मंगलवार, 27 मार्च 2012

तुम्हारा चेहरा.....

तुम्हारा चेहरा

चाँद से भी खूबसूरत है तुम्हारा चेहरा
हमने सौ बार निगाहों में उतारा चेहरा,

सबकी नजरों से महफिल में बचाकर नजरें
चुपके-चुपके से हर नजर ने निहारा चेहरा,

देखकर आपको कुछ वो भी तो हैरान होगा
आपने आईने में जिस वक्त संवारा चेहरा,

तेरे चेहरे के सिवा कुछ भी "धीर" को याद नही
मेरी नजरो को नहीं दूजा गवारा चेहरा,

फिर किसी शख्स को देखने की तमन्ना न होगी
इक नजर देख लिया जिसने तुम्हारा चेहरा,

DHEERENDRA,”dheer”

मंगलवार, 20 मार्च 2012

अभिनन्दन पत्र............ ५० वीं पोस्ट.



अभिनन्दन पत्र...

अंगरखा और पगड़ियों के दिन गए,
राजा-रानी बेगम नबाबो के दिन लद गए !
मंत्री जी आप बन गए अन्नदाता,
और हम रह गए मतदाता!
आपके संसद सदस्य बन जाने पर,
अपनी जीत की शराब का खुमार आने पर,
आप हमे भूल जाते है,
मंत्री पद की कुर्सी पर झूल जाते है!
आप बनते है हमदम और हम गैर,
रामराज्य में यह कैसा अंधेर?
आपको मोटर कार,बंगले,वेतन और भत्ते,
हमे कर,बेघर बेरोजगारी,सूखे पत्ते?
आप तो नाटक के सजीव पात्र है,
इसलिये मेज चप्पल,जूता सब कुछ चलाते है,
हम पर इसके लिए फौजदारी चलाते है?
आपके भाषणों में घोषणाओ,आश्वासन के
अलावा कुछ नही होता,
आपके यहाँ स्वर्ण सेज पर सोता है पोता!
आप ऊपर से समाजवादी, अंदर से हैदराबादी,
आपके घर दस बच्चे, हम से कहते 'कम करो आबादी!'
आप करते है उद्दघाटन समारोह,
और हमारा समापन कराते है|
आप तो सचमुच विशाल है,
भारत के भाल हैं, हिरोइन के गाल है,
होली का गुलाल है|
आप मंत्री है, भूत और भविष्य की जंत्री है|
आपके 'रामराज्य' में भूखे मरते यंत्री है!
आप तालिया बजवाते है, गालिया सुनवाते है,
भष्टाचार बढाने के नुस्खे आपको आते है,'
कुर्सी-छोडो' देश बचाओ,
आपकी क्या गायें,गीत-गजल-आरती,
देखो "धीर" देश रो रहा रो रही माँ भारती....

DHEERENDRA,"dheer"


मंगलवार, 13 मार्च 2012

तब मधुशाला हम जाते है,...

तब मधुशाला हम जाते है,...
जब गम के बादल छाते है, तब मधुशाला हम जाते है,
जब गम का कोई इलाज नही, तब थोड़ी सी पी जाते है!

रुक,रुक, थम,थम, सब कहते है,पी इसे भूल गम जाते है,
जब गम के बादल छाते है,तब मधुशाला हम जाते है!

तू गम की दवा की पुडिया है,पीने में भी तू बढ़िया है,
मत पी,मत पी,सब कहते है, हम यार इसे पी जाते है!

तेरे जाने कितने अपवाद पड़े, पी कर बेसुध हो जाते है,
पी लेता जो फिर ख़्वाब बढे,तब मधुशाला हम जाते है!

पतझड में जैसे कली खिली, पीकर ऐसा दिखता है,
गर्मी की लपटे सर्द हवा, इसको पीकर ही लगता है!

घनघोर घटा में सुर्ख धुंआ,आँसू बन कर आ जाते है,
जब गम के बादल छाते है,तब मधुशाला हम जाते है!

जब झील रेत हो जाती है, सैसव भी बूढा सा लगता है.
तब गम के बादल छाते है,सब अन्धकार सा दिखता है!

मुझको मेरी बोतल देदे, पीने दे मुझे बहकने तक साकी.
बेहोश हो जाऊ तो रख देना,बच जाए बोतल में जो बाकी!

तेरे कारण ही बोतल की और, प्याले की इज्जत होती है,
तेरे कारण ही महफिलों की, इज्जत बढती और खोती है!

कुछ हँसते कुछ गुस्साते है, पी तुझे होश में आते है,
जब् गम के बादल छाते है,तब मधुशाला हम जाते है!

जब मस्तिक में चढ़ जाती है,कितनी मस्ती करवाती है,
मस्ती जब हद से बढ़ जाती,तो कभी कभी पिटवाती है!

सावन भी जब बैशाख लगे, बारिष न जब "धीर" धरे,
जब शीत लहर गरमाते है, तब मधुशाला हम
जाते है!
--DHEERENDRA,"dheer"--

शनिवार, 10 मार्च 2012

बसंती रंग छा गया,...


Orkut Myspace Thinking of You Graphics and Comments
बसंती रंग छा गया,...

प्रकृति पालकी पर चढकर,देखो ये मधुमास आ गया!
विदा हुआ हेमंत आज पर सबमें बसंती रंग छा गया!!

आज हुई साकार कल्पना, सारी धरती कुञ्ज बन गई!
विधु बैनी के पीत वसन पर,अम्बर की द्रष्टि थम गई!!

मलय पवन ने विजन डुलाया, तरुओं की तंद्रा टूटी!
भौरें गुंजन गान कर उठे, फूलों की लज्जा छूटी!!

ढलने लगे पात वृक्षों से,जैसे नभ से तारे टूटे!
मित्र सभी झर गए पुराने,नए सभी खुशियाँ मिल लूटें!!

अमुओं के सिर मौर बाँधकर,महक व्याह लाइ अमराई!
कोयल की खुल गई समाधि,खग दल की बारात बौराई!!

सरसों की पीली साड़ी संग,हरी किनारी लगी नाचने!
खेत बन गए आज नव-वधु,पहिन लिए धरती ने गहने!!

किलकारी भर हरी डालियाँ, कण-कण में आई तरुणाई!
सांझ दान में लेकर जाती,फूलों के तन की अरुणाई!!

रात माधवी श्वेत चाँदनी, धरती का श्रंगार चूमती!
भोर सूर्य की किरने आकर,कमल वृक्ष पर नित्य झूमती!!

नर-नारी पशु पाखी सब की,गली-गली गलहार बन गई!
धरती की छाती अनंग के, मादक का संसार बन गई!!

सहरन व्यापी अंग-अंग ली,किंसुक कुसुमो ने ले अंगडाई!
लाल देह ऐसी सुलगी ज्यों, जले अनल न बुझे बुझाई!!

गंगा तट चरणों को छूने, लहरों ने भी होड लगाई!
कालिंदी के नील सलिल के,आज कृष्ण की याद सताई!!

खुशी हँसी जब सिरहाने तो, पीड़ा का संसार भा गया!
बैठा रहा विरह द्वारे पर,मिलन खुशी के गीत गा रहा!!

प्रकृति पालकी पर चढकर,देखो"धीर"मधुमास आ गया!
विदा हुआ हेमंत आज पर, सबमें बसंती रंग छा गया!!

--DHEERENDRA,"dheer"--


मंगलवार, 6 मार्च 2012

रंग रंगीली होली आई,...


Friends18.com Orkut Scraps

रंग रंगीली होली आई..

रंग रंगीली होली आई मस्तानों के दिल में छाई

जब माह फागुन का आता हर घर में खुशियाली लाता

नया काम व्यवसाय बढाता सबके मन में जोश जगाता

गली गली में धूम मचाई रंग रंगीली होली आई,


लाल पलास खिले कुंजन में भंवरें घूम रहे मधुबन में

पायल बाजे जब पैरों में हूक उठे गोरी के मन में

फागुन ने ये आग लगाई रंग रंगीली होली आई,


आमों में जब बौरें छाई कोयल गीत सुनाने आई

उपवन महक उठा खुशबू से भौरों ने तब तान सुनाई

बहने लगी पवन पुरवाई रंग रंगीली होली आई,


कोई रंग कोई पिचकारी साली को है आफत भारी

कोई पकड़े कोई घसीटे रंग में लथपथ भौजी प्यारी

होती आपस में गले मिलाई रंग रंगीली होली आई,


कोई भंग कोई दारू सोटें बीच सड़क में जीजा लोटे

जब गाना बजता मुन्नी वाला करे निछावर सौ की नोटें

"धीर"ने महफ़िल क्या खूब जमाई रंग रंगीली होली आई,

DHEERENDRA,"dheer"

शनिवार, 3 मार्च 2012

फिर से आई होली,...



holi animated scraps, graphics


फिर
से आई होली,


रस बरसाते रंगों के संग, फिर से आई होली,
फागुन का उपहार निराला लेकर भर लो झोली!

मौज मनाए मिलजुल कर आओ खेल रचाए,
लें गुलाल लें रंग फाग का सबसे प्रेम बढाए!

चारों ओर लगा है मेला मौसम बना रंसीला,
स्नेह रंग की ऋतू आई कर लो तनमन गीला!

पिचकारी का रंग उड़ाएं हंस कर करे ठिठोली,
ऊँची नीच का भेद भुलाऐ बन जाऐ हमजोली!


होली है,

हँसो हँसाओ मौज मनाओ रंग उड़ाओ होली है,
एक दूजे से प्रेम बढाओ सब मिल गाओ होली है!

घर आँगन रंगों का मेला रंग रगीला होली है,
मौसम प्यारा बना छबीला है अलबेला होली है

चंग बजा मस्तो की टोली घर-घर आई होली है,
झूम रहे है सब खुशियों में मस्ती छाई होली है!

हिंदू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई स्नेह बढ़ाओ होली है,
मिलजुल कर "धीर" धरो त्यौहार मनाओ होली है!

DHEERENDRA,"dheer"....