विचार, अपने विचारों को आज बताना चाहता हूँ,
बस आपके साथ हमेशा रहना चाहता हूँ!
पर क्या करू जीवन की बाकी है पढाई,
समझ में नही आता ये कैसी है लड़ाई!
क्यों हम मोह के चक्कर में पड रहे है,
बिना हथियार इस संसार में लड़ रहे है!
जानता हूँ लड़ाई व्यर्थ की है जीवन में,
फिरभी क्यों नही बैठती है बात मन में!
मुझको इस तरह का रास्ता दिखा ईश्वर,
खत्म हो जाए अब आने जाने का सफर!
नही जाना चाहता हूँ मरने के बाद मरघट,
आत्मा में हो जाए अब तो ज्योति प्रगट!
एक बात शेष है उसको भी बताना चाहता हूँ,
तन को तमाशा नही तीरथ बनाना चाहता हूँ!
dheerendra,"dheer"