मजबूरी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मजबूरी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

मजबूरी गाती है.

मजबूरी गाती है.

पलकों  पर आँसू  की  डोली सहज  उठाती है ,
ऐसा भी  होता है, तब  जब  मजबूरी गाती है |

छोटे  कदम  बड़ी मंजिल  का  पता  बताते है ,
लेकिन  छोटे  को सुविधा -सम्पन्न दबाते है |
छोटी  सी  बाती  में  दुनिया आग  लगाती  है ,
पर यह  छोटी  बाती जग रौशन कर जाती है |

ऐसा  भी  होता  है तब  जब  मजबूरी गाती है |

 धरती  पर  पौधों  की  दुनिया कोई सजाता है,
   पतझड़ को जा, झट कोई  न्यौता  दे आता  है | 
      पवन बसन्ती भी मरुथल की  कथा सुनाती है,     
   मन में  पलती आशा-पथ में  फूल  बिछाती है | 

ऐसा  भी होता है  तब  जब  मजबूरी  गाती है |

खुशियाँ  भी  बात-बात  पर  गाल फुलाती है, 
मगर जिन्दगी नहीं खीजती वह मुस्काती है |
लहर - भवँर फिर अहंकार का रौब जमाती है, 
 कागज़ की  ही सही मगर कश्ती  टकराती है | 

ऐसा  भी होता है  तब  जब  मजबूरी गाती है |