मंगलवार, 21 मई 2013

जनता सबक सिखायेगी...

जनता सबक सिखायेगी...
 
राजनीति  की  मंडी में, प्रजातंत्र  नीलाम  हो गया
 गुंडागर्दी  चोर चकार ,शहर  ग्राम में आम हो गया,
गया  भाड  में  देश, इन   नेताओं  की मक्कारी से
  इनसे  नफरत हो गई देश को,इनके भ्रष्टाचारी से, 


जहर  इन्हीं  का  बोया  है , प्रेम-भाव  परिपाटी  में
 घोल  दिया  बारूद  इन्होने, हँसते  गाते  माटी  में,
  मस्ती   में  बौराये  नेता , चमचे  लगे  दलाली  में  
 रख  छूरी  जनता  के,अफसर  मस्त  है  लाली में, 

 नेता,चोर,और तनखैया, सियासती भगवांन हो गए
  अमरशहीद मातृभूमि के,गुमनामी में आज खो गए, 
  भूल  हुई  शासन  दे  डाला,सरे  आम  दु:शाशन  को  
  हर चौराहा चीर  हरन है ,व्याकुल जनता राशन को, 
  
सपने  में  कभी न  सोचा  था,जन नेता ऐसा होता है
 चुन कर  भेजो  संसद में, कुर्सी  में बैठ  कर  सोता है,
जनता  की   बदहाली  का , इनको  कोई  ज्ञान  नहीं
 ये चलते  फिरते  मुर्दे  है, इन्हें राष्ट्र  का  मान  नहीं,
 


नेताओं  की  पू जा   क्यों ,क्या  ये  पूजा  लायक  है 
 देश  बेच  रहे  सरे  आम , ये  ऐसे  खल - नायक  है, 
इनके   करनी  की  भरनी ,जनता  को  सहना होगा 
इनके खोदे  हर गड्ढे  को ,जनता  को  भरना  होगा,


 झूठी  कसमें  खा  संसद  में , मंत्री  पद  पा  जाते है  
   सारे तन्त्र  कुतर  डाले ,जनता  को  कच्चा  खाते है,   

ये कलयुग के कालनेम है ,सब कुछ इनकी माया है 
राष्ट्र प्रगति  का  सारा  धन, इनके  पेट समाया  है,

 सब  कुछ जनता जान गई ,इनके कर्म उजागर है     
   चुल्लू भर जनता के हिस्से, इनके हिस्से सागर है,      
   छल   का   सूरज   डूबेगा ,  नई   रौशनी   आयेगी       
  अंधियारे  बाटें है तुमने, जनता सबक सिखायेगी
,      
 
dheerendra singh bhadauriya

56 टिप्‍पणियां:

  1. kafi samay bad aap ki rachna ko dekh man harshit hua ,bahut hi synda aaj ki hakikat ko ujagar karti aur bharsht netaon kemuh par tamacha jadti
    behatareen prastutiभूल हुई शासन दे डाला ,सरे आम दु:शाशन को
    हर चौराहा चीर हरन है, व्याकुल जनता राशन को,

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    1. ११-१८ मई को भतीजी एवं मेरी बेटी की शादी थी,इस कारण नेट से दूर था,आज समय मिला तो आप लोगो के बीच हाजिर हूँ,,,,

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    2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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    3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
      आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (22-05-2013) के कितनी कटुता लिखे .......हर तरफ बबाल ही बबाल --- बुधवारीय चर्चा -1252 पर भी होगी!
      सादर...!

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  2. काश की जनता ये सबक सिखादे इन नेताओं को ... लगता है वो बी सब्र कर रही है ..

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  3. puriki puri ki kavita jordar hai ,bolg par kafi samay bad aap ko dekh kar
    sukhad laga,umda

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  4. जनता ही गूंगी बहरी हो गयी
    सार्थक अभिव्यक्ति

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  5. सब कुछ जनता जान गई ,इनके कर्म उजागर है
    चुल्लू भर जनता के हिस्से, इनके हिस्से सागर है,
    छल का सूरज डूबेगा , नई रौशनी आयेगी
    अंधियारे बाटें है तुमने, जनता सबक सिखायेगी,

    सच्चाई को बयान करती सार्थक रचना समय के पहले चेतावनी देती पोस्ट

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  6. बढ़िया...
    सार्थक एवं सशक्त अभिव्यक्ति....

    सादर
    अनु

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  7. नेता,चोर,और तनखैया, सियासती भगवांन हो गए
    अमरशहीद मातृभूमि के,गुमनामी में आज खो गए, ................वर्तमान के यथार्थ को प्रस्तुत किया ...आभार

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  8. सब कुछ जनता जान गई........जनता सबक सिखायेगी..
    सही कहा ...अच्छा कहा ....

    ---इन दो पोंक्तियों को पुनः देखलें ...
    इनसे नफरत हो गई देश को,इनके भ्रष्टाचारी से,

    रख छूरी जनता के,अफसर मस्त है लाली में,

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  9. जनता को सबक सिखाना ही पडेगा ऐसे नेताओं को,सार्थक और सशक्त अभिव्यक्ति.

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  10. समसामायिक समस्या की ओर ध्यान खींचती रचना..

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  11. आज के राजनितिक पर सार्थक प्रभावशाली कविता .....

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  12. हाँ जी सही कहा आपने , जनता सबक सिखाएगी लेकिन कब यह खुद भी नहीं जानती ....

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  13. सही कहा आपने ,सम-सामायिक सार्थक अभिव्यक्ति, झूठी कसमें खा संसद में , मंत्री पद पा जाते है
    सारे तन्त्र कुतर डाले ,जनता को कच्चा खाते है,
    ये कलयुग के कालनेम है ,सब कुछ इनकी माया है
    राष्ट्र प्रगति का सारा धन, इनके पेट समाया है,

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  14. बहुत सुन्दर और सार्थक रचना !!.आज नेताओं ने देश की जो हालत बनायी उसका सही आंकलन किया है आपने .काफी दिन से आपकी अनुपस्थिति महसूस हो रही थी .

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  15. आखिर में सबक तो जनता ही सिखाएगी लेकिन कब पता नहीं... सशक्त अभिव्यक्ति...

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  16. जल्दी से छल का सूरज डूबे और नई रोशनी आये, जनता इसीके इंतजार में हैं, बहुत सटीक और सामयिक रचना.

    रामराम.

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  17. waaaaah waaaaah bhot khub.......aaj kal desh ke halat aes hi hai...aapne sidhi sadi juban mai bya kr diya ....dil ko choo gayi ae bat bhot khub bhot khub..slam aapko

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  18. जब गली गली में चोर हो रहे है
    तो दिल्ली वाले क्या बुरा कर रहे हैं
    वाह वाह !

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  19. सटीक व सामयिक रचना |
    जनता ही तो इनको सबको नहीं सिखाती !!

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  20. पता नहीं ये भ्रष्टाचार कभी खत्म भी होगा???

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  21. छल का सूरज डूबेगा , नई रौशनी आयेगी
    अंधियारे बाटें है तुमने, जनता सबक सिखायेगी,

    बहुत खूब लिखा है...जनता को ही सबक सिखाना है...
    बिटिया और भतीजी की शादी की बधाई स्वीकारें|

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  22. देश चल रहा है राम भरोसे .... जो भी नेता बन जाता है वो इसी रंग में रंग जाता है .... जनता तो बस ठगी जाने के लिए है ।

    सटीक और सार्थक प्रस्तुति

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  23. छल का सूरज डूबेगा , नई रौशनी आयेगी...
    बस यही एक आशा ऊर्जा देती है ।
    सुंदर रचना ।

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  24. बहुत खूब व्यंग्य किया है आपने देश के मौजूदा हालत पर!

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  25. भावनात्मक अभिव्यक्ति .पूर्णतया सहमत बिल्कुल सही कहा है आपने .आभार . बाबूजी शुभ स्वप्न किसी से कहियो मत ...[..एक लघु कथा ] साथ ही जानिए संपत्ति के अधिकार का इतिहास संपत्ति का अधिकार -3महिलाओं के लिए अनोखी शुरुआत आज ही जुड़ेंWOMAN ABOUT MAN

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  26. सार्थकता लिये सशक्‍त रचना ...

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  27. जाने कब जनता की हिस्से वो रौशनी आएगी .....चुने भी तो किसे ..जिसको देखो पहले वह दम भरता है लेकिन फिर घर भरने लगता है ....
    यह आक्रोश जरुरी है सबके मन में उठे तो कुछ नयी सुबह जरुर होगी ...

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  28. अब तो सबक सिखाना ही होगा जनता को ....
    शुभकामनायें!

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  29. बहुत सच्ची बात कही आपने
    आखिर जनतंत्र की शक्ति जनता में ही है
    सार्थक रचना
    सादर!

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  30. सार्थक एवं सशक्त अभिव्यक्ति...

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  31. बेहतरीन लाजवाब प्रस्तुति आदरणीय करारा जवाब दिया है आपने.

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  32. छल का सूरज डूबेगा , नई रौशनी आयेगी
    अंधियारे बाटें है तुमने, जनता सबक सिखायेगी, .................बहुत बढियां सर ,आज के हालात की अच्छी प्रस्तुति ।

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  33. सामयिक और सटीक प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...

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  34. जहर इन्हीं का बोया है , प्रेम-भाव परिपाटी में
    घोल दिया बारूद इन्होने, हँसते गाते माटी में,------

    वर्तमान का सच
    सटीक व्यंग किया है अव्यवस्था पर
    बधाई

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  35. सटीक व्यंग ,लाजवाब प्रस्तुति ...बधाई

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  36. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  37. पर जनता कब सबक सिखाएगी....वो वक्त कब आएगा ???

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  38. काश ये अब जल्दी ही हो ..मेरे अग्रज शुशांत की पंक्तियाँ याद आती हैं माली तो नीलाम कर गए कुटिया कर अपनी खाली अब भौरों को करनी होगी इस उपवन की रखवाली ..कदवा सच प्रदर्शित करती शानदार रचना के लिए हार्दिक बधाई

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  39. वाह ...सुंदर सार्थक और सटीक रचना ....आम इंसान का दर्द है ..कुंठा है इसमें

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  40. प्रभावशाली अभिव्यक्ति...
    बधाई !

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