शनिवार, 22 दिसंबर 2012

समाधान समस्याओं का,,,


नेता जी से -
उनकी पत्नी ने पूछा - ?
अजी, आखिर निरक्षरता, बेरोजगारी,
व देश की अन्य समस्याये,
पूर्ण रूपेण हल क्यों नही हो पाती,
पहले तो नेता जी झुझलाये
फिर उन्होंने,
राजनीति के
सारे राज समझाये!
और बोले -
यदि सभी निरक्षरों को
मिल जाएगा ज्ञान
फिर अपना कौन रखेगा ध्यान ?
यदि बेरोजगारों को
मिल जाएगा रोजगार
फिर अपना कौन झाकेगा द्वार ?
किसको देगें हम आश्वासन,
और कौन सुनेगा अपना भाषण ?
आगे बढे और बोले -
यदि सभी समस्यायें सुलझा दी गई
तथा रोक दी गई हड़तालें
एवं घटनाएँ लोमहर्षक
फिर हे प्रिये,
कहाँ से जुटेगे श्रोता
और कहाँ से फंसेगें  दर्शक  ?,,,,,,



धीरेन्द्र सिंह भदौरिया,,,,,

55 टिप्‍पणियां:

  1. कुशलता पूर्वक अपना सन्देश देने में सफल कविता बहुत कुछ कह गयी है ......बधाईयाँ जी

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  2. नेताओं पर व्यंग्य करती शानदार रचना

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  3. मुझे लगा था बहुत गंम्भीर कविता होगी ...पर ये तो सटीक व्यंग्य है :)

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  4. नेताओ ने देश का कर दिया बंटागोल
    धीरेन्‍द्र जी ब्‍लाग की टैम्‍पलेट बहुत ही आर्कषक लग रही है नागपाल जी का सहयोग बहुत कामयाब रहा है

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  5. सटीक और सार्थक अभिव्यक्ति , साथ ही ब्लॉग का टेम्पलेट बड़ा सुन्दर लग रहा है। बस मेनू बार भी सेट कर लें।

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  6. जय हो इन नेताओं की. जब इस देश का बंटाधार नहीं कर देंगे यह शांति से नहीं बैठेंगे.

    सुंदर प्रस्तुति.

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  7. सच कहा है ... फिर इन नेताओं की दूकान कैसे चमकेगी ....
    देश को डुबो कर मानेंगे ये ...

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  8. राजनितिक धुरंधरों कि पोल खोलती अच्छी व्यंग्यात्मक रचना !!

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  9. बहुत ही बढ़ियाँ रचना...
    नेताओ का राज बता दिया...
    बहुत खूब....
    :-)

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  10. सटीक कटाक्ष... देश से इन्हें क्या मतलब अपना घर भरा रहे, ये तभी खुश...

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  11. सुंदर व्यंग्य..प्रभावपूर्ण।

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  12. आपकी यह बेहतरीन रचना शुकरवार यानी 28/12/2012 को

    http://nayi-purani-halchal.blogspot.com पर लिंक की जाएगी…
    इस संदर्भ में आप के सुझाव का स्वागत है।

    सूचनार्थ,

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  13. बनाए रहो राजा समस्याएं एक दिन ये ही तुम्हें खायेंगी देखते हैं कब तक सुरक्षित रह पातीं हैं शीला और सोनिया भी दिल्ली में .बढिया तंज की है इन .....महा -राजाओं पर लोकतंत्र के .

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  14. यदि बेरोजगारों को
    मिल जाएगा रोजगार
    फिर अपना कौन झाकेगा द्वार ?
    किसको देगें हम आश्वासन,
    और कौन सुनेगा अपना भाषण ?
    bilkul sateek rachana ...karara vyang.

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  15. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (24-12-2012) के चर्चा मंच-११०३ (अगले बलात्कार की प्रतीक्षा) पर भी होगी!
    सूचनार्थ...!

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  16. बस यही स्वार्थी मानसिकता तो प्रगति में बाधक है ...अच्छा व्यंग्य!

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  17. सटीक व्यंग ....काश!कि ऎसी हमारी सोच न होती !

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  18. आदरणीय धीरेन्द्र सर वर्तमान परिस्थिति पर सटीक व्यंग कसा है बधाई स्वीकारें

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  19. धीरेंद्र जी नमस्कार
    पूर्व में हुई चर्चा के अनुसार आपके ब्लाग 'काव्यांजलिÓ की कविता 'समाधान समस्याओं काÓ को भास्कर भूमि में प्रकाशित किया गया है। इस लेख को आप भास्कर भूमि के ई पेपर में ब्लॉगरी पेज नं. 8 में देख सकते है। हमारा वेब साइट है। www.bhaskarbhumi.com
    सधन्यवाद
    नीति श्रीवास्तव

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  20. ज्ञान निदान नहीं है राजनीति का, उलझाये रहना ही सततता है इसकी।

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  21. फिर हे प्रिये,
    कहाँ से जुटेगे श्रोता
    और कहाँ से फंसेगें दर्शक ?,
    सटीक व्यंग्य......

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  22. सामयिक रचना.....व्यंग्य अच्छा लगा.

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  23. फिर हे प्रिये,
    कहाँ से जुटेगे श्रोता
    और कहाँ से फंसेगें दर्शक ?
    सटीक कटाक्ष...सुन्दर व्यंग्य धीरेंद्र जी

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  24. सही कटाक्ष करती शानदार रचना बहुत बहुत बधाई

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  25. आज के नेताओं को अवश्य पढना चाहये।इनके लिए उचित संदेश,धन्यबाद।

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  26. सही कटाक्ष करती शानदार रचना बहुत बहुत बधाई .उचित संदेश,धन्यबाद।

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  27. नेता और जनता दोनों की हक़ीक़त।

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  28. वर्तमान हालात पर अति सटीक कटाक्ष।

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  29. बेहतरीन सटीक व्यंग्य,,,,,

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