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सोमवार, 6 मई 2013

नूतनता और उर्वरा,

नूतनता और उर्वरा,

 बेटी    बोली   पेड़   से , कैसे    हो   तुम   भाई , 
प्रभु  ने  हम  दोनों  की , किस्मत  एक  बनाई !

दुनिया  में  हम  दोनों  को , ज़िंदा  मारा  जाता ,
 मुझे  गर्भ  के भीतर ,तुमको बाहर  काटा जाता  !

बेटी  की  ये बात  सुन , पेड़ ने किया आत्मसात ,
मिल कर  के किया फैसला , समझाई जाऐ बात !

हमको मत काटो मारो,दिया
इंसानों को मश्वरा ,
हम  दोनों  है  पृथ्वी  की,"नूतनता" और "उर्वरा !


धीरेन्द्र सिंह भदौरिया,