शनिवार, 10 मार्च 2012

बसंती रंग छा गया,...


Orkut Myspace Thinking of You Graphics and Comments
बसंती रंग छा गया,...

प्रकृति पालकी पर चढकर,देखो ये मधुमास आ गया!
विदा हुआ हेमंत आज पर सबमें बसंती रंग छा गया!!

आज हुई साकार कल्पना, सारी धरती कुञ्ज बन गई!
विधु बैनी के पीत वसन पर,अम्बर की द्रष्टि थम गई!!

मलय पवन ने विजन डुलाया, तरुओं की तंद्रा टूटी!
भौरें गुंजन गान कर उठे, फूलों की लज्जा छूटी!!

ढलने लगे पात वृक्षों से,जैसे नभ से तारे टूटे!
मित्र सभी झर गए पुराने,नए सभी खुशियाँ मिल लूटें!!

अमुओं के सिर मौर बाँधकर,महक व्याह लाइ अमराई!
कोयल की खुल गई समाधि,खग दल की बारात बौराई!!

सरसों की पीली साड़ी संग,हरी किनारी लगी नाचने!
खेत बन गए आज नव-वधु,पहिन लिए धरती ने गहने!!

किलकारी भर हरी डालियाँ, कण-कण में आई तरुणाई!
सांझ दान में लेकर जाती,फूलों के तन की अरुणाई!!

रात माधवी श्वेत चाँदनी, धरती का श्रंगार चूमती!
भोर सूर्य की किरने आकर,कमल वृक्ष पर नित्य झूमती!!

नर-नारी पशु पाखी सब की,गली-गली गलहार बन गई!
धरती की छाती अनंग के, मादक का संसार बन गई!!

सहरन व्यापी अंग-अंग ली,किंसुक कुसुमो ने ले अंगडाई!
लाल देह ऐसी सुलगी ज्यों, जले अनल न बुझे बुझाई!!

गंगा तट चरणों को छूने, लहरों ने भी होड लगाई!
कालिंदी के नील सलिल के,आज कृष्ण की याद सताई!!

खुशी हँसी जब सिरहाने तो, पीड़ा का संसार भा गया!
बैठा रहा विरह द्वारे पर,मिलन खुशी के गीत गा रहा!!

प्रकृति पालकी पर चढकर,देखो"धीर"मधुमास आ गया!
विदा हुआ हेमंत आज पर, सबमें बसंती रंग छा गया!!

--DHEERENDRA,"dheer"--


50 टिप्‍पणियां:

  1. ढलने लगे पात वृक्षों से,जैसे नभ से तारे टूटे!
    मित्र सभी झर गए पुराने,नए सभी खुशियाँ मिल लूटें!!
    सुन्दर पोस्ट प्रकृति के परिवर्तन चक्र को साकार करती .

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  2. वाह! बहुत ही सुन्दर रचना आदरणीय धीरेन्द्र सर,
    होली की सादर बधाईयाँ...

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  3. मलय पवन ने विजन डुलाया, तरुओं की तंद्रा टूटी!
    भौरें गुंजन गान कर उठे, फूलों की लज्जा छूटी!! ... प्राकृतिक अभिव्यक्ति

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  4. मलय पवन ने विजन डुलाया, तरुओं की तंद्रा टूटी!
    भौरें गुंजन गान कर उठे, फूलों की लज्जा छूटी!!

    गंगा तट चरणों को छूने, लहरों ने भी होड लगाई!
    कालिंदी के नील सलिल के,आज कृष्ण की याद सताई!!
    adbhut chitran

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  5. व्यतिरेक से दूर सकरात्मक अभिव्यक्ति का प्रवाह सतत गतिमान सा है ....... शुभकामनायें जी /

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  6. अति सुन्दर........

    गंगा तट चरणों को छूने, लहरों ने भी होड लगाई!
    कालिंदी के नील सलिल के,आज कृष्ण की याद सताई!!

    सादर....

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  7. गंगा तट चरणों को छूने, लहरों ने भी होड लगाई!
    कालिंदी के नील सलिल के,आज कृष्ण की याद सताई!!
    sunder... manmohak kavya..//

    उत्तर देंहटाएं
  8. गंगा तट चरणों को छूने, लहरों ने भी होड लगाई!
    कालिंदी के नील सलिल के,आज कृष्ण की याद सताई!!
    sunder... manmohak kavya..//

    उत्तर देंहटाएं
  9. वाह ...बहुत सुन्दर छटा छा गयी शब्दों के मधुमास की
    अद्भुत है आभार

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  10. मधुमास पर दिलकश प्रस्तुति |
    आभार भाई ||

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    1. धरती के वस्त्र पीत, अम्बर की बढ़ी प्रीत

      भवरों की हुई जीत, फगुआ सुनाइये ।

      जीव-जंतु हैं अघात, नए- नए हरे पात

      देख खगों की बरात, फूल सा लजाइये ।

      चांदनी शीतल श्वेत, अग्नि भड़काय देत

      कृष्णा को करत भेंट, मधुमास आइये ।

      धीर जब अधीर हो, पीर ही तकदीर हो

      उनकी तसवीर को , दिल में बसाइए ।।

      दिनेश की टिप्पणी : आपका लिंक
      dineshkidillagi.blogspot.com

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  11. खुशी हँसी जब सिरहाने तो, पीड़ा का संसार भा गया!
    बैठा रहा विरह द्वारे पर,मिलन खुशी के गीत गा रहा!!
    दिल से निकले अद्धभुत उदगार.... !!

    उत्तर देंहटाएं
  12. मधुमास को बड़ी ही खूबसूरती से बयां किया है...
    सादर..!!

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  13. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  14. सरसों की पीली साड़ी संग,हरी किनारी लगी नाचने!
    खेत बन गए आज नव-वधु,पहिन लिए धरती ने गहने

    बहुत सुन्दर भावों में पिरोई गई रचना

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  15. सरसों की पीली साड़ी संग,हरी किनारी लगी नाचने!
    खेत बन गए आज नव-वधु,पहिन लिए धरती ने गहने

    बहुत सुन्दर भावों में पिरोई गई रचना

    भावाभिव्यक्ति

    उत्तर देंहटाएं
  16. ऋतुओं का आना जाना एक स्पष्ट प्रभाव के साथ होता है, उस तथ्य को सुन्दरता से दर्शाती कविता।

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  17. वाह! बसंत शब्दों में जीवंत हो उठा है!
    सादर!

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  18. इस रचना में प्रकृति, पुष्प, पवन , नौसम आदि ने ऐसा समां बांधा है कि मन इसमें रम सा गया है।

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  19. सरसों की पीली साड़ी संग,हरी किनारी लगी नाचने!
    क्या चित्र खींचे हैं बसंत के आपने ! पूरी रचना जैसे वासंती चित्रों का एक खूबसूरत अलबम बन गई है। मेरी बधाई ।

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  20. इन रंग-बिरंगी कविताओं ने मन को मुग्ध कर दिया।

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  21. प्रकृति अपने बदलाव के संकेत क्या खूब देती है ...
    खूबसूरत वासंती कविता !

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  22. ढलने लगे पात वृक्षों से,जैसे नभ से तारे टूटे!
    मित्र सभी झर गए पुराने,नए सभी खुशियाँ मिल लूटें ...

    प्राकृति के चक्र को बाखूबी पंक्तियों में उतारा है आपने ... सुन्दर रचना है बहुत ही ....

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  23. वाह सुन्दर शब्दों से रची बसंती रचना ...

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  24. गाफिल जी हैं व्यस्त, चलो चलें चर्चा करें,
    शुरू रात की गश्त, हस्त लगें शम-दस्यु कुछ ।

    आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति
    सोमवारीय चर्चा-मंच पर है |

    charchamanch.blogspot.com

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  25. रंग बसन्ती छा गया, मस्ताना मौसम आ गया!!

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  26. .



    आदरणीय धीरेन्द्र धीर जी
    नमस्कार !


    बहुत अच्छा लिखा है , बधाई !

    भाषा की क्लिष्टता नैसर्गिकता को अवरुद्ध करती प्रतीत होती है लेकिन …
    क्षमा करें, आपके भाषाज्ञान में ऐसी परिमार्जित शब्दावली हो , फिर भी व्याकरणगत और वर्तनीगत अशुद्धियां हों तो बात जमती नहीं ।


    बसंत रचना के लिए आपने मेरी यह पोस्ट देखी ही होगी

    प्यारो न्यारो ये बसंत है



    शुभकामनाओं सहित…
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  27. साहित्यिक भाषा में सुन्दर प्रस्तुति |
    आशा

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  28. मौसम बसंती .आप के सुंदर शब्दों में छा गया ......
    बधाई !

    उत्तर देंहटाएं
  29. प्रकृति पालकी पर चढकर,देखो ये मधुमास आ गया!
    विदा हुआ हेमंत आज पर सबमें बसंती रंग छा गया!!

    आज हुई साकार कल्पना, सारी धरती कुञ्ज बन गई!
    विधु बैनी के पीत वसन पर,अम्बर की द्रष्टि थम गई!!..............waah bahut hi sunder abhivyakti ...kisi ek line ko nahi puri rachna behatarin . aapki post par aana sarthak ho gaya .

    sunder shabdo li ladi , ....happy rangpanchmi .
    der se aane ke liye sorry . bahut dino baad aayi blog par .

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  30. behtarin prabah...sunder shabd chayan...manji hui parmarjit sahityik rachna..prakriti ke is shandaar tareeke se chitrit karti rachna ke liye sadar badhayee....holi kee shubhkamnayein aur amantran ke sath

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  31. प्रकृति पालकी पर चढकर,देखो ये मधुमास आ गया!
    विदा हुआ हेमंत आज पर सबमें बसंती रंग छा गया!!

    अनुपम भाव संयोजन लिए उत्‍कृष्‍ट अभिव्‍यक्ति ...

    आने में विलंब हुआ उसके लिए क्षमा चाहती हूं ...

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  32. आदरणीय धीरेन्द्र जी
    नमस्कार !
    मौसम के अनुसार सुन्दर रचना
    होली की सादर बधाईयाँ...
    जरूरी कार्यो के ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ,

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  33. अमुओं के सिर मौर बाँधकर,महक व्याह लाइ अमराई!
    कोयल की खुल गई समाधि,खग दल की बारात बौराई!!
    wah sir kya khoob prakritik chhata chitran kiya hai ....badhai sweekaren

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  34. देर से आने के लिए माफी चाहूंगी ...मौसम के अनुसार एक दम मौसमी कविता बहुत बढ़िया प्रस्तुति...

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  35. मलय पवन ने विजन डुलाया, तरुओं की तंद्रा टूटी!
    भौरें गुंजन गान कर उठे, फूलों की लज्जा छूटी!!
    प्रकृति का बहुत ही सुन्दर चित्रण !

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  36. shabd shabd madhur manmohak...
    सरसों की पीली साड़ी संग,हरी किनारी लगी नाचने!
    खेत बन गए आज नव-वधु,पहिन लिए धरती ने गहने!!
    sundar rachna ke liye badhai.

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  37. बहुत ही बेहतरीन रचना....

    मेरे ब्लॉग
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,