सोमवार, 29 अक्तूबर 2012

खता,,,

खता,

दिल की बात कहने के लिये हम इशारों से काम लेते है,
क्योंकि, तुम्हे अपना समझने की खता हम कर चुके है!

हमने तुम्हारे लिये सपने संजोये, उस बात का दुख नही,
क्योंकि, तुम्हे सपनों में जगह देने की खता कर चुके है!

ऐसा हो नही सकता कि तुम्हारे बिना जी नहीं सकेगें हम,
क्योंकि,शादी और से करने की पहले ही खता कर चुके है!

फिरभी, तुम्हे कुछपल चुराकर जिन्दगी के दे सकता हूँ,
क्योंकि ,पूरा जीवन ही किसी और के नाम कर चुके है!

इशारों में समझाने की कोशिश भर कर सकता है दिल,
क्योंकि,तुम्हे अपना समझने की हम खता कर चुके है!

dheerendra bhadauriya,

53 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया धीर भाई साहब -

    बधाईयाँ ।।

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    1. खता,,,
      खता,

      खता बता कर क्या करें, ख़त खतियाना ख़त्म ।

      खेल ख़तम पैसा हजम, यही पुरानी रश्म ।

      यही पुरानी रश्म, कुबूला जैसी हो तुम ।

      शायद भूला रूल, सीध होती नहिं यह दुम ।

      तेरे द्वारे आय, भौंकता रविकर प्यारी ।

      गरज गरज ठुकराय, रही क्यूँ गरज हमारी ।

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    2. waah kya baat hai ..ham to bas pyar karne ki khata kar chuke hai , sundar rachna

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  2. श्रीमान धीरेन्‍द्र जी बहुत ही दिल को छूने वाली रचना है लगता है साक्षात सामना हुआ लगता है आपको तभी तो इतनी मार्मीक रचना बनती है
    दीपावली पर ब्लाग के लिये वालपेपर

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  3. दिल में कोई जीवन में कोई
    बहुत बड़ी खता हो गयी है..
    भावनाओ की कोमल अभिव्यक्ति..

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  4. अच्छी खता की है हुज़ूर ने -

    दिल की बात कहने के लिये हम इशारों से काम लेते हैं ,
    क्योंकि, तुम्हें अपना समझने की खता हम कर चुके हैं !

    हमने तुम्हारे लिये सपने संजोये, उस बात का दुख नहीं ,
    क्योंकि, तुम्हें सपनों में जगह देने की खता कर चुके हैं !

    ऐसा हो नही सकता कि तुम्हारे बिना जी नहीं सकेगें हम,
    क्योंकि,शादी और से करने की पहले ही खता कर चुके हैं !

    फिरभी, तुम्हें कुछपल चुराकर जिन्दगी के दे सकता हूँ,
    क्योंकि ,पूरा जीवन ही किसी और के नाम कर चुके हैं !

    इशारों में समझाने की कोशिश भर कर सकता है दिल,
    क्योंकि,तुम्हे अपना समझने की हम खता कर चुके हैं

    बढ़िया रचना है भदौरिया साहब (मूल रचना से मिलाके देखें :""हैं "और "है" तथा तुम्हें ,नहीं का फर्क देखें ,आभार )

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  5. मन के भावों की सुन्दर प्रस्तुति |
    आशा

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  6. हमने तुम्हारे लिये सपने संजोये, उस बात का दुख नही,
    क्योंकि, तुम्हे सपनों में जगह देने की खता कर चुके है!...बहुत बढ़िया

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  7. बहुत बढ़िया ..
    कुछ साहसी जज़्बात...
    :-)

    सादर
    अनु

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  8. सारी खताएं अच्छी हैं
    सारी व्यथाएं सच्ची हैं।

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  9. इशारों में समझाने की कोशिश भर कर सकता है दिल,
    क्योंकि,तुम्हे अपना समझने की हम खता कर चुके है!

    ...बहुत खूब!

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  10. मन के भावों की सुन्दर प्रस्तुति |

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  11. फिरभी, तुम्हे कुछपल चुराकर जिन्दगी के दे सकता हूँ,
    क्योंकि ,पूरा जीवन ही किसी और के नाम कर चुके है!

    सुन्दर .......धीरेन्द्र भाई ...बहुत से मोड़ से ये जिन्दगी गुजरती है और खताएं नए नए रंग दिखाती हैं ,,,,,
    भ्रमर ५
    भ्रमर का दर्द और दर्पण

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  12. आपकी उम्दा पोस्ट बुधवार (31-10-12) को चर्चा मंच पर | जरूर पधारें | सूचनार्थ |

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  13. फिरभी, तुम्हे कुछपल चुराकर जिन्दगी के दे सकता हूँ,
    क्योंकि ,पूरा जीवन ही किसी और के नाम कर चुके है......bahut khoob...

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  14. खता तो हो चुकी है बस प्रायश्चित ही शेष है....कर लेंगे तो कुछ दर्द कम ही होगा ........सुन्दर सामंजस्य .....

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  15. dil hi kuchh aisa hai pata nahi kab kisi ko apna samjhe...

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  16. खुबसूरत गुनाह या फिर खुबसूरत प्रस्तुति............
    आभार.......

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  17. बहुत समय बाद याद आती है ,तभी ऐसी रचना बन पाती है.
    बेकरारियां बन के आ जाती हैं यूँ ही बार बार.
    जब याद किसी की आती है दिन में हजार बार.

    मोहब्बत नामा
    मास्टर्स टेक टिप्स
    इंडियन ब्लोगर्स वर्ल्ड

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  18. फिरभी, तुम्हे कुछपल चुराकर जिन्दगी के दे सकता हूँ,
    क्योंकि ,पूरा जीवन ही किसी और के नाम कर चुके है!
    बहुत सुंदर ।

    क्या बात है कि यादें मिटती नही है उनकी
    उनको दिल में बिठाने की खता जो कर चुके हैं ।

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  19. बहुत सुन्दर रचना ... शुभकामनाएं

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  20. शानदार प्रस्तुती

    बधाई स्वीकार करें.

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  21. फिरभी, तुम्हे कुछपल चुराकर जिन्दगी के दे सकता हूँ,
    क्योंकि ,पूरा जीवन ही किसी और के नाम कर चुके है!

    ख़ता पर ,जिससे शादी हुई ,खफ़ा ना हो ,ख़ुदा माफ करे !
    रचना बहुत सुन्दर , अभिव्यक्ति ला जबाब है !!

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  22. सुन्दर भावों को बखूबी शब्द जिस खूबसूरती से तराशा है। काबिले तारीफ है।
    आज आपके ब्लॉग पर बहुत दिनों बाद आना हुआ अल्प कालीन व्यस्तता के चलते मैं चाह कर भी आपकी रचनाएँ नहीं पढ़ पाया. व्यस्तता अभी बनी हुई है लेकिन मात्रा कम हो गयी है.....:-)

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  23. एक लिफाफा दो-दो खत
    खता समझ लो या किस्मत |
    एक तरफ है नील गगन
    एक तरफ सपनों की छत |
    एक तरफ दुनियादारी
    एक तरफ दिल की चाहत |
    आम चुराना बागों से
    बचपन की सी है आदत |

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  24. उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  25. ताउम्र अपनाने की कोशिश करते रहे ,
    और वो हैं कि दिल को दिल समझते नहीं !

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  26. बहुत सुन्दर भावप्रणव रचना।
    अगर ग़ज़ल है तो मतला भी होना चाहिए इसमें!

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  27. वाह सर वाह क्या बात है मेरी दिली दाद कुबूल कीजिये।

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  28. कलात्मक प्रस्तुति...आभार !

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  29. फिरभी, तुम्हे कुछपल चुराकर जिन्दगी के दे सकता हूँ,
    क्योंकि ,पूरा जीवन ही किसी और के नाम कर चुके है!
    भाई साहब, भाभी जी ने ये शेर पढ़ा है या नहीं ... कुछ पल भी देने में उन्हें आपत्ति हो सकती है। बाकी सब ठीक है लिखते रहिए, मेरी शुभकामनाएँ

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  30. वाह बहुत खूबसूरत है खता आपकी बहुत सुन्दर रचना |

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  31. फिरभी, तुम्हे कुछपल चुराकर जिन्दगी के दे सकता हूँ,
    क्योंकि ,पूरा जीवन ही किसी और के नाम कर चुके है!
    बढ़िया.

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  32. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  33. मामला जटिल है। उम्र का फासला न होता तो कुछ सलाह हम भी देते।

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  34. रचना बहुत सुन्दर , अभिव्यक्ति ला जबाब है

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,