रविवार, 1 जुलाई 2012

-:चाय:-


-: चाय :-

आज की जनसंख्या में चाय पीने का माहौल है,
कई रंग कई ब्रांड में बिकता,मेरी बहुत पोल है!

लक्ष्मण, को बाण लगा, संजीवनी का रोल था,
आज बच्चा पैदा होते ही चाय पिऊगाँ बोलता!

पीने में बहुत बढ़िया हूँ , मेरा अपना टेस्ट है
मेहमान नवाजी केलिए बढ़िया सस्ता बेस्ट है

कई से मेरी रिश्तेदारी है, काफी मेरी सौतन है,
चुस्ती और मस्ती में, मुझ से अच्छा यौवन है!

हर घर की इज्जत ढकने में मेरा बड़ा रोल है,
आज की जनसँख्या में चाय पीनेका माहौल है!

dheerendra bhadauriya

58 टिप्‍पणियां:

  1. हाहहाहाहा

    आइये धीरेंद्र जी एक कप चाय हो जाए। हाहाहा


    बहुत बढिया
    संडे गिफ्ट

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  2. कल ही अख़बार में पढ़ा...अगले साल भारत में चाय को 'नैशनल ड्रिंक' घोषित किया जाएगा...आपकी यह पोस्ट सामयिक हो गई...बधाई !!

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  3. Wah------maja aa gaya aapki is post lo padh kar---
    aur is liye bhi ki main bhi chay ki divani hun---
    bahut hi majedaar post-----
    poonam

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  4. हर घर की इज्जत ढकने में मेरा बड़ा रोल है,
    आज की जनसँख्या में चाय पीनेका माहौल है!

    ...वाह! बहुत मज़ेदार चाय....

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  5. इसे पढ़कर चाय पीन का मन हो रहा है।

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  6. अभी अभी चाय पीया और यह रचना पढ़ी
    बहुत खूब

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  7. चाय वाय करवा रही, चांय-चांय हर रोज |
    सुबह सुबह तो ठीक है, दिन में बारह डोज |
    दिन में बारह डोज, खोज अब दूजी लीजै |
    यह मित्रों की फौज, नवाजी बाहर कीजै |
    हुई एक दिन शाम, मिले व्यवहारी आला |
    इंतजाम छ: जाम, हुआ अंजाम निराला ||

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  8. बढ़िया चाय का गुणगान...Sunday special :)

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  9. चाय पर इस नवीन कविता के लिए धन्यवाद.
    इस बात पर हम आज चाय की एक प्याली, नहीं नहीं एक पैग और लेते हैं. और यह पैग आपके नाम. चियर्स धीरेन्द्र सर !!

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  10. आज की जनसँख्या में चाय पीनेका माहौल है!

    क्या बात है. ये चाय मजेदार लगी. बढ़िया.

    धन्यबाद.

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  11. बहुत बढ़िया रचना चाय पर ...मज़ा आ गया

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  12. क्या बात है!!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 02-07-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-928 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  13. प्यार का माहौल बनाने में आपकी चाय का बड़ा रोल है :-)

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  14. हर घर की इज्जत ढकने में मेरा बड़ा रोल है,
    आज की जनसँख्या में चाय पीनेका माहौल है!
    बहुत सुन्दर है . बहुत बढ़िया प्रस्तुति .. .कृपया यहाँ भी पधारें -
    ram ram bhai

    रविवार, 1 जुलाई 2012
    कैसे होय भीति में प्रसव गोसाईं ?

    डरा सो मरा
    http://veerubhai1947.blogspot.com/

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  15. क्या बात है. चाय मजेदार लगी. बढ़िया.

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  16. हर घर की इज्जत ढकने में मेरा बड़ा रोल है,
    आज की जनसँख्या में चाय पीनेका माहौल है!
    waah kya bat kahi aapne :)

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  17. हर घर की इज्जत ढकने में मेरा बड़ा रोल है,..सच है..चाय के बिना मेहमान भी हिलता नहीं..रोचक प्रस्तुति..

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  18. पीने में बहुत बढ़िया हूँ , मेरा अपना टेस्ट है
    मेहमान नवाजी केलिए बढ़िया सस्ता बेस्ट है
    vaah badhiya hai ....

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  19. आ तो गई कमेन्ट करने , लेकिन स्वाद तो पता नहीं ...
    लाभ - हानी क्या बताऊँ ....
    रचना अच्छी लगी लिख निकल लूँ .... (^_^)

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  20. :)
    chai to kabhi pi nahi maine...par kvita ka ras accha hai:)

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  21. वाह...
    बहुत खूब
    बहुत सुन्दर रचना...
    :-)

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  22. सच्ची.........हमारा हाल भी विभा जी जैसा है...कभी पी नहीं...
    हाँ रचना प्यारी है...
    सादर

    अनु

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  23. एक जुलाई जन्म-दिन,शुभ-घड़ी अति महान
    चाय पिला टरका दिया , चतुर बड़े श्रीमान
    चतुर बड़े श्रीमान , मगर हम भी हैं हठीले
    जिद कर करके खा लेंगे , पकवान रसीले
    देते हैं हम जन्म-दिवस की ढेर बधाई
    शुभ घड़ी अति महान,जन्म दिन एक जुलाई ||

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  24. हर घर की इज्जत ढकने में मेरा बड़ा रोल है,..bilkul sahi

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  25. चाय की महिमा के लिए धन्यवाद् ......

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  26. हर घर की इज्जत ढकने में मेरा बड़ा रोल है,
    आज की जनसँख्या में चाय पीनेका माहौल है!

    सच में मित्र इसने अपना स्थान गजब जमा लिया है हर घर में अब गुड शरबत दही सब बेचारे रोते हैं ...अब न जाने कब आप के साथ एक कप चाय ..
    भ्रमर ५

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  27. चाय की चाह तो हर किसी को होती है । घर गरीब हो या अमीर चाय तो मेहमान नवाज़ी का मानक है ।

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  28. लक्ष्मण, को बाण लगा, संजीवनी का रोल था,
    आज बच्चा पैदा होते ही चाय पिऊगाँ बोलता ...

    मस्त .. निर्मल हास्य लिए ... अच्छी रचना है ...

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    उम्दा प्रस्तुति के लिए आभार


    प्रवरसेन की नगरी
    प्रवरपुर की कथा



    ♥ आपके ब्लॉग़ की चर्चा ब्लॉग4वार्ता पर ! ♥

    ♥ पहली फ़ूहार और रुकी हुई जिंदगी" ♥


    ♥शुभकामनाएं♥

    ब्लॉ.ललित शर्मा
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    उत्तर देंहटाएं
  30. बढ़िया प्रस्तुति..... सुन्दर रचना. ... बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  31. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  32. आज की जनसँख्या में चाय पीनेका माहौल है!
    बहुत सुन्दरर......!!

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  33. लक्ष्मण, को बाण लगा, संजीवनी का रोल था,
    आज बच्चा पैदा होते ही चाय पिऊगाँ बोलता बहुत सुदर प्रस्तुति चाय

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  34. पीने में बहुत बढ़िया हूँ , मेरा अपना टेस्ट है
    मेहमान नवाजी केलिए बढ़िया सस्ता बेस्ट है

    बहुत बढ़िया...अब तो राष्ट्रीय पेय भी बन गयी है...

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  35. धीरेन्द्र जी , बुंदेलखंड में एक कहावत है - जब चाय जहाँ चाय , जैसी चाय मगर चाय (यहाँ चाय के दो अर्थ है १. चाय २. चाह: श्लेष अलंकार )

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  36. चाय और दारु तो सर्वत्र व्याप्त पेय है..
    बहुत बढ़िया

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    1. किसी से दोस्ती का हाथ मजबूत करने में एक कप चाय की अहम भूमिका होती है। हम अपने दोस्तों को खाने पर तो नही लेकिन शाम की चाय पर बुला लेते हैं जो हमारी असंतुलित अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने के साथ-साथ दोस्तों के साथ संबंधों को और भी मजबूत कर देती है । चाय पर लिखी गयी यह प्रस्तुति आपके काव्यात्मक प्रतिभा को एक नया आयाम प्रदान करती है । धन्यवाद।

      हटाएं
  37. विभा जी और अनु जी को नमन
    चाय नही पिए ये पर
    आपकी प्रस्तुति की प्रशंसा करें ये.
    वाकई में,
    चाय अच्छी हो या न हो,
    पर आपकी प्रस्तुति लाजबाब है.

    आभार.

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  38. बहुत ही सुन्दर लगी यह चाय की प्याली और इसकी मस्ती !

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  39. वाह जी ....चाय को लेकर ..एक अलग तरह की सोच ...बहुत खूब

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आपकी टिप्पणियाँ मेरे लिए अनमोल है...अगर आप टिप्पणी देगे,तो निश्चित रूप से आपके पोस्ट पर आकर जबाब दूगाँ,,,,आभार,