गुरुवार, 9 अगस्त 2012

पांच सौ के नोट में.....















पांच
सौ के नोट में.....


वाह गांधी
पहन कर खादी
क्या चली तुम्हारे नाम की आंधी
आजादी के सपने दिखा कर
असहयोग आंदोलन कराकर
सत्य और अहिंसा का पाठ पढाया
१५ अगस्त १९४७ को अंग्रेजो से
हिन्दुस्तान आजाद कराया
बापू-?
यहीं पर हो गयी चूक
आपसे हो गयी नादानी
बेकार गयी
लक्ष्मीबाई, भगतसिंह,जैसे
अमर शहीदों की कुर्बानी
देश तो आजाद हो गया ,पर हमने-
और हमारे देश ने क्या पाया-?
पाया सिर्फ-
आतंक, गरीबी, अत्याचार,
महगांई, नेता,भ्रष्टाचार
इनके बारे में,
आपके क्या है विचार
अपने तीन बंदरों की तरह
आँख,कान,मुह,बंद किये
क्यों बैठे हो-?
कुछ करते क्यों नहीं
कुछ बोलते क्यों नहीं
जरूर दाल में काला है,
लगता है परदे में-?
मुन्नाभाई से दोस्ती कर,
अपने आप को भ्रष्टाचार के
दलदल में फँसा डाला है!
इसीलिये आप मौन है
जिंदगी भर संघर्ष किया
एक लाठी और लंगोट में,
और आजकल,,,,
बैठे दिखाई पड रहे हो
पांच सौ के नोट में,,,,,

धीरेन्द्र भदौरिया,

59 टिप्‍पणियां:

  1. मुन्नाभाई से दोस्ती कर,
    अपने आप को भ्रस्टाचार (भ्रष्टाचार) के
    दलदल में फँसा डाला है!
    इसीलिये आप मौन है(हैं )
    जिंदगी भर संघर्स (संघर्ष )किया
    एक लाठी और लगोट (लंगोट )में,
    और आजकल,,,(,लंगोट है आपका समाज वादियों ,सेकुलर वीरों के पास )
    बैठे दिखाई पड रहे हो
    पांच सौ के नोट में,,,,(,इनमे भी कितने हैं असली कितने हैं नकली ,तुम्हें नहीं मालूम ..).भाई साहब सशक्त रचना है .बधाई .जन्म अष्टमी की .श्रेष्ठ रचना कर्म की .
    औरतों के लिए भी है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा प्रणाली
    औरतों के लिए भी है काइरोप्रेक्टिक चिकित्सा प्रणाली

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  2. bahut hi badiyaa aur saarthak rachanaa .bahut badhaai aapko.



    mere blog per aapka swagat hai jo chaar mahine baad phir se shooroo ho paayaa hai .kuch probelam aa gai thi ab main phir se aap sabke saath jud paoongi .thanks,

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  3. .बहुत सार्थक प्रस्तुति .श्री कृष्ण जन्माष्टमी की आपको बहुत बहुत शुभकामनायें . ऑनर किलिंग:सजा-ए-मौत की दरकार नहीं

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  4. जन्माष्टमी के अवसर पर स्वतंत्रता दिवस की रचना देखकर थोड़ा आश्चर्य हुआ.. लेकिन कविता प्रभावशाली है.. बधाई!!

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  5. हमने गाँधी और खादी दोनों का अपमान किया है !

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  6. ब्लॉग जगत के सभी मित्रों को कान्हा जी के जन्मदिवस की हार्दिक बधाइयां ..
    हम सभी के जीवन में कृष्ण जी का आशीर्वाद सदा रहे...
    जय श्री कृष्ण ..

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  7. एक व्यंगात्मक सशक्त प्रस्तुति पेश करने के लिए धन्यवाद !!

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  8. सटीक व्यंग्य!!
    देखो न संतोषी को ही धन-प्रतीक बना दिया है।
    जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

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  9. जबरदस्त -
    दिखा हमेशा ही यहाँ, लाठी और लंगोट में |
    आज शान से देखो बैठा, पाँच सौ की हर नोट में ||
    गजब भाई जी ||
    बधाई ||
    जय श्री कृष्ण ||

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  10. अब बापू के साथ औरों को भी बिठाने का विचार है।:)

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  11. क्या करें, जबरन जो सम्मान दे दिया गया।

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  12. बहुत ही बढ़िया

    जन्माष्टमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ!


    सादर

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  13. वास्‍तव मे उस समय देश परायो ने गुंलाग बनाया हुआ था पर क्‍या करे आज तो अपने ही अपनो को गुलाम बनाये हुये है

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  14. जबरदस्त
    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  15. सार्थक प्रस्तुति .श्री कृष्ण जन्माष्टमी की आपको बहुत बहुत शुभकामनायें

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  16. kabhi humare blog par bhi aaye dheerender ji
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

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  17. बहुत बढ़िया!
    ।।♥।।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।।♥।।

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  18. बहुत खूब!बात पसंद आई।
    इसलिए आपको ढेरों बधाई।

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  19. वाह...
    बहुत बढ़िया,सशक्त रचना..
    जन्मअष्टमी की शुभकामनाएं
    अनु

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  20. कुछ बोलते क्यों नहीं
    जरूर दाल में काला है,
    लगता है परदे में-?
    मुन्नाभाई से दोस्ती कर,
    अपने आप को भ्रष्टाचार के
    दलदल में फँसा डाला है!

    हाँ धीरेन्द्र जी लगता तो ऐसा ही है ...अब तो काले में ही दाल है
    आभार
    भ्रमर 5

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  21. बहुत बढ़िया...... कहाँ चल पाए हम उनके दिखाए रास्तों पर .....

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  22. सशक्त सार्थक रचना.. जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

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  23. सटीक, सार्थक प्रस्तुति... श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत बहुत शुभकामनायें...

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  24. एक बात मै खास कर आपसे कहना चाहूँगा की आपका लिखा पढने का एक अलग ही मजा है.इसी लिए काव्यांजली की हर पोस्ट हमे खींचकर यहाँ ले आती है.




    मोहब्बत नामा
    मास्टर्स टेक टिप्स

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  25. बहुत अच्छी सटीक व्यंगात्मक प्रस्तुति गांधी जी से शिकायत का अंदाज बहुत भाया

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  26. बेहद सशक्त पोस्ट.... आक्रोश युक्त व्यंग्य की संदर प्रस्तुति!

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  27. बहुत बड़ा कटाक्ष है, जिसे महात्मा की उपाधि मिली उन्हें रुपये में मढ दिया गया. देश की आज़ादी का सपना क्या बापू ने ऐसा देखा था? काश, बापू तक आपकी शिकायत पहुँचती. बहुत अच्छी रचना, बधाई.

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  28. बेहद सार्थक रचना...
    करारा व्यंग्य

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  29. वाह बहुत खूब ...सत्यता पर आधारित

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  30. कड़वा यथार्थ
    सटीक और सार्थक

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  31. सार्थक अभिव्यक्ति..........व्यंग्य सटीक और सार्थक

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  32. जिंदगी भर संघर्ष किया
    एक लाठी और लंगोट में,
    और आजकल,,,,
    बैठे दिखाई पड रहे हो
    पांच सौ के नोट में,,,,,

    बहुत खूब !

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  33. काश गांधी जी ये सुन पाते !
    लेकिन आज उनकी गांधीगीरी चल पाती क्या ( ऐसे भ्रष्ट नेताओं के सामने) ?
    सुंदर, सार्थक सटीक व्यंग्य !

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  34. सशक्त अभिव्यक्ति......काश गांधी जी ये सुन पाते !

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  35. आज 14/08/2012 को आपकी यह पोस्ट (विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति मे ) http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर पर लिंक की गयी हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .धन्यवाद!

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  36. हिन्दुस्तान आजाद कराया
    बापू-?
    यहीं पर हो गयी चूक.

    बहुत खूब धीरेन्द्र जी , आपकी रचनाओं में एक नया टेस्ट मिला. लाजवाब

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  37. 500 ही क्यों हज़ार के नोट में भी दिखाई पड़ रहे हो .... बहुत सशक्त रचना

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  38. bahut hi badiyaa aur saarthak rachanaa .......bahut badhaai aapko....

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  39. सशक्त,व्यंग्यात्मक रचना.
    आपको भी स्वतन्त्रता दिवस की अनेकानेक शुभकामनायें!

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  40. अपने तीन बंदरों की तरह
    आँख,कान,मुह,बंद किये
    क्यों बैठे हो-?
    कुछ करते क्यों नहीं
    कुछ बोलते क्यों नहीं........bolte to hain ,par note ke rup me hi, jiske paas jate hai aur samne wala chup...!!

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  41. बहुत ही बढ़िया । राही मासूम रजा की एक सुंदर कविता पढ़ने के लिए आपका मेरे पोस्ट पर आमंत्रण है ।

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,