मजबूरी गाती है.
पलकों पर आँसू की डोली सहज उठाती है ,
ऐसा भी होता है, तब जब मजबूरी गाती है |
छोटे कदम बड़ी मंजिल का पता बताते है ,
लेकिन छोटे को सुविधा -सम्पन्न दबाते है |
छोटी सी बाती में दुनिया आग लगाती है ,
पर यह छोटी बाती जग रौशन कर जाती है |
ऐसा भी होता है तब जब मजबूरी गाती है |
धरती पर पौधों की दुनिया कोई सजाता है,
पतझड़ को जा, झट कोई न्यौता दे आता है |
पवन बसन्ती भी मरुथल की कथा सुनाती है,
मन में पलती आशा-पथ में फूल बिछाती है |
ऐसा भी होता है तब जब मजबूरी गाती है |
खुशियाँ भी बात-बात पर गाल फुलाती है,
मगर जिन्दगी नहीं खीजती वह मुस्काती है |
लहर - भवँर फिर अहंकार का रौब जमाती है,
कागज़ की ही सही मगर कश्ती टकराती है |
ऐसा भी होता है तब जब मजबूरी गाती है |
