शनिवार, 17 नवंबर 2012

अपने साये में जीने दो...

अपने साये में जीने दो.
  
सारी उम्र किया इन्तजार अब टूटे दिल को सीने दो 
कुछ समय  बचा है जीने को अपने साए में जीने दो!


 उम्मीद थी तेरे आने की लेकिन  हासिल कुछ न हुआ,
पैगाम जिंदगी ने दिया मौत का मेरे हाल में मरने दो!


बरसों हो गए मेरी आँखों  से तेरी खटक जाती ही नही,
तिनका उड़ गिरता आँखों पर यादें आँसू बन बहने दो!


बेवफा कहे वो, मै बदनसीब अपने मुकद्दर को क्या कहूँ, 

अपनी बेवफाई, इल्जाम मुझ पर,बदनामी मेरी करने दो! 

मुहब्बत,बेवफाई,दर्द ऐ गम, देकर चले गये मुझको सारे, 
खुश रहो तुम ये दुआ है मेरी अब सितम धीर को सहने दो! 


dheerendra,dheer,  

   

50 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति दिल को छू जाती हैं पंक्तियाँ बहुत बहुत बधाई

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  2. बरसों हो गए मेरी आँखों से तेरी खटक जाती ही नही,
    तिनका उड़ गिरता आँखों पर यादें आँसू बन बहने दो!

    ummdaa bahut khoob sir

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  3. सारी उम्र किया इन्तजार अब टूटे दिल को सीने दो
    कुछ समय बचा है जीने को अपने साए में जीने दो!

    बहुत बढ़िया रंग भरा है इस गजल में .दिनानुदिन निखार है धीरेन्द्र जी के अशआर में .बधाई .बढ़िया काम कर रहें हैं आप ,निखार की और बढ़ चलें हैं तेज़ी से .

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  4. मन के भावों की सुन्दर प्रस्तुति .....सादर!

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  5. मन के वेदना को प्रदर्शित करती सुंदर रचना |

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  6. बहुत सुन्दर प्रविष्टि वाह!

    इसे भी अवश्य देखें!

    चर्चामंच पर एक पोस्ट का लिंक देने से कुछ फ़िरकापरस्तों नें समस्त चर्चाकारों के ऊपर मूढमति और न जाने क्या क्या होने का आरोप लगाकर वह लिंक हटवा दिया तथा अतिनिम्न कोटि की टिप्पणियों से नवाज़ा आदरणीय ग़ाफ़िल जी को हम उस आलेख का लिंक तथा उन तथाकथित हिन्दूवादियों की टिप्पणयों यहां पोस्ट कर रहे हैं आप सभी से अपेक्षा है कि उस लिंक को भी पढ़ें जिस पर इन्होंने विवाद पैदा किया और इनकी प्रतिक्रियायें भी पढ़ें फिर अपनी ईमानदार प्रतिक्रिया दें कि कौन क्या है? सादर -रविकर

    राणा तू इसकी रक्षा कर // यह सिंहासन अभिमानी है

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  7. सारी उम्र किया इन्तजार अब टूटे दिल को सीने दो
    कुछ समय बचा है जीने को अपने साए में जीने दो!
    सुंदर रचना |

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  8. सारी उम्र किया इन्तजार अब टूटे दिल को सीने दो
    कुछ समय बचा है जीने को अपने साए में जीने दो!

    लाजबाब अभिव्यक्ति !!

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  9. भावपूर्ण रचना अभिव्यक्ति .....सारी उम्र किया इन्तजार अब टूटे दिल को सीने दो
    कुछ समय बचा है जीने को अपने साए में जीने दो!

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  10. बरसों हो गए मेरी आँखों से तेरी खटक जाती ही नही,
    तिनका उड़ गिरता आँखों पर यादें आँसू बन बहने दो!
    बेहद सुन्दर नज्म ,मेरी तरफ से भी बधाई स्वीकार कीजिये।

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  11. खुल गए हैं जो पुराने कुछ जख्म , उन्हें वक्त को सीने दो .
    सुन्दर रचना .

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  12. वाह धीरेन्द्र सर वाह क्या बात है लाजवाब ग़ज़ल

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  13. बहुत सुन्दर पंक्तियाँ बहुत बहुत बधाई.........धीरेन्द्र भाई.....

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  14. ह्रदय वेदना की कोमलतम अभिव्यक्ति...

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  15. वाह वाह वाह क्या इल्तिजा है-
    बधाई धीर भाईसाहब ||

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  16. वाह.....
    बहुत सुन्दर....

    सादर
    अनु

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  17. बरसों हो गए मेरी आँखों से तेरी खटक जाती ही नही,
    what a lvly post
    hacking

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  18. बरसों हो गए मेरी आँखों से तेरी खटक जाती ही नही,
    तिनका उड़ गिरता आँखों पर यादें आँसू बन बहने दो!waah bahut sundar panktiyaan ..behtreen rachna

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  19. उम्मीद थी तेरे आने की लेकिन हासिल कुछ न हुआ,
    पैगाम जिंदगी ने दिया मौत का मेरे हाल में मरने दो!
    --
    बहुत उम्दा ग़ज़ल!

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  20. वाह बहुत खूब भावपूर्ण अभिव्यक्ति ....

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  21. बहुत सुंदर एवं भावप्रबल रचना ....

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  22. मन की टीस को बडी सुंदर अभिव्यक्ति दी है ! अति सुंदर !

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  23. बहुत सुन्दर कविता भदौरिया जी |आभार

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  24. सारी उम्र किया इन्तजार अब टूटे दिल को सीने दो
    कुछ समय बचा है जीने को अपने साए में जीने दो!

    लाजबाब अभिव्यक्ति !!

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  25. बेवफा कहे वो, मै बदनसीब अपने मुकद्दर को क्या कहूँ,
    अपनी बेवफाई, इल्जाम मुझ पर,बदनामी मेरी करने दो!

    ..........भावपूर्ण रचना अभिव्यक्ति !

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,