शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

फूल बिछा न सको

"सवैया छंद"
फूल बिछा न सको  

 पथ में यदि फूल बिछा न सको,तुम कंटक जाल बिछाव नही |
यदि नेह  नहीं दिखला  सकते , कटु बैन  सुना  दुतराव  नही |
 तुम राह सही  बतला  न सको, भटके  मन को  भटकाव नही | 
मृदुहास  न बाँट सको  यदि तो , हँसते मन को  भरमाव नही |

2

 मिलता  सबको नहि  जीवन ये,हर आस-प्रदीप  कहाँ  जलता |
 कब जीवन  की  हर चाह  फली, हर प्रेम - प्रसून कहाँ खिलता |
  मन माफिक  प्रीत कहाँ मिलती,मन का  हर घाव कहाँ भरता | 
  प्रिय ! हो न निराश कभी जग में,मन चैन सदैव कहाँ मिलता | 

51 टिप्‍पणियां:

  1. फिर भी जीवन चलता है रहता..

    उत्तर देंहटाएं
  2. बढ़िया सवैया और सुन्दर अभिव्यक्ति |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति सर

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर भाव लिए प्रस्तुति सुन्दर कामना अद्भुत नहीं संग्रहनीय

    उत्तर देंहटाएं
  5. अति सुन्दर अभिव्यक्ति...
    :-)

    उत्तर देंहटाएं
  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - रविवार -01/09/2013 को
    चोर नहीं चोरों के सरदार हैं पीएम ! हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः10 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें, सादर .... Darshan jangra

    उत्तर देंहटाएं
  7. बढ़िया प्रस्तुतीकरण-

    आभार -

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. मृदुहास न बाँट सको यदि तो , हँसते मन को भरमाव नही ।
    -------------------------------
    अच्छे विचार, सुंदर छंद।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत बढ़िया है आदरणीय-
    आभार आपका-

    उत्तर देंहटाएं
  11. मिलता सबको नहीं जीवन ये,हर आस-प्रदीप कहाँ

    जलता |


    कब जीवन की हर चाह फली, हर प्रेम - प्रसून कहाँ

    खिलता |


    मन माफिक प्रीत कहाँ मिलती,मन का हर घाव

    कहाँ भरता |



    प्रिय ! हो न निराश कभी जग में,मन चैन सदैव

    कहाँ मिलता |
    बहुत सुन्दर सार्थक पद -नर हो न निराश करो मनको ,कुछ काम करो ,कुछ काम करो ,

    जग में रहकर कुछ नाम करो।

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत सुन्दर विचार ,बढ़िया अभिव्यक्ति
    latest post नसीयत

    उत्तर देंहटाएं
  13. बहुत सुन्दर भाव लिए अद्भुत नहीं संग्रहनीय प्रस्तुति,,,,

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत सुंदर काव्य और जीवन दर्शन भी ।

    उत्तर देंहटाएं
  15. प्रेरक और उत्साहवर्धक पंक्तियां।

    उत्तर देंहटाएं
  16. बहुत सुन्दर भाव लिए प्रस्तुति सुन्दर कामना अद्भुत नहीं संग्रहनीय

    उत्तर देंहटाएं
  17. बहुत खूबसूरत भाव जीवन के सच के साथ...

    उत्तर देंहटाएं
  18. सुंदर काव्य जीवन के सच के साथ...

    उत्तर देंहटाएं
  19. सुंदर सन्देश देती पंक्तियाँ |

    उत्तर देंहटाएं
  20. मन माफिक प्रीत कहाँ मिलती,मन का हर घाव कहाँ भरता |
    प्रिय ! हो न निराश कभी जग में,मन चैन सदैव कहाँ मिलता ..

    सच कहा अहि ये जीवन धूप छाँव है ... सभी कुछ सभी को नहीं मिलता ... संतोष ही जीवन है ...

    उत्तर देंहटाएं
  21. प्रिय ! हो न निराश कभी जग में....सुंदर रचना

    उत्तर देंहटाएं
  22. "आशा से आकाश थमा है कभी निराशा हो न मन में " प्रशंसनीय प्रस्तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  23. आशा जगाती सुंदर पंक्तियाँ !

    उत्तर देंहटाएं
  24. कब जीवन की हर चाह फली, हर प्रेम - प्रसून कहाँ खिलता |
    ......बहुत खूबसूरत मनभाती रचना

    उत्तर देंहटाएं

  25. "प्रिय ! हो न निराश कभी जग में,मन चैन सदैव कहाँ मिलता" .....सत्य है | सुंदर प्रस्तुति |

    उत्तर देंहटाएं
  26. बहुत सुन्दर भाव. सुंदर सन्देश देती पंक्तियाँ |.....

    उत्तर देंहटाएं
  27. बहुत सुंदर पंक्तियाँ.
    http://yunhiikabhi.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  28. वाह वाह !!! बहुत ही सुंदर रचना,,,,

    गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाए !

    उत्तर देंहटाएं
  29. मन माफिक प्रीत कहाँ मिलती,मन का हर घाव कहाँ भरता |
    प्रिय ! हो न निराश कभी जग में,मन चैन सदैव कहाँ मिलता |

    ........... सुंदर पंक्तियाँ.....संग्रहनीय प्रस्तुति :)

    उत्तर देंहटाएं

आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,