मंगलवार, 20 मई 2014

प्यारी सजनी

प्यारी  सजनी

तुम  न्यारी तुम  प्यारी  सजनी
लगती  हो  पर- लोक  की  रानी
  नख  से  शिख   तक  तुम  जादू  
 फूलों  सी  लगती   तेरी  जवानी,

केशों    में    सजता    है  गजरा
नैनों   में   इठलाता  है   कजरा
खोले   केश   सुरभि  है   बिखरे
 झुके  नैन   रच   जाए   कहानी,


माथे पर  सौभाग्य  की  बिंदिया
जिसके गिरफ्त में मेरी निदिया
 पहने  कानों में  चन्दा  से कुंडल 
  और  तन  पर भाये  चूनर धानी, 

कर  कमलों  में  कंगना   सजते
पैरों   में  बिछिया  नूपुर   बजते
 संगीत  तेरे  आभूषणों  का  सुन 
 बलखाये  कमर चाल  मस्तानी,

निकले  होठोंसे  हँसीं का  झरना
यौवन  पुष्पों का  उठना  गिरना
देखकर  तेरी   मदमस्त  अदाये
 गढ़  जाए  न  कोई  नई  कहानी,


dheerendra bhadauriya,,,,,

24 टिप्‍पणियां:

  1. प्रेम भाव संजोये ... सुन्दर गीत ..

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  2. बहुत प्यारी सजनी....
    सुन्दर गीत..

    सादर
    अनु

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  3. क्या बात है धीरेन्द्र भाई सपना ही न ....बहुत सुंदर गीत ।

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  4. भाव और चित्र मे अनूठा मेल है !

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  5. सजनी सुंदर सांवरी, भई पिया की बावरी.

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  6. Bahut bahut badhai bhai sahab isi tarah anmol kavita aap lekhate rahe

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  7. प्रेमभरा बहुत ही सुंदरगीत...
    :-)

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  8. बहुत ही सुन्दर गीत का सृजन, धन्यबाद।

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  9. सौन्दर्यपूर्ण रचना ,खुबसूरत

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  10. बहुत सुन्दर श्रृंगार रस में रची बसी प्रस्तुति

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  11. अपूर्व सौंदर्य वर्णन |
    आशा

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  12. क्या बात है .......बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति !!

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  13. आनंद दायक रचना , बधाई आपको !

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  14. बहुत सुन्दर धीरेन्द्र जी...मन खुश हो गया पढ़ कर.

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  15. बेहद सुन्दर प्रस्तुति !!

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  16. बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
    बधाई मेरी

    नई पोस्ट
    पर भी पधारेँ।

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