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बुधवार, 26 सितंबर 2012

गीत,,,

गीत,

तुम न्यारी तुम प्यारी सजनी
लगती हो पर- लोक की रानी
नख से शिख तक तुम जादू
फूलों सी लगती तेरी जवानी,

केशों में सजता है गजरा
नैनों में इठलाता है कजरा
खोले केश सुरभि है बिखरे
झुके नैन रच जाए कहानी,

माथे पर सौभाग्य की बिंदिया
जिसके गिरफ्त में मेरी निदिया
पहने कानों में चन्दा से कुंडल
और तन पर भाये चूनर धानी,

कर कमलों में कंगना सजते
पैरों में बिछिया नूपुर बजते
संगीत तेरे आभूषणों का सुन
बलखाये कमर चाल मस्तानी,

निकले होठोंसे हँसीं का झरना
यौवन पुष्पों का उठना गिरना
देखकर तेरी मदमस्त अदाये
गढ़ जाए न कोई नई कहानी,


dheerendra bhadauriya,,,,,