जिन्दगी
जिन्दगी सिर्फ दो अक्षरों की कहानी है
एक साँस आनी है एक साँस जानी है,
जिन्दगी सिर्फ दो अक्षरों की कहानी है
एक साँस आनी है एक साँस जानी है,
मृत्यु समय धन दौलत याद नही आती
याद आता है तो सिर्फ एक घूँट पानी है
ऋषि मुनियों ने इस सत्य को जाना है
छिपे इस गूढ़ मूल तत्व को पहचना है,
उन्होंने हमे कुछ सुंदर सन्देश दिए
सुख शान्ति से जीने के उपदेश दिए,
पंचतत्व से बने है हम हमको बतलाया
क्या हो ढंग जीने का हमें सिखलाया,
शीतल हवा सा गगन में बहना सीखो
निर्मल जल सा थल में रहना सीखो,
सीखो तुम मन का विस्तार गगन से
सीखो तुम तेज अपार अग्नि से,
धरा से भार का सहना सीखो
सदैव उदार तुम रहना सीखो,
जिन्दगी इन्हीं पंचतत्वों की कहानी है
एक साँस आनी है एक साँस जानी है,
रचनाकार - श्याम श्री वास्तव "रोहित"
F - 16, तुलसी नगर , भोपाल
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