शुक्रवार, 11 मई 2012

आज मुझे गाने दो,...

आज मुझे गाने दो,

हृदय की पीड़ा को, प्रेम रस वीणा को,
प्रकट हो जाने दो, आज मुझे गाने दो!

नयनों के बादर से, भावों के सागर से,
बरस अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!

प्रीतम के प्रीत को, मेरे हर गीत को,
एक हो जाने दो, आज मुझे गाने दो!

जग के कुरीत को, बंधन की रीत को,
टूट अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!

सुरभित पवन को, पल्लिवत चमन को,
गीत गुनगुनाने दो ,आज मुझे गाने दो!

चाँद और चकोर को, वर्षा और मोर को,
मिल अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!

झील के किनारों से , मस्त नजारों से,
स्वर को लहराने दो, आज मुझे गाने दो!

बसंत सुगंत को, पुष्प और मकरंद को,
बिखर अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!

DHEERENDRA,"dheer"

57 टिप्‍पणियां:

  1. प्रीतम के प्रीत को, मेरे हर गीत को,
    एक हो जाने दो, आज मुझे गाने दो!
    तुम राधे बनो श्याम सी मीठी रागिनी है ये रचना .बधाई .
    कृपया यहाँ भी पधारें -http://veerubhai1947.blogspot.in/
    शरीर की कैद में छटपटाता मनो -भौतिक शरीर

    http://veerubhai1947.blogspot.in/
    कृपया यहाँ भी दस्तक देवें .शुक्रिया .


    बुधवार, 9 मई 2012
    http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/2012/05/blog-post_3409.हटमल


    जीवन में बड़ा मकसद रखना दिमाग में होने वाले कुछ ऐसे नुकसान दायक बदलावों को मुल्तवी रख सकता है जिनका अल्जाइमर्स से सम्बन्ध है .

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  2. बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति, भावों का बाँध तोड़ बहने को आतुर शब्द..

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  3. बहुत....ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति..

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  4. मस्त कोकिला सी मधुर, बही सरस स्वर-धार |
    साधुवाद हे कवि-हृदय, बार-बार आभार |

    बार-बार आभार, चाँद धरती पर आया |
    टूटे बंधन-रीत, प्यार से धीर मिलाया |

    रविकर पढ़कर मस्त, गीत क्या खूब रचाया |
    कोटि कोटि परनाम, माँ शारद की माया |

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    1. कोटि कोटि परनाम, शारदे माँ की माया |

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  5. खुशियाँ ही खुशियाँ हो ... मन मयूर गीतों पर नाच उठे

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  6. बहुत सुन्दर प्राकृतिक उपालाम्भों से युक्त

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  7. हृदय की पीड़ा को, प्रेम रस वीणा को,
    प्रकट हो जाने दो, आज मुझे गाने दो
    बसंत सुगंत को, पुष्प और मकरंद को,
    बिखर अब जाने दो, आज मुझे गाने दो
    ह्रदय के उदगार ,अति सुन्दर ..... !!

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  8. चाँद और चकोर को, वर्षा और मोर को,
    मिल अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!

    बहुत मधुर गीत है...

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  9. नयनों के बादर से, भावों के सागर से,
    बरस अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!

    सुंदर भाव संयोजन ... सुंदर गीत

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  10. बहुत सुंदर धीरेंद्र जी
    क्या कहने

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  11. बहुत सुंदर...............

    गाइए...जी भर के गाइए.......
    झूमते गाइए....

    सादर.

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  12. हृदय की पीड़ा को, प्रेम रस वीणा को,
    प्रकट हो जाने दो, आज मुझे गाने दो!
    har pankti sundar lagi .......

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  13. बेहद खूबसूरत लय के साथ ..सुन्दर शब्दों की अभिव्यक्ति ....

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  14. झील के किनारों से , मस्त नजारों से,
    स्वर को लहराने दो, आज मुझे गाने दो !

    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ...
    --------------------------
     ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो

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  15. गाइए और खूब गाइए ....जब तक मन पुलकित न हो जाये !
    शुभकामनाएँ!

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  16. हृदय की पीड़ा को, प्रेम रस वीणा को,
    प्रकट हो जाने दो, आज मुझे गाने दो!

    नयनों के बादर से, भावों के सागर से,
    बरस अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!....aaj to aapke sath mera bhee man gaane ko kar raha haia..bahut hee acchi ghazal..sadar badhayee ke sath

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  17. हृदय की पीड़ा को, प्रेम रस वीणा को,
    प्रकट हो जाने दो, आज मुझे गाने दो!.......बहुत सुन्दर......यूँ ही गाते रहिए....धीरेन्द्र जी

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  18. बसंत सुगंत को, पुष्प और मकरंद को,
    बिखर अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!

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  19. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!
    --
    डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक"
    टनकपुर रोड, खटीमा,
    ऊधमसिंहनगर, उत्तराखंड, भारत - 262308.
    Phone/Fax: 05943-250207,
    Mobiles: 09456383898, 09808136060,
    09368499921, 09997996437, 07417619828
    Website - http://uchcharan.blogspot.com/

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  20. सुंदर अति सुंदर रचना ,......

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  21. बहुत बेहतरीन व प्रभावपूर्ण रचना....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  22. लेखनी से जब गिरें.....झर स्वर्ग के मोती... सी पंक्तियाँ
    आभार इन खूबसूरत पंक्तियों के लिये

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  23. प्रीतम के प्रीत को, मेरे हर गीत को,
    एक हो जाने दो, आज मुझे गाने दो!
    अतिसुन्दर , बहुत ही अच्छी प्रस्तुती .

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  24. जग के कुरीत को, बंधन की रीत को,
    टूट अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!
    बहुत खूब

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  25. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  26. एक बार फिर कमल की लेखनी

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  27. बसंत सुगंत को, पुष्प और मकरंद को,
    बिखर अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!
    मनमोहक अभिव्यक्ति ....

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  28. ह्रदय वीणा पर, मीठे सुर लहराने दो
    मुझे मत रोको , मुझे गाने दो.....!
    अति सुन्दर रचना... आभार

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  29. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ....
    शब्द शब्द भाव से भरा ...
    अद्भुत ....!!
    शुभकामनायें ...!!

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  30. गाया मेरे मीत ने , ऐसा सुंदर गीत
    दसों दिशाओं गूँजता,जीवन का संगीत
    जीवन का संगीत, झूमते ताल तलैया
    नन्हें नन्हें सुख,करत हैं ता ता थैया
    अटकन मटकन दही ,चटाकन को मन भाया
    ऐसा सुंदर गीत, मीत ने मेरे गाया.

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  31. बढ़िया प्रस्तुति! आपकी कविता में भाव की बहुलता इसे पठनीय बना देती है । मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । धन्यवाद ।

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  32. प्रीतम के प्रीत को, मेरे हर गीत को,
    एक हो जाने दो, आज मुझे गाने दो!
    अहाहा सहज, सरल और सुंदर गेय गीत, जिसे गाने में मज़ा आया।

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  33. बहुत सुन्दर भावपूर्ण और लयबद्ध रचना |बहुत अच्छी लगी |
    आशा

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  34. जग के कुरीत को, बंधन की रीत को,
    टूट अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!


    बहुत सुंदर गीत. बेहतरीन प्रस्तुति.

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  35. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति..

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  36. बेहतरीन प्रस्तुति.
    आपकी रचना जितनी बार पढिए, लगता है पहली बार पढ रहा हूं।

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  37. हृदय की पीड़ा को, प्रेम रस वीणा को,
    प्रकट हो जाने दो, आज मुझे गाने दो!
    जग के कुरीत को, बंधन की रीत को,
    टूट अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!
    आदरणीय धीरेन्द्र जी बहुत सुन्दर भाव ..कोमल रचना मन गुनगुना उठा ..जय श्री राधे
    भ्रमर ५.
    पल्लवित बना दे एक शब्द ...

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  38. वाह! क्या बात है...
    झूम झूम जाने दो,
    झूम झूम गाने दो।

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  39. - सारी द्विधाओँ से मुक्त हो जाने दो ,
    गाने दो !

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  40. गाइये धीर साहब जी भर गाइये! इतने सुंदर भाव लिए सारी सृष्टि महकाइये !
    सुंदर प्रस्तुति !

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  41. प्रीतम के प्रीत को, मेरे हर गीत को,
    एक हो जाने दो, आज मुझे गाने दो!

    सुंदर गीत, सुंदर भाव।

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  42. उत्तर
    1. हृदय की पीड़ा को, प्रेम रस वीणा को,
      प्रकट हो जाने दो, आज मुझे गाने दो!

      नयनों के बादर से, भावों के सागर से,
      बरस अब जाने दो, आज मुझे गाने दो!
      par kya isn geeton ki pida koi samajhta bhi hai

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  43. मधुर गीत .....व्याकरण की त्रुटिय़ाँ अखरती हैं । कृपया पल्लिवत को पल्लवित कर दें ।

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  44. कोमल भावों का मधुर संगीत लिए गाती गुनगुनाती, प्यारी सी रचना!

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,