गुरुवार, 29 सितंबर 2011

9- नव का जलवा.......






















9- नव का जलवा.......

नवमासा, नवग्रह, नवद्वार, नवमी, नवरात्री, नवरस, नवखंड, नवरत्न, नवधातु, नवनिधि,और कितने नाम है जो 9- की महत्ता को दर्शाते है|


नवमासा- गर्भ का नवां महीना नवमासा, कहलाता है|

नवग्रह- सूर्य,चंद,मंगल,बुध,गुरु,शुक्र,शनि,राहु केतु, भारतीय ज्योतिष के नवग्रह है|

नवद्वार- दोआंख, दो कान, दो नाक, मुख, गुदा,लिंग,मिलकर नवद्वार कहलाते है|

नवमी- चन्द्रमास के दोनों पक्षों की नवीं तिथि को नवमी कहलाती है,'नौमी तिथि मधुमास ,

पुनीता,भगवानराम का जन्म भी नवमी तिथि को हुआ था|

नवरात्र -
नवरात्र में पूजनीय नौ कुमारियाँ है,जिनमे इन नौ देवियों की कल्पना की जाती है

कुमारिका, त्रिमूर्ति, कल्याणी, रोहणी, काली, चंडिका, शांभवी, दुर्गा, सुभद्रा,पुराण मत के

अनुसार नौ दुर्गाऐ नवरात्रि में पूजन होता है- शैलपुत्री, ब्रहाचारिणी, चंद्रघंटा ,कुष्मांडा, स्कन्दमाता,

कात्यायनी ,कालरात्री, महागौरी,और सिद्धिता|

नवरस- श्रींगार, करुण, हास्य, रौद्, वीर, भयानक, वीभत्स, अदभुत, शांत,- काव्य के अनुसार

ये नौ रस है|

नवखंड- भरत, इलावृक्ष, किंपुरुष, भद्र, केतुमाल, हरि, हिरण्य, रम्य, कुश,ये पृथ्वी के नवखंड है |

नवरत्न- हीरा, पन्ना, माणिक्य,मोती,गोमेद, लहसुनिया,पदमराग, मूंगा, नीलम,ये नौ रत्न ह|

नवधातु-सोना, चांदी, लोहा, सीसा, तांबा, रांगा, इस्पात, कांसा, कांतिलोहा, ये नवधातु है|

नवविष-
वत्सनाम, हारिद्रक, सक्त्क, प्रदीपन, सौराष्ट्क, कालकूट, हलाहल, ब्रहमपुत्र, श्रगडक,

विष समुन्द्र मंथन से निकला था|

नवनिधि- पद्र्म, महापदम, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील, वाच्य्र, कुवेर के खजाने की

नौ निधियां है|

dheerendra....

सदा याद आते रहेगें........























सदा याद आते रहेगे ......


आप सदा यूँ ही गुनगुनाती रहे
जीवन भर ऐसे ही मुस्कराती रहे
आपने बितादी 'अर्धसदी, गाते हुए
सारा जीवन आप इसी तरह गाती रहे

हम आपका जन्म दिन मनाते रहेगे
आप जियो हजारों साल हम गाते रहेंगे
जब भी सुनेगे लोग,ऐ मेरे वतन के लोगो,
लताजी,दुनिया में सदा याद आते रहेगे......


dheerendra...
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शनिवार, 17 सितंबर 2011

पी.एम्.पद के वास्ते.......

















पी.एम्.पद के वास्ते......




नरेन्द्र
मोदी

ठहराव के विरोधी
अपनी कमाई हुई विरासत से
सदभावना मिशन की सियासत से
सर्वधर्म सदभाव बनाने की कोशिश
आहिस्ते-आहिस्ते
उपवास के रास्ते
पी.एम्.पद के वास्ते
पार्टी में अपना कद बढाने का
दिल्ली की कुर्सी पाने का
एक नया दांव चल रहे है
अपने गुरु आडवानी जी के सामने
अपना मुह खोलने से बच रहे है......

dheerendra bhadauriya....

एक बूँद ओस की...........
















एक बूँद ओस की......


सुबह सुबह पत्तों पर दूर से,
कुछ चमकते देखा-?
ऐसे लगा जैसे
पत्तों में कोई मोती उगा,
कौतूहल बस पास गया
मुझे लगा शायद ये पत्तों के आँसू है
समझ के मेरी बातों को
वो मुझसे कुछ कहने लगी,
तम्हे भ्रम हुआ है
न मै आँसू हूँ, न मै मोती
प्रकृति द्वारा बनाई गयी
मै तो एक बूँद ओस की,
आसमान से चलकर
आज ही जमी पर उतरी हूँ
कुछ पल मुझको जीना है-
कुछ पल में मिट जाऊगी,
लेकिन कुछ पल के लिए ही सही
अपनी पहचान दे जाऊगी,
मै एक छोटी सी बूंद हूँ
पर मेरा अपना असित्व है
तुम एक इंसान हो-
तुम्हारा जीवन में क्या महत्व है........


धीरेन्द्र भदौरिया.....


गुरुवार, 8 सितंबर 2011

किराया






















किराया
.......


माता
बोली पुत्र से,होकर के गम्भीर
बड़ा किया क्या इसलिए,सही पेट की पीर
सही पेट की पीर,नौ माह पेट में रक्खा
मौका आया तो हमे,दे रहे हो धोखा

माँ के शब्द सुन, पुत्र रह गया दंग
गुस्साकर माँ से बोला, नहीं रहना है संग
नहीं रहना संग ,अपना किराया बोलो
नौ माह का क्या,किराया एक साल का लेलो ....


dheerendra........