शनिवार, 18 जनवरी 2014

आप इतना यहाँ पर न इतराइये.

  आप  इतना यहाँ  पर न इतराइये.

आप  इतना यहाँ  पर न इतराइये
  चंद  सासों  की राहें सभल जाइये,
अज़नबी मान करके  कहाँ जा रहे
    आपको भी यहाँ हमसफर चाहिये !

जख्म  लेकर यहाँ मै तो जीता रहा
  जहर  मिलता  रहा जहर पीता रहा, 
जिंदगी   के   तजुर्बे   बड़े  ख़ास  हैं
    रुबरु   होने   उनसे   चले   आइये ! 

एक  मासूम  के  पास  जाना  कभी
  प्यार से उसके गालों को छूना कभी,
उसके मुस्कान  में है जहाँ की ख़ुशी
    अपने दामन में भर कर उन्हें लाइये !

जर्रे- जर्रे  में  जिसका  यहाँ  नूँर  है
  पास  होते   हुये   भी   बहुत  दूर  है,
  दर्द का एक कतरा  किसी  दीन  से 
   माग  करके  उसी   में  उसे   पाइये !

रचनाकार - विक्रमसिंह ( केशवाही ) शहडोल, म.प्र.

45 टिप्‍पणियां:

  1. दोस्तों,मेरे पुत्र पंकज की 16 जनवरी को तिलक एवं 25 जनवरी को शादी होने के कारण आप लोगों की पोस्ट पर नही पहुच पा रहा हूँ,न ही लिख पा रहा हूँ,इसलिए विक्रम सिंह जी की रचनाओं को आप के साथ साझा कर रहा हूँ,,,,,!

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    1. पंकज बेटे को बहुत बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनायें
      सादर

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    2. धीरेन्द्र जी पुत्र के विवाह की अग्रिम बधाइयाँ स्वीकार करें।
      सुंदर रचना साँझा करने के लिए शुक्रिया

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  2. जर्रे- जर्रे में जिसका यहाँ नूँर है
    पास होते हुये भी बहुत दूर है....बहुत सुन्दर ...

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  3. बहुत सुन्दर ...धीरेन्द्र जी बधाई

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  4. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति...

    आप सभी लोगो का मैं अपने ब्लॉग पर स्वागत करता हूँ मैंने भी एक ब्लॉग बनाया है मैं चाहता हूँ आप सभी मेरा ब्लॉग पर एक बार आकर सुझाव अवश्य दें...

    From : •٠• Education Portal •٠•
    Latest Post : •٠• General Knowledge 006 •٠•

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (19-01-2014) को तलाश एक कोने की...रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1497 में "मयंक का कोना" पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  7. प्यार ऐसा ही बरसता रहे, दुनिया पर।

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  8. जख्म लेकर यहाँ मै तो जीता रहा
    जहर मिलता रहा जहर पीता रहा,
    जिंदगी के तजुर्बे बड़े ख़ास हैं
    रुबरु होने उनसे चले आइये ..
    ज़िंदगी से तो हर पल रूबरू होना पढता है ... उसके तजुर्बे ही तो जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं ...

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  9. क्या ही मासूमियत है मिसरों में, वाह वाह वाह

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  10. waah !एक मासूम के पास जाना कभी
    प्यार से उसके गालों को छूना कभी,

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  11. उम्दा पेशकश -
    शुक्रिया महाशय -

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  12. बहुत ही सुन्दर रचना । कुछ अलग भी ।

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  13. बहुत ही सुन्दर रचना । कुछ अलग भी ।

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  14. बहुत ही सुन्दर रचना । कुछ अलग भी ।

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  15. वाह ,बहुत खूब... सुन्दर रचना के लिए साधुवाद !

    http://himkarshyam.blogspot.in/

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  16. बहुत बहुत बहुत खुबसूरत बड़ा अच्छा लगा पढ़कर |

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  17. आप के दोस्त भी लाजवाब है रचना देखकर यही लगता है ,,,सस्नेह बधाई उन्हें

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  18. मासूम की मुस्कान से बेहतर क्या पाईये !
    बहुत सुन्दर रचना !

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  19. दर्द का एक कतरा किसी दीन से
    माग करके उसी में उसे पाइये !
    ..................वाह ,बहुत खूब

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  20. एक मासूम के पास जाना कभी
    प्यार से उसके गालों को छूना कभी,
    उसके मुस्कान में है जहाँ की ख़ुशी
    अपने दामन में भर कर उन्हें लाइये !.................वाह बहुत ही बेहतरीन पंक्तियाँ |

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  21. बहुत सुंदर रचना जीवनदर्शन लिये।

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  22. धीरेन्द्र जी,
    बहुत बहुत बधाई हो आपको और पंकज को ढेर सारी शुभकामनाएं !

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  23. धीरेंद्र जी
    आपको बहुत बहुत बधाई।।

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  24. हृदयस्पर्शी बेहतरीन पंक्तियाँ ...!!बहुत सुंदर रचना ...!!

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  25. दर्द का एक कतरा किसी दीन से
    माग करके उसी में उसे पाइये !
    sunder likha hai
    rachana

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  26. जर्रे जर्रे में जिसका यहाँ नूर है
    पास होते हुए भी बहुत दूर है.....बहुत खूबसूरत और गूढ़ दर्शन ..हर तरफ उसी का ही नूर है...

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  27. दर्द का एक कतरा किसी दीन से
    माग करके उसी में उसे पाइये !

    बहुत सुन्दर रचना !

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  28. सुंदर पंक्तियाँ
    बसंत पंचमी की शुभकामनाएं...

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  29. एक मासूम के पास जाना कभी
    प्यार से उसके गालों को छूना कभी,
    उसके मुस्कान में है जहाँ की ख़ुशी
    अपने दामन में भर कर उन्हें लाइये !.................वाह बहुत ही बेहतरीन पंक्तियाँ |

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  30. सुन्दर शब्द रचना
    http://savanxxx.blogspot.in

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,