शुक्रवार, 6 जुलाई 2012

दोहे,,,,


दोहे

धार ओर मुख नाव का, फिर तू काहे खेय !
अमिय देय दुश्मन मरे,तब बिष काहे देय !!

खटको से तू वारकर, चाहे तू जितनी बार !
प्रेम ढाल से रोक कर, करूँ प्यार से वार !!

लाखों पाप जुटाय के, तीरथ करे का होय !
अग्निमें घृत डाल के,सोचा प्रभु खुश होय !!

परवाने और अनल का,कुछ क्षण का खेल !
वैसे सज्जन दुर्जन का, कभी न होए मेल !!

रामायण और गीता पढ़ी, पढ़ा वेद पुरान !
फिर भी दुर्जन पाप करे, रहे सदा अज्ञान !!

पीली कमरी ओढ़ली, लिखा रामका नाम !
सोचा प्रभु खुद आयेगें, देगें निज वरदान !!

रिक्तभूमि को छोड़के,मिला भाग्य जे होये !
ऐसे पर प्रभु दया नहि, आशा वादी रॉये !!

ढोल मंजीरा हवन से, पशु पक्षी भाग जाय !
ऐसे में तुम सोचते, प्रभु निकट तुम्हारे आय !!

मुंड घोटा और स्वांग कर, पंडा करे अलाप !
ऐसे में प्रभु बात क्या, जाये निशाचर भाग !!

धड माँस पूरा लिया, सर प्रभु दिया चढाय !
पुन्यपुन्य सब ले लिया, पाप खुदा ले जाय !!

Dheerendra,bhadauriya

53 टिप्‍पणियां:

  1. बड़े सुन्दर और सार्थक दोहे..

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  2. अति सुन्दर और सार्थक रचना .... !!

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  3. दोहो के अर्थ मे गागर मे सागर भरा होता है

    कांकर पाथर जोड के मस्जिद लई चुनाया

    ता चढी मुल्‍ल बाग दे क्‍या बहिरा हुआ खुदा ।।


    यूनिक तकनीकी ब्लाग (इन नम्‍बरो पर कॉल मत करना

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  4. बहुत सुन्दर. भोले शंकर की जय हो!!

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  5. ढोल मंजीरा हवन से, पशु पक्षी भग जाय !
    ऐसेमें तुम सोचते, प्रभु निकट तुम्हारे आय !!

    सटीक बात कही है .... सभी दोहे बढ़िया हैं

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  6. जय जय शिव शंकर ....बोल बम ! बहुत ही सुन्दर आराधना !

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  7. सुन्दर भावपूर्ण दोहे .
    एक दो जगह मात्रिक त्रुटियाँ हैं .

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  8. धीर जी बहुत ही सुन्दर और सार्थक दोहे एक से बढ़ कर एक

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  9. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (07-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  10. गागर में सागर..... बहुत उम्दा.....:)

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  11. सभी दोहे एक से बढ़कर एक ...
    सर्थक प्रयास ...शुभकामनायें.

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  12. बढ़िया नीतिपरक ज्ञान बांटते दोहे .

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  13. यह प्रयास बहुत ही अच्छा लगा । आशा है भविष्य में भी इस प्रकार के पोस्ट पाठकों को पढ़ने के लिए मिलते रहेंगे।

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  14. वाह ... बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति।

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  15. लाखों पाप जुटाय के, तीरथ करे का होय !
    अग्निमें घृत डाल के,सोचा प्रभु खुश होय !!
    एक से बढ़ कर एक ....

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  16. बहुत सुन्दर सार्थकता लिए दोहे...
    लाजवाब...:-)

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  17. बहुत सार्थक और सटीक दोहे |
    आशा

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  18. रामायण और गीता पढ़ी, पढ़ा वेद पुरान !
    फिर भी दुर्जन पाप करे, रहे सदा अज्ञान !!.........khas tour par ye ..aur sabhi dohe bahut sundar hai...

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  19. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति। मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा ।धन्यवाद।

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  20. सुन्दर और सार्थक दोहे..

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  21. सभी दोहे एक से बढ़कर एक ...

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  22. रामायण और गीता पढ़ी, पढ़ा वेद पुरान !
    फिर भी दुर्जन पाप करे, रहे सदा अज्ञान !!

    यही ज्ञान तो आना बाकी है. सारे दोहे एक गंभीर सन्देश देते हैं.

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  23. बेहद खुबसूरत SIR बधाई स्वीकार करें.

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  24. बड़े सुन्दर और सार्थक दोहे..

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  25. रामायण और गीता पढ़ी, पढ़ा वेद पुरान !
    फिर भी दुर्जन पाप करे, रहे सदा अज्ञान !!

    durjan rahte sadaa durjan
    man kaa mail kahaan chhupaay
    thodee thodee der mein ufan kar baahar aaye


    badhiyaa ,mazaa aayaa

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  26. बहुत अच्छे और ज्ञान की खान हैं सभी दोहे.... शुभकामनायें

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  27. दोहों में हाथ आजमाओ,अच्छा करोगे !

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  28. "धड माँस पूरा लिया, सर प्रभु दिया चढाय !
    पुन्यपुन्य सब ले लिया, पाप खुदा ले जाय !!"

    क्या बात है ..... सार्थक व् सटीक ...बधाई.

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  29. खटको से तू वारकर, चाहे तू जितनी बार !
    प्रेम ढाल से रोक कर, करूँ प्यार से वार !!

    परवाने और अनल का,कुछ क्षण का खेल !
    वैसे सज्जन दुर्जन का, कभी न होए मेल !
    बहुत सुन्दर सन्देश देते प्यारे दोहे ...अच्छी प्रस्तुति ....भ्रमर ५

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  30. एकदम सहज और शीघ्र स्मरण हो जाने योग्य।

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  31. सार्थक संदेश देते बहुत सुन्दर दोहे...

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  32. अमिय देय दुश्मन मरे,तब बिष काहे देय !!
    Bahut gehri baat.

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  33. मुंड घोटा और स्वांग कर, पंडा करे अलाप !
    ऐसे में प्रभु बात क्या, जाये निशाचर भाग !!
    ..... एक से बढ़ कर एक सार्थक दोहे

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  34. ढोल मंजीरा हवन से, पशु पक्षी भाग जाय !
    ऐसे में तुम सोचते, प्रभु निकट तुम्हारे आय !!..............वाह बहुत खूब



    सबसे पहले मन के भावों को लेकर चिंतन करने की जरुरत हैं ..

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  35. bahut hi sunder dohe der se padhe mafi chahungi kuchh pareshaniyan thi .
    rachana

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,