रविवार, 24 जून 2012

आश्वासन,,,,,


आश्वासन,,

गाँव में मंत्री जी वर्षों बाद पधारे,
यह सुनकर गाँव वालो के हो गए वारे न्यारे,
दौड़ा-दौड़ा मै भी उनके पास आया
एक ही साँस में गाँव की सारी बात कह सुनाया!
सोचा था मंत्री जी करवा देगें सारे काम,
हमारे गाँव को देगें आदर्श ग्राम का नाम
पर क्या वे ढेर सारे कागज अपने साथ ले गए,
और हमे आश्वासनो का झूठा पुलिंदा दे गए
हमारे गाँव की समस्या आज भी वही है,
कहीं पानी नही,तो कहीं कीचड की दही है,
बिजली का तो दूर दूर तक नही है नाम
कोस कर नेता जी को चिमनी जलाते हर शाम,
गाँव वाले उनके आश्वासनों को धीरे-धीरे भूल रहे है
और चंदे के पैसों से पानी की समस्या हल कर रहे है,
पांच साल बाद आयेगे फिर यहीं-
देंगे लम्बा चौड़ा भाषण बात करेगें वही.
अब हमको उनकी बातों में नहीं आना है
दौडकर उनके पास जल्दी नही जाना है
गाँव के विकास को,
अपनी मेहनत के बल पर आगे बढाएगें.
ऐसे मंत्रियों के आश्वासनों को,
स्वप्न समझ कर भूल जायेगें-
अबकी चुनाव में उनको सबक सिखायेगें!

dheerendra,bhadauriya

53 टिप्‍पणियां:

  1. कहीं पानी नही,तो कहीं कीचड की दही है,
    कहीं पानी नही,तो कहीं कीचड की दही है,
    नेताओं की मेरे देश में करनी यही है .बढ़िया प्रस्तुति .

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  2. ...सबक सिखाने में अगर देर कर दी तो नेताजी फिर से मंत्री बन जायेंगे !

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  3. चुनाव आने तक भूल जायेंगे ।

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  4. आश्वासन देनेवालों से अधिक लेनेवालों की गलती है ...
    चुनाव आने तक देनेवाले मूर्खों को याद रखते हैं , मूर्ख ही भूल जाते हैं ...

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  5. सहज सरल मनोभावों की लरी , सुन्दर कहने का ढ़ंग .....
    आनंद आ गया ......

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  6. सबक सिखाने तक सिलसिला चलता ही रहेगा .

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  7. व्यंग्य के माध्यम से अपनी बात कहना भी कला है , बधाई

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  8. बहूत हि बढीया व्यंग रचना है..
    इस बार चुनाव में जरूर सबक सिखायेंगे...
    :-)

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  9. हर बार वही कहानी दोहराते हैं ,
    अगले चुनाव आने तक वोटर भी भूल जाते हैं .

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  10. स्वप्न समझ कर भूल जायेगें-
    अबकी चुनाव में उनको सबक सिखायेगें!

    यह चक्र इसी तरह ही चलता रहता परन्तु स्थिति यथावत. चिंतनशील रचना. बधाई धीरेन्द्र जी.

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  11. काश ये बात हर हिन्दुस्तानी की समझ मे आये।

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  12. हर बार,
    चमत्कार,
    पाँच वर्ष,
    इंतजार।

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  13. इधर कोरी धमकी,
    उधर कोरा आश्वासन .....

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  14. गाँव के विकास को,
    अपनी मेहनत के बल पर आगे बढाएगें.
    ऐसे मंत्रियों के आश्वासनों को,
    स्वप्न समझ कर भूल जायेगें-
    अबकी चुनाव में उनको सबक सिखायेगें!
    सुन्दर !

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  15. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  16. नेता द्वारा ...आश्वासन ही आश्वासन ...बहुत खूबसूरत कटाक्ष

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  17. क्या बात है!!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 25-06-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-921 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  18. क्या बात है!!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 25-06-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-921 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

    उत्तर देंहटाएं
  19. आश्वासन ही आश्वासन ... खूबसूरत कटाक्ष......

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  20. आश्वासन का जो शव निकाले मंत्री कहलाए .

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  21. गाँव का विकास मंत्रियों के भरोसे तो बिलकुल नहीं हो सकता .... सबक सीखा ही देना चाहिए

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  22. सबक तो यही लोग सिखाते आ रहे हैं... हम ही नहीं सीखते... फिर उन्हीं को सबक सिखाने का ठेका दे कर भेज देते हैं....

    सुंदर रचना सादर।

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  23. बहुत बढ़िया व्यङ्गात्म्क प्रस्तुति...आभार

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  24. सुन्दर और शानदार प्रस्तुति।

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  25. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  26. वाह ... बेहतरीन प्रस्‍तुति

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  27. नेताओं पर शानदार टिप्पणी :)

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  28. पर क्या वे ढेर सारे कागज अपने साथ ले गए,
    और हमे आश्वासनो का झूठा पुलिंदा दे गए
    हमारे गाँव की समस्या आज भी वही है,
    कहीं पानी नही,तो कहीं कीचड की दही है,
    बिजली का तो दूर दूर तक नही है नाम
    कोस कर नेता जी को चिमनी जलाते हर शाम,

    बेहतरीन प्रस्‍तुति, खूबसूरत कटाक्ष, बहुत बहुत बधाई |

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  29. .......बेहतरीन ....
    खूबसूरत कटाक्ष, बहुत बहुत बधाई |

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  30. अति सुन्दर कटाक्ष लिखा है.....

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  31. खूबसूरत कटाक्ष बेहतरीन प्रस्‍तुति !!!

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  32. स्मरण रहे की नेता जी द्वारा दिए गए आश्वाशन और किये गए वादे सभी काल्पनिक होते हैं जिनका आम जनता से कोई लेना-देना नहीं होता है......खूबसूरत कटाक्ष, बहुत बहुत बधाई |

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  33. एक दम सही चरित्र चित्रण किया है आपने.आज कल बिलकुल यही हाल है.


    मोहब्बत नामा
    मास्टर्स टेक टिप्स

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  34. बहुत सुन्दर और सटीक चित्रण.....

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  35. ठीक ही है -जब तक ख़ुद सबक नहीं सीखेंगे ,दूसरे को भला कैसे सिखायेंगे !

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  36. मनोभाव का सुंदर सम्प्रेषण , बहुत उम्दा अभिव्यक्ति!
    बेहतरीन रचना,,,,,,

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  37. ज़रा संभलकर हुज़ूर,आजकल क्रांति के सूत्रधारों की खैर नहीं.

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  38. बहुत ही सुन्दर रचना.. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  39. अब हमको उनकी बातों में नहीं आना है
    दौडकर उनके पास जल्दी नही जाना है
    गाँव के विकास को,
    अपनी मेहनत के बल पर आगे बढाएगें.
    ऐसे मंत्रियों के आश्वासनों को,
    स्वप्न समझ कर भूल जायेगें-
    अबकी चुनाव में उनको सबक सिखायेगें!

    काश ऐसा हो । हमारी स्मरण शक्ती कमजोर ना पडे ।

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