरज ने अभी पूरब निहारा नही है!

चारो दिशाओं में धुंधलके है फैले,
पूनम के चाँद को गंवारा नहीं है! 

चाँदनी रातें फीकी सी लग रही,
मेरे प्रियतम ने दीप उजारा नही है!

हेमन्त जा रहा शिशिर आ रहा,
बसंत ने अभी रूप
संवारा नहीं है!

OBO अंक - 26 में शामिल,

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया,

58 टिप्‍पणियां:

  1. चाँदनी रातें फीकी सी लग रही,
    मेरे प्रियतम ने दीप उजारा नही है!

    @@ वाह ! शानदार पंक्तियाँ !!

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  2. बहुत बढ़िया ....
    चाँदनी रातें फीकी सी लग रही,
    मेरे प्रियतम ने दीप उजारा नही है!
    बेहद खूबसूरत गज़ल...

    सादर
    अनु

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  3. चारो दिशाओं में धुंधलके है फैले,
    पूनम के चाँद को गंवारा नहीं है!

    शानदार धीर जी।

    अगर इसकी बजाय ''चारो दिशाओं में धुंधलके हों फैले, होता तो इस शेर की खूबसूरती निखार आ जाता।

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  4. चाँदनी रातें फीकी सी लग रही,
    मेरे प्रियतम ने दीप उजारा नही है! बेहद खूबसूरत पंक्तियाँ...........

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  5. कुहासों ने घूंघट उतारा नही है,


    अभी मेरे प्रियतम का इशारा नहीं है!

    बढ़िया गजल का बेहतरीन मतला है .

    ram ram bhai
    मुखपृष्ठ

    रविवार, 9 दिसम्बर 2012
    Global warming ,sperm count dropping

    http://veerubhai1947.blogspot.in/

    मर्दानगी पे भारी पड़ रहा है भूमंडलीय तापन (आलमी ग...गर्मी ,पहली और दूसरी किश्त अब एक साथ )

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  6. घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    । लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज सोमवार के चर्चा मंच पर भी है!
    सूचनार्थ!

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  7. रूप संवारा नहीं ............अच्छी रचना !!

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  8. हेमन्त जा रहा शिशिर आ रहा,
    बसंत ने अभी रूप संवारा नहीं है!
    bahut sundar rachna ....shubhkamnayen ...

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  9. हेमन्त जा रहा शिशिर आ रहा,
    बसंत ने अभी रूप संवारा नहीं है!

    बिलकुल सही ! लाजबाब अभिव्यक्ति !!

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  10. प्रेम की सुन्दर अभिव्यक्ति है ये गज़ल ...

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  11. हेमन्त जा रहा शिशिर आ रहा,
    बसंत ने अभी रूप संवारा नहीं है
    bahut sundar ...

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  12. हेमंत ऋतु को समर्पित उम्दा भाव लिए बेहतरीन प्रस्तुति धीरेन्द्र सर
    अरुन शर्मा
    RECENT POST शीत डाले ठंडी बोरियाँ

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  13. बहुत सुन्दर ..
    बहुत ही बढियां गजल.....
    :-)

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  14. हेमन्त जा रहा शिशिर आ रहा,
    बसंत ने अभी रूप संवारा नहीं है!

    सुंदर नज़्म बसंत के आने की प्रतीक्षा में.

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  15. क्षमा करें देरी हो गई…

    चारो दिशाओं में धुंधलके है फैले,
    पूनम के चाँद को गंवारा नहीं है!

    सार्थक!!

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  16. waah bahut khoob behad sundar panktiyan sarthak rachna prem me pagi hui , badhai aapko

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  17. सार्थक प्रस्तुति बहुत सुन्दर .. चारो दिशाओं में धुंधलके है फैले,
    पूनम के चाँद को गंवारा नहीं है!

    चाँदनी रातें फीकी सी लग रही,
    मेरे प्रियतम ने दीप उजारा नही है!

    हेमन्त जा रहा शिशिर आ रहा,
    बसंत ने अभी रूप संवारा नहीं है!

    OBO अंक - 26 में शामिल,

    उत्तर देंहटाएं
  18. कुहासों ने घूंघट उतारा नही है,
    अभी मेरे प्रियतम का इशारा नहीं है!

    बहुत सुन्दर रचना है ! कुछ ऐसा ही मौसम है इन दिनों ! बहुत खूब !

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  19. सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए बधाई...

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  20. कुहासों ने घूंघट उतारा नही है, नहीं बोल कर तो नकारा नहीं है
    अभी प्रियतम का इशारा नहीं है! समझदार को ये इशारा नहीं है ?

    किरणों का रथ लगता थम गया है, सभी फ्लाइटों का समय-काल बदला
    सूरज ने अभी पूरब निहारा नही है! इसके बिना कोई चारा नहीं है |

    चारो दिशाओं में धुंधलके पड़े है, छँटेंगे धुँधलके, जरा धीर रखिए
    पूनम के चाँद को गंवारा नहीं है! उधर ग्रीन सिग्नल है,तारा नहीं है |

    चाँदनी रातें फीकी सी लग रही है, उनकी भी मानो,उन्हें चाँदनी में
    मेरे प्रियतम ने दीप उजारा नही है! दीपक जलाना गवारा नहीं है |

    हेमन्त जा रहा शिशिर आ रहा है, चढ़ी भाव मदिरा ,जरा हम हैं बहके
    बसंत ने अभी रूप संवारा नहीं है! कोई जोर दिल पर,हमारा नहीं है |

    धीरेन्द्र सिंह भदौरिया,,,, अरुण

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  21. चाँदनी रातें फीकी सी लग रही,
    मेरे प्रियतम ने दीप उजारा नही है!

    बेहतरीन प्रस्तुति ।

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  22. हेमन्त जा रहा शिशिर आ रहा,
    बसंत ने अभी रूप संवारा नहीं है! waah waah bahut sundar rachna lagi yah

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  23. बहुत बढ़िया
    बेहद खूबसूरत गज़ल......!

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  24. किरणों का रथ लगता थम गया,
    सूरज ने अभी पूरब निहारा नही है!...बहुत ही खूबसूरत गज़ल.

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  25. हेमन्त जा रहा शिशिर आ रहा,
    बसंत ने अभी रूप संवारा नहीं है!

    ....बहुत खूब! बेहतरीन ग़ज़ल...

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  26. जवाब नहीं आपकी इस गज़ल का.. समां बांध गया एक एक शेर.. बहुत खूब!!

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  27. बेहतरीन रचना धीरेन्द्र जी ... रहस्यवाद का पुट लिए प्रकृति का सुन्दर वर्णन

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  28. चाँदनी रातें फीकी सी लग रही,
    मेरे प्रियतम ने दीप उजारा नही है!

    वाह ..बहुत ही शानदार लगी आपकी ये पोस्ट

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  29. शानदार कृति प्रकृति के अवयवों पर .......भाव व चित्रण की अनोखी प्रभा अभिसरित हो रही है ....

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  30. अच्छी रचना है।
    चंद पंक्तियों में अनुभूतियों का संकुल।

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  31. बहुत बढ़िया
    बेहद खूबसूरत गज़ल......

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  32. किरणों का रथ लगता थम गया,
    सूरज ने अभी पूरब निहारा नही है!

    waah bahut sundar

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  33. हेमन्त जा रहा शिशिर आ रहा,
    बसंत ने अभी रूप संवारा नहीं है.....
    खुबसूरत उपमाएं !

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  34. आपकी यह रचना अख़बार में भी
    http://bhaskarbhumi.com/epaper/inner_page.php?d=2012-12-18&id=8&city=Rajnandgaon

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  35. बहुत बढ़िया ....शानदार पंक्तियाँ

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  36. वाह बहुत खूब ,,,,,
    किरणों का रथ लगता थम गया,
    सूरज ने अभी पूरब निहारा नही है!

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,