रविवार, 10 फ़रवरी 2013

नवगीत,

नवगीत,

बीत गये चार दिन तलाश के
अब आये है दिन पलाश के,
वही गौरैया -
घाट की पनिहारिने,
वही शाम झुटपटी
हर्षित मन किया बहार ने,
वही मायावी साल
ज्यों के त्यों कल आज,
सब कुछ वही-वही
आन-बान साज-बाज,
केशरिया पगड़ी है झाड़ों की
खूब बन आई है बाड़ों की,
खेतों-खेत सरसों फूली है
प्रौढ़ों ने भी अपनी उमर भूली है,
कहाँ गये महल बने
जो महज ताश के,
बीत गये चार दिन दिलाश के
अब आये है दिन पलाश के... 

49 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर रचना। पढ़कर दिल खुश हो गया।

    कृपया मेरी नयी कविता "प्रकृति की गोद में" को भी पढ़े।
    ब्लॉग यूआरएल :- kavitasankalan.blogspot.com

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  2. बहुत सुन्दर नवगीत पढ़कर मन प्रसन्न हो गया बिलकुल पलाश की तरह :-)
    ---सादर

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  3. वही गोरैया
    वही तो है पनघट
    वही पनिहारिने
    झुरमुटी शाम वही
    किसने हवाओं में
    आज केसर बिखराई ?
    मन हुआ पलाश ...

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  4. बहुत सुंदर कुछ नया सा स्वाद वही में !

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  5. सुन्दर गीत....
    बड़े भाते हैं दिन पलाश के...दिन हर्षोल्लास के...
    सादर
    अनु

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  6. बसंत ऋतु के आगमन सी ताजातरीन रचना.... बहुत सुन्दर!

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  7. बासन्ती परिधान पहने मौसम आ गया।

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  8. सुन्दर नवगीत, बसंत के आगमन पर ********बीत गये चार दिन दिलाश के
    अब आये है दिन पलाश के...

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  9. बहुत अच्छी और भाव पूर्ण रचना |
    आशा

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  10. बहुत ही सुन्दर कविता एक नये परिधान में,आभार।

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  11. बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.

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  12. पलाश के दिन लौट आये हैं..खेतों में सरसों पीली..बाग मुस्कुराये हैं..सुंदर कविता..

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  13. सुन्दर नवगीत ... बहार छाई हो जैसे ...

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  14. palash,sarson, tesoo, naye naye rng leke aaye hain

    vasant ke swagat men aapne bhee to nav geet gaye hain.

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  15. बहारे फिर आएँगी........सुन्दर पोस्ट।

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  16. बहुत सुन्दर पलाश गीत !! सुंदर भावनायें !! सुंदर शब्द !! सुंदर अभिव्यक्ति !!
    शुभकामनायें.
    वेदिका

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  17. शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

    सुन्दर गीत है .केसरिया और दिलास कर लें दिलास /दिलासा

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  18. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ....!!

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  19. सुंदर भावनायें सुन्दर नवगीत, बसंत के आगमन पर

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  20. बहुत अच्छी प्रस्तुति सुंदर भावनायें मन के भावों को बहुत गहराई से लिखा है

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  21. दिग-दिगंत बौराया | मादक बसंत आया ||
    तोते सदा पुकारे | मैना मन दुत्कारे ||
    काली कोयल कूके | लोग होलिका फूंके ||
    सरसों पीली फूली | शीत बची मामूली ||
    भौरां मद्धिम गाये | तितली मन बहलाए ||
    भाग्य हमारे जागे | गर्म वस्त्र सब त्यागे ||

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  22. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  23. सुन्दर रचना नवगीत के रूप में पढने को मिली .............

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  24. नवगीत संग महक उठे है दिन पलाश के...
    वसंतागमन की बहुत-बहुत शुभकामनायें...

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  25. नवगीत से बसंत आया गया ..
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति ..

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  26. बीत गये चार दिन दिलाश के
    अब आये है दिन पलाश के...सुन्दर नवगीत, बसंत के आगमन पर

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  27. बहुत ही सुन्दर नवगीत...
    बेहतरीन...
    :-)

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  28. खेतों-खेत सरसों फूली है
    प्रौढ़ों ने भी अपनी उमर भूली है

    ;)
    क्या बात है आदरणीय धीरेन्द्र सिंह भदौरिया जी !

    सुंदर नवगीत के लिए बधाई !!

    बसंत पंचमी एवं
    आने वाले सभी उत्सवों-मंगलदिवसों के लिए
    हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !
    राजेन्द्र स्वर्णकार

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  29. बहुत सुंदर गीत वसंत के स्वागत
    में बधाई और शुभकामनाएं ............

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  30. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ....!!

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  31. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति ....!!

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,