नूतनता और उर्वरा,
बेटी बोली पेड़ से , कैसे हो तुम भाई ,
बेटी बोली पेड़ से , कैसे हो तुम भाई ,
प्रभु ने हम दोनों की , किस्मत एक बनाई !
दुनिया में हम दोनों को , ज़िंदा मारा जाता ,
मुझे गर्भ के भीतर ,तुमको बाहर काटा जाता !
बेटी की ये बात सुन , पेड़ ने किया आत्मसात ,
मिल कर के किया फैसला , समझाई जाऐ बात !
हमको मत काटो मारो,दिया इंसानों को मश्वरा ,
हम दोनों है पृथ्वी की,"नूतनता" और "उर्वरा !
धीरेन्द्र सिंह भदौरिया,
दुनिया में हम दोनों को , ज़िंदा मारा जाता ,
मुझे गर्भ के भीतर ,तुमको बाहर काटा जाता !
बेटी की ये बात सुन , पेड़ ने किया आत्मसात ,
मिल कर के किया फैसला , समझाई जाऐ बात !
हमको मत काटो मारो,दिया इंसानों को मश्वरा ,
हम दोनों है पृथ्वी की,"नूतनता" और "उर्वरा !
धीरेन्द्र सिंह भदौरिया,
