
चुनाव आया
चुनाव आया आरोप प्रत्यारोप का दौर लाया
पिछले पाँच दस वर्षो में जनता ने क्या पाया,
पक्ष-विपक्ष एक दुसरे को इल्जाम लगाते है
अपने को स्वच्छ दुसरे को गलत ठहराते है,
इस भ्रम की स्थिति में मतदाता हो गया मौन
सही ये है गलत वो इसका फैसला करे कौन,
क्योकि सारे ही है चोर आपस में मौसेरे भाई
चुनाव आया तो आपस में करने लगे लड़ाई,
चुनाव में कोई एक उम्मीदवार जीत जाएगा
अंत में हारने वाला हमें ही दोषी ठहराएगा,
इस स्थिति से निपटने का किया जाय उपाय
क्यों न इस बार नोटा की बटन दबाई जाय,
सोच समझकर मतदाता जरूर करें मतदान
तभी तो होगा भारत के मानवता का कल्यान