सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

बदनसीबी,




मुझे जिन्दगी ने रुलाया बहुत है,
मेरे दोस्त ने आजमाया बहुत है!

कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,
मेरा घर गमो से सजाया बहुत है!

हटा लो ये आँचल मुझे भूल जाओ,
सर पे बदनसीबी का साया बहुत है!

घर तो क्या मै ये शहर छोड़ जाऊं,
अजीजो ने मुझको समझाया बहुत है!

बरकत बहुत दी है मुझको खुदा ने.

धीर ने खोया है कम,गम पाया बहुत है! 



dheerendra,"dheer"

56 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया प्रस्तुति |
    बधाई स्वीकारें ||

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  2. वाह सर वाह बेहतरीन शानदार ग़ज़ल बधाई स्वीकारें.

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  3. सभी शेर मुकम्मल... दाद स्वीकारें.

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  4. धीर ने खोया है कम,गम पाया बहुत है!

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  5. हटा लो ये आँचल मुझे भूल जाओ,
    सर पे बदनसीबी का साया बहुत है!..

    बहुत खूब ... कमाल का शेर है लाजवाब गज़ल का ...

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  6. sir ji,bahut khoob,behatareen gazal,घर तो क्या मै ये शहर छोड़ जाऊं,
    अजीजो ने मुझको समझाया बहुत है!

    बरकत बहुत दी है मुझको खुदा ने.
    धीर ने खोया है कम,गम पाया बहुत है!

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  7. बेहतरीन शानदार ग़ज़ल बहुत सुन्दर प्रस्तुति

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  8. घर तो क्या मैं ये शहर छोड़ जाऊं,


    अजीज़ों ने मुझको समझाया बहुत है!

    बढ़िया गजल साहब जी .सुन्दर अशआर सारे के सारे .आभार आपकी टिपण्णी का .

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  9. बरकत बहुत दी है मुझको खुदा ने.
    धीर ने खोया है कम,गम पाया बहुत है!

    बहुत सुन्दर .....

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  10. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार 5/2/13 को चर्चा मंच पर राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका वहां हार्दिक स्वागत है

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  11. बरकत बहुत दी है मुझको खुदा ने.
    धीर ने खोया है कम,गम पाया बहुत है!
    बहुत खूब !
    अच्छी है ग़ज़ल.

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  12. कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,
    मेरा घर गमो से सजाया बहुत है!

    हटा लो ये आँचल मुझे भूल जाओ,
    सर पे बदनसीबी का साया बहुत है!
    लाजवाब. ग़ज़ल
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    New postअनुभूति : चाल,चलन,चरित्र

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  13. घर तो क्या मै ये शहर छोड़ जाऊं,
    अजीजो ने मुझको समझाया बहुत है!

    .......वाह क्या बात है ....लाजवाब

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  14. कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,
    मेरा घर गमो से सजाया बहुत है!

    ये गम चाँद बन कर,चमकने लगा है
    हमें इस गज़ल ने लुभाया बहुत है....

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  15. कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,
    मेरा घर गमो से सजाया बहुत है....सुदर गजल

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  16. कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,
    मेरा घर गमो से सजाया बहुत है!


    बहुत सुंदर रचना
    क्या कहने

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  17. जिसने खोया कम पाया ज्यादा है..वह किस्मतवाला है..सुंदर गजल...

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  18. कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,
    मेरा घर गमो से सजाया बहुत है!



    बढिया गज़ल ।

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  19. धीर ने खोया है कम, गम पाया बहुत है ...

    जनाब इस एक पंक्ति ने दिल का मर्म बयां कर दिया | अत्यंत सुन्दर तथा भावपूर्ण प्रस्तुतीकरण | आपकी लेखनी से बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है | साँझा करने के लिए बहुत बहुत आभार |

    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  20. हम जैसों को इस दिल ने भी सताया बहुत है ....
    शुभकामनायें!

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  21. बहुत बढ़िया और सुन्दर अभिवयक्ति...धन्यवाद

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  22. बहुत बढ़िया ग़ज़ल...

    सादर
    अनु

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  23. बढ़िया और लाजवाब।
    कृपया मेरी नई पोस्ट "चीन की महान दीवार" को भी अवश्य देखें। धन्यवाद।
    ब्लॉग पता :- gyaan-sansaar.blogspot.com

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  24. कोई आ के देखे मेरे घर की रौनक,
    मेरा घर गमो से सजाया बहुत है!

    उम्दा गज़ल

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  25. कहने की हैं ये बातें,कहना था कुछ भी यों ही
    जीवन में जिसने खोया,पाया वही बहुत है !

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  26. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  27. बहुत सुन्दर रचना और शब्द चयन |
    आशा

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  28. बहुत बढ़िया और सुन्दर अभिवयक्ति..

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,